Stone Pelting in Sambhal: शाही जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची टीम पर पत्थरबाजी, 3 की मौत
Stone Pelting in Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची टीम पर लोगों ने पत्थरबाजी की है। जिस तरह से पुलिस और सर्वे करने वाली टीम पर लोगों ने पत्थरबाजी की है, उसके बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वह पत्थरबाजी ना करें।
इस घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमे देखा जा सकता है कि लोग पुलिस के जवानों पर पत्थर फेंक रहे हैं। पत्थरबाजों पर काबू पाने के लिए पुलिस के जवानों ने आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया। इस हिंसा में तीन लोगों की जान चली गई है। तीनों मृतकों का नाम नोमान, बिलाल और नईम है।

जिस तरह से भारी जमकर लोगों ने यहां पत्थरबाजी की है उसके बाद पुलिसवाले खुद को बचाते हुए नजर आए। पुलिस के जवान हेलमेट और तमाम सुरक्षा गार्ड की मदद से पत्थरबाजों पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो में सुना जा सकता है कि पुलिस अधिकारी जवानों से कहते हैं कि हेलमेट लगाओ।
बता दें कि वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन की याचिका पर सिविल कोर्ट जज ने सर्वे का आदेश दिया है। विष्णु शंकर ने अपनी याचिका में का है कि मस्जिद असल में मंदिर थी। जिसके बाद टीम यहां सर्वे के लिए पहुंची है।
सरकार की दो टूक
जिस तरह से मस्जिद का सर्वे करने गई एएसआई की टीम पर पत्थरबाजी की गई है उसपर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि माननीय कोर्ट के आदेश का पालन कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, उसे कराया जाएगा। जो कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले 19 नवंबर को भी इस तरह का सर्वे किया गया था। यह सर्वे स्थानीय लोगों, मस्जिद प्रबंधन कमेटी के सदस्यों और पुलिस की टीम की मौजूदगी में हुआ था।
स्थिति बिगड़ने पर, जिला मजिस्ट्रेट डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई सहित कानून प्रवर्तन अधिकारी और अधिकारी अशांति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंचे।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एडवोकेट कमिश्नर रमेश राघव और उनकी टीम के मस्जिद पहुंचने से दिन भर की हलचल और बढ़ गई। इन प्रयासों के बावजूद, माहौल तनावपूर्ण बना रहा, साइट के चारों ओर पत्थर बिखरे हुए थे।
बता दें कि शुक्रवार की नमाज के दौरान, मुरादाबाद और बरेली संभाग के लगभग आठ जिलों से पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। जामा मस्जिद की ओर जाने वाली सड़कों को बांस की बैरिकेड्स से बंद कर दिया गया था, और आगे की गड़बड़ी को कम करने के उद्देश्य से सार्वजनिक पहुंच को रोकने के लिए पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था।












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