MP:कभी दिल्ली में रायसीना हिल्स के मालिक थे लख्खी शाह, सागर झील में लगेगी प्रतिमा, जानिए कौन हैं
सागर, 24 जुलाई। कभी दिल्ली के रायसीना टांडा गांव (वर्तमान संसद भवन व राष्ट्रपति भवन) के मालिक रहे लख्खी शाह बंजारा की ख्याति दिल्ली से लेकर सारे देश में फैली है। सागर से उनका सीधा जुड़ाव झील के कारण है, उनको सागर झील खुदवाने वाले व अपने बेटे-बहु की कुर्बानी देने वाले महान दानवीर और नायक के रुप में याद किया जाता है। लख्खी शाह को सागर में लाखा बंजारा नाम से संबोधित किया जाता हैं। सागर में झील संरक्षण प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट सिटी सागर झील के अंदर लाखा बंजारे की भव्य प्रतिमा लगवाने जा रही है। झील में प्लेटफॉर्म भी तैयार किया जा रहा है।

ग्वालियर में तैयार हो रही 21 फीट ऊंची प्रतिमा
सागर की झील को खुदवाने वाले लाखा बंजारा कि 21 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा ग्वालियर में तैयार हो रही है। ग्वालियर में धातु की प्रतिमा तैयार करने में कारीगर जुटे हुए हैं। आगामी कुछ महीनों में यह प्रतिमा सागर आ जाएगी। यहां बस स्टैंड के सामने तालाब के अंदर प्रतिमा के स्थापित किया जाएगा इसके लिए झील में बनाया गया प्लेटफॉर्म भी लगभग तैयार हो गया है।

कौन हैं लक्खी शाह, दिल्ली के रायसीना हिल्स से क्या संबंध है
सागर में झील का निर्माण कराने वाले लाखा बंजारा को बाबा लख्खी शाह बंजारा के नाम से इतिहास में जाना जाता है। सागर में इतिहासकार डॉ. रजनीश जैन बताते हैं कि लख्खी शाह का जन्म 15 अगस्त 1580 को दिल्ली के रायसीना टांडा में हुआ था। यह वही जगह है जहां आज राष्ट्रपति भवन और संसद भवन बने हैं। उनके पिता का नाम गोधू व दादा का नाम ठाकुरदास बंजारा था। उनका परिवार रायसीना के मालिक थे। उनका परिवार पीढ़ियों से गुरु नानक साहिब के श्रद्धालु सिक्ख रहे हैं। 11 नवंबर 1675 गुरु तेग बहादुर साहिब को दिल्ली में औरंगजेब के आदेशों पर शहीद किया गया, तब बाबा लख्खी शाह बंजारा चांदनी चौक से गुरु तेग बहादुर के शरीर को उठाकर लाए और अपने घर में उनका अंतिम संस्कार किया था। उसके बाद खुद के घर को आग लगा दी थी।

लख्खी शाह के पास दो लाख बीस हजार बैल व हजारों बैलगाड़ियां थी
इतिहासकार डॉ. रजनीश जैन के अनुसार इतिहास के पुराने दस्तावेजों के अनुसार लख्खी शाह द्वारा पंजाब-हरियाणा में जलाशय बनाने या उनको संवारने का जिक्र मिलता है। चूंकि लख्खी शाह बड़े कारोबारी थे इसलिए उसके पास दो लाख बीस हजार बैल और कई हजार मालवाहक बैलगाड़ियां थीं। एक काफिले में 10 हजार तक बैलगाडियां लेकर चलते थे। बंजारा लोग मूलत: नमक, अनाज के अलावा घोडों की काठें या जीन, रकाबें, हौदे, सैन्य रसद का सामान परिवहन करते थे। सागर के नमकमंडी इलाके में आज के अफगानी पाकिस्तानी इलाकों से नमक आता था और यहां की उपज उत्तरी इलाके में जाती थी। बुंदेलखंड इलाके में लख्खी शाह का काफिला ही कारोबार करता था। काफिले के लिए वे हर प्रमुख पडाव पर कुंए तालाब और सरायं आदि बनवाते थे।

झील पर करोडों की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर भी बन रहा
स्मार्ट सिटी झील संरक्षण प्रोजेक्ट के अलावा सागर में मुख्य शहर की ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए तालाब के अंदर से एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण भी कर रही है। झील के अंदर इसके बेस और पिलर खडे करने काम लगभग अंतिम दौर में चल रहा है। करीब सवा दो करोड की लागत से इसका निर्माण चल रहा है।












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