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सागर के देवरी गर्ल्स स्कूल में कोबरा का खौफ: 15 दिनों में 25 सांप पकड़े, छात्राओं में दहशत, 5 क्लासरूम बंद

मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी में शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल पिछले 15 दिनों से कोबरा सांपों के आतंक का गवाह बना हुआ है। स्कूल में रोजाना सांप और उनके बच्चों (सपोले) का निकलना जारी है, जिससे 1100 छात्राओं और शिक्षकों में दहशत का माहौल है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि स्कूल प्रबंधन ने 5 क्लासरूम बंद कर दिए हैं, और छात्राएं बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। सागर में कोबरा के डर से स्कूल में ताला: चार सबसे जहरीले सांप हर साल ले रहे ढाई हजार लोगों की जान।

अब तक 25 सांप पकड़े जा चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। यह खबर सागर के इस स्कूल में सांपों के आतंक, प्रशासनिक लापरवाही, और इससे उत्पन्न सामाजिक-सुरक्षा संबंधी सवालों पर विस्तार से प्रकाश डालती है।

Fear of cobra in Sagar Deori Girls School 25 snakes caught in 15 days panic among students

सांपों का आतंक: 15 दिनों में 25 कोबरा पकड़े गए

देवरी का शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल, जहां 1100 छात्राएं पढ़ती हैं, पिछले 15 दिनों से कोबरा सांपों की दहशत में है। स्कूल में कक्षा 4 और 5 में सबसे ज्यादा सांप देखे गए हैं, जिसके चलते इन्हें बंद कर दिया गया है। स्कूल की प्रिंसिपल ने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर स्कूल को कुछ दिनों के लिए बंद करने की मांग की है, क्योंकि सांपों का खतरा लगातार बना हुआ है।

शनिवार, 2 अगस्त 2025 को भी स्नेक कैचर की मदद से दो कोबरा सपोले पकड़े गए। @etvbharat.com ने 25 जुलाई 2025 को बताया, "सागर में देवरी के शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल में कोबरा सांप के बच्चे निकल रहे हैं। दहशत में शिक्षकों के साथ छात्राएं।" अब तक 25 सांप और सपोले पकड़े जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश जहरीले कोबरा हैं। प्रबंधन ने कक्षा 4 और 5 के फर्श की खुदाई कर कंक्रीट कराने का फैसला किया है, क्योंकि माना जा रहा है कि सांप जमीन के नीचे बने बिलों से निकल रहे हैं।

छात्राएं बरामदे में पढ़ने को मजबूर

लगातार सांपों के निकलने के कारण स्कूल की पांच कक्षाओं को बंद कर दिया गया है। छात्राएं अब बरामदे और खुले परिसर में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। एक छात्रा, प्रीति ठाकुर, ने कहा, "हमें हर समय डर लगा रहता है कि कहीं सांप न निकल आए। बरामदे में पढ़ना मुश्किल है, क्योंकि बारिश और गर्मी दोनों परेशान करते हैं।" शिक्षिका राधा शर्मा ने बताया, "हम हर कक्षा से पहले बेंच और फर्श की जांच करते हैं, लेकिन डर तो बना ही रहता है।"

स्कूल के आसपास कीटनाशकों का छिड़काव किया गया है, और स्नेक कैचर को नियमित रूप से बुलाया जा रहा है, लेकिन सांपों का आना बंद नहीं हुआ।

सांपों के आने का कारण: पर्यावरण और लापरवाही

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल के आसपास घनी झाड़ियां और खाली पड़ी जमीन सांपों के लिए अनुकूल आवास प्रदान कर रही हैं। मध्य प्रदेश में कोबरा, करैत, रसेल वाइपर, और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे चार जहरीले सांप हर साल करीब 2,500 लोगों की जान लेते हैं। सागर जिले में 2025 में जनवरी से जून तक 311 सांप काटने के मामले दर्ज हुए, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा हैं।

स्कूल परिसर की जर्जर इमारत और फर्श में दरारें सांपों के प्रवेश का मुख्य कारण मानी जा रही हैं। वन विभाग के अधिकारी रमेश यादव ने कहा, "स्कूल के पास जंगल और खेत हैं, जहां कोबरा सांपों के बिल हो सकते हैं। बारिश के मौसम में सांप बाहर निकलते हैं, और स्कूल की इमारत में दरारों से वे अंदर आ रहे हैं।" इसके बावजूद, स्कूल प्रबंधन और जिला प्रशासन ने स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

प्रशासनिक लापरवाही: प्रिंसिपल की मांग अनसुनी

स्कूल की प्रिंसिपल, सुनीता रावत, ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को पत्र लिखकर स्कूल को अस्थायी रूप से बंद करने की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। @bhaskarenglish.in के अनुसार, प्रिंसिपल ने लिखा, "छात्राओं और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए स्कूल को कुछ दिनों के लिए बंद करना जरूरी है।" डीईओ रमेश पाल ने कहा, "हमने वन विभाग और स्नेक कैचर की मदद से उपाय शुरू किए हैं। स्कूल बंद करने का फैसला जल्द लिया जाएगा।" हालांकि, परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन की ढीली प्रतिक्रिया की आलोचना की है।

एक परिजन, श्यामलाल, ने कहा, "मेरी बेटी स्कूल जाने से डर रही है। प्रशासन को तुरंत स्कूल बंद करना चाहिए और परिसर को सुरक्षित करना चाहिए।"

मध्य प्रदेश में सांपों का खतरा

मध्य प्रदेश में सांप काटने की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। 2025 में जनवरी से जून तक प्रदेश में 4,205 सांप काटने के मामले दर्ज हुए, और 2020 से 2024 तक 10,700 लोगों की सांप काटने से मौत हुई। सागर जिला इस मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 311 मामले दर्ज हुए। मंदसौर में 27 जुलाई 2025 को एक डायल 100 पुलिस वाहन में 12 फुट का अजगर घुस गया था, जो बाद में जंगल में चला गया।

डॉ. भूपेश्वरी पटेल, AIIMS भोपाल, ने कहा, "लोग सांप काटने के बाद अंधविश्वासों पर भरोसा करते हैं, जिससे देरी होती है। स्कूलों में सांपों की मौजूदगी को गंभीरता से लेना चाहिए।" विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्कूलों में सांपों के प्रवेश को रोकने के लिए नियमित सफाई, कीटनाशक छिड़काव, और इमारतों की मरम्मत जरूरी है।

सामाजिक और शैक्षिक प्रभाव

इस घटना ने न केवल छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि उनके शैक्षिक भविष्य को भी प्रभावित किया है। कई छात्राओं ने डर के कारण स्कूल आना बंद कर दिया है। एक शिक्षक, अनिता वर्मा, ने कहा, "छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हैं। बरामदे में पढ़ाई से उनका ध्यान भटक रहा है।" सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा ने कहा, "यह घटना स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर करती है। सरकार को तत्काल स्कूलों को सुरक्षित करने के लिए बजट आवंटित करना चाहिए।"

दर्जनों छात्राओं ने स्कूल छोड़ दिया है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। समाजशास्त्री डॉ. संजय वर्मा ने कहा, "सांपों का डर न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। यह बच्चों में लंबे समय तक डर पैदा कर सकता है।"

अन्य राज्यों में समान घटनाएं

सांपों का स्कूलों में प्रवेश देश के अन्य हिस्सों में भी एक समस्या रही है। केरल के वायनाड में एक 10 वर्षीय छात्रा शेहला शेरिन की कक्षा में सांप काटने से मौत हो गई थी, क्योंकि स्कूल ने समय पर चिकित्सा सहायता नहीं दी। 2017 में लुधियाना के एक सरकारी स्कूल में रसोई और साइंस लैब में तीन सांप पाए गए थे, जिससे हड़कंप मच गया था। इन घटनाओं ने स्कूलों में सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर किया है।

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