सियासत: पहले जुदा-जुदा, अब साथ-साथ नजर आए मंत्री भूपेंद्र और गोविंद, अनबन के बाद गले भी मिले

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में मंत्री गोविंद राजपूत और मंत्री भूपेंद्र सिंह को एक-दूसरे का विरोधी माना जाता रहा है। एक ही पार्टी में रहते हुए भी दोनों में कम मेल-मुलाकात कम संवाद होता है। सियासत के चलते में इनमें बीच में मतभेद भी नजर आए। चुनाव के ठीक पहले नजारे बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। मंत्री भूपेंद्र और गो​विंद एक मंच पर न सिर्फ नजर आ रहे हैं, बल्कि गले मिलकर एक होने का संदेश भी दे रहे हैं।

MP: पहले जुदा-जुदा, अब गले मिलते दिखे मंत्री गोविंद-भूपेंद्र

सागर जिले की सुरखी विधानसभा क्षेत्र में राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत द्वारा विभिन्न समाजों का सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। इसी क्रम में क्षत्रिय, कायस्थ, कपूर, ओसवाल और जाट समाज का सम्मान समारोह आयोजित हुआ। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह को आमंत्रित किया गया था। वे न सिर्फ शामिल हुए बल्कि मंच पर गोविंद राजपूत से गले मिलते, लोगों को एक साथ आने का संदेश देते नजर आए। आयोजन में भूपेंद्र सिंह खेमे के माने जाने वाले सांसद राजबहादुर सिंह के अलावा हरियाणा करनाल से सांसद संजय भाटिया भी शामिल हुए।

मंत्रियों का गले मिलना इसलिए बना चर्चा का विषय
दरअसल की सुरखी विधानसभा से वर्तमान मंत्री भूपेंद्र सिंह चुनाव जीते थे और उन्होंने उस दौर में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी गोविंद राजपूत को हराया था। वहीं यहां से एक चुनाव में भूपेंद्र सिंह कांग्रेस प्रत्याशी गोविंद सिंह से हार चुके हैं। एक समय सुरखी की राजनीति में भूपेंद्र और गोविंद जानी दुश्मन कहलाते थे। लेकिन बाद में हालात बदले और दोनों एक साथ एक पार्टी एक मंच पर आ गए। सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वालों में गोविंद राजपूत भी शामिल थे और इसमें भूपेंद्र सिंह की अहम भूमिका थी।

CM से भूपेंद्र ​सिंह की शिकायत करने पहुंचे थे गोविंद राजपूत
बता दें कि चंद महीनों पहले मंत्री गोविंद राजपूत, मंत्री गोपाल भार्गव, सागर विधायक शैलेंद्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया मुख्यमंत्री शिवराज​ सिंह चौहान के बाद नगरीय आवास एवं विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह की शिकायत करने पहुंचे थे। कारण सागर जिले में मंत्री सिंह द्वारा अलग-अलग इलाकों से कांग्रेस के उन नेताओं को भाजपा में लाना था जो मंत्री भार्गव, गोविंद और विधायक शैलेंद्र जैन व प्रदीप लारिया के विरोधी रहे थे। वहीं प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर भी नाराजगी जताई जा रही थी। इसके बाद सीएम ने एक होकर रहने और मिलकर चुनाव लड़ने की नसीहत दी थी।

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