Bhadohi News: पानी में डूबी गांव की सड़क, टावर पर चढ़े युवक, गांववालों ने कहा- अब रिश्ता भी नहीं होता तय
Bhadohi News: भदोही ज़िले के एक गांव में जल निकासी की सालों पुरानी समस्या एक बार फिर चर्चा में आ गई है। गांववालों की उम्मीदें टूट चुकी थीं, लेकिन इस बार तीन युवकों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। रविवार सुबह तीन युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गए और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया।
घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। एक ओर ग्रामीण इन युवकों की हिम्मत की तारीफ कर रहे थे, तो वहीं दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन की टीम उन्हें नीचे उतारने में जुट गई। दोपहर करीब दो बजे प्रशासन की ओर से जल निकासी की व्यवस्था का आश्वासन मिलने पर तीनों युवक टावर से नीचे उतरे।

हालांकि, नीचे उतरते ही पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया और बाद में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
6 साल से लटक रहा है वादा, टूटी उम्मीदें
भदोही ज़िले के गोपीगंज कोतवाली क्षेत्र के बड़ी गिराई गांव में जल निकासी की समस्या कोई नई नहीं है। गांववाले 2018 से इसकी शिकायत कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। 2022 के विधानसभा चुनाव में नाराज़ ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार भी किया था।
उस वक्त प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि चुनाव के बाद गांव की समस्या को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन छह साल बाद भी हालात जस के तस हैं। इसी निराशा के बीच गांव के अभिषेक गुप्ता (19), अंकित गौड़ (19) और मुन्ना मौर्य (45) ने विरोध का अलग तरीका अपनाया।
बेटियों की शादी पर भी मंडरा रहा संकट
गांव की महिलाओं ने बताया कि जल जमाव और कच्चे रास्तों की वजह से लोग यहां रिश्ते करने से कतरा रहे हैं। अप्रैल में गांव में कई शादियां हैं लेकिन रास्ता न होने के कारण बारात आने को लेकर घरों में चिंता बनी हुई है। शादी के कार्ड बंट चुके हैं, लेकिन रास्ता अब भी पानी से भरा है।
ग्रामीण महिलाओं अंगुरा देवी, शीला, शकुंतला और निर्मला का कहना है कि प्रशासन को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि अब तो गांव की लड़कियों के रिश्ते भी टूटने लगे हैं।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
मोबाइल टावर पर चढ़े युवकों को नीचे लाने पहुंचे तहसीलदार संजय कुमार ने जल निकासी व्यवस्था जल्द बहाल करने का भरोसा दिया। लेकिन इसके कुछ देर बाद ही पुलिस ने युवकों को हिरासत में लेकर थाने ले गई। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की हरकत से कानून व्यवस्था प्रभावित होती है।
पुलिस मीडिया सेल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तीनों युवकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने समस्या को हल करने की बजाय विरोध करने वालों को ही अपराधी बना दिया।
इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है-क्या आम आदमी को अपनी समस्या बताने के लिए इस तरह के कदम उठाने होंगे? ग्रामीणों का कहना है कि जब लिखित प्रार्थनापत्र, वोट का बहिष्कार और कई सालों की शिकायतों से कुछ नहीं हुआ, तब मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा।












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