MP Assembly Elections 2023: BJP विधायक शैलेंद्र जैन के भाई सुनील जैन के आसपास घूम रही Congress की रणनीति
MP Assembly Election 2023: सागर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस की चुनावी राजनीति और रणनीति दो भाईयों पर केंद्रित होकर रह गई है। बता दें कि भाजपा से सीनियर विधायक शैलेंद्र जैन तीन दफा से चुनाव जीत रहे हैं। यह सीट 30 साल से भाजपा के कब्जे में हैं। कांग्रेस यहां से चुनाव जीतने के लिए अब शैलेंद्र जैन के छोटे भाई व पूर्व देवरी विधायक सुनील जैन को आगे बढ़ा रही है। हालांकि यह चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, भाजपा और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के नाम तय करने और भविष्य में जीत कीप्लानिंग में जुट गई हैं। इस दौरान सागर विधानसभा सीट पर बड़ा ही रोचक गणित सामने आ रहा है। करीब 30 सालों से लगातार सागर सीट जीत रही भाजपा को पटखनी देने व 15 साल से विधायक शैलेंद्र जैन को शिकस्त देने के लिए कांग्रेस उनके छोटे भाई पूर्व विधायक सुनील जैन का नाम आगे कर रही है, ताकि भाई से भाई की काट निकाली जा सके। बता दें कि कांग्रेस के गलियारों में सुनील जैन का नाम फाइनल होने की बातें सामने आ रही हैं, हालांकि फिलहाल तक स्पष्ट रूप से तय कुछ भी नहीं हुआ है।
कांग्रेस की रणनीति, ताकि भाजपा प्रत्याशी बदल दे
दरअसल कांग्रेस पार्टी के सूत्र बताते हैं कि प्रदेश आलाकमान और कमल नाथ व दिग्विजय सिंह जिस रणनीति पर काम कर रहे हैं, उसमें सबसे पहले बतौर कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जैन का नाम आगे बढ़ाया जाए ताकि विधायक शैलेंद्र जैन और भाजपा पर दबाव बड़े कि सागर में भाई-भाई के बीच कैसे चुनावी घमासान हो सकता है। इधर भाजपा संगठन पर दबाव बनाने के लिए भी यह रणनीति अपनाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं, ताकि भाजपा पर शैलेंद्र जैन की जगह कोई दूसरे प्रत्याशी पर विचार करना पड़े तो कांग्रेस को चुनाव जीतने के चांस बढ़ सकें। भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी से शैलेंद्र जैन का टिकट फाइनल माना जा रहा है, जिस कारण सुनील जैन खुद अपने भाई के खिलाफ चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है।
महापौर चुनाव में सुनील जैन की पत्नी कांग्रेस प्रत्याशी थीं
बता दें कि बीते साल नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगीता डॉ.सुशील तिवारी के खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व विधायक सुनील जैन की पत्नी निधि जैन को मैदान में उतारा था। निधि जैन विधायक शैलेंद्र जैन की बहू हैं। इस कारण उन पर धर्म संकट था। बावजूद इसके विधायक व उनकी पत्नी ने खुले तौर पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार किया, भाजपा के लिए खुलकर वोट मांगे और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई थी, जिस कारण सागर में भाजपा महापौर प्रत्याशी विजयी भी रहे।












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