Sagar: मंत्रियों के सामने कांग्रेस को नहीं मिल रहे सशक्त-दमदार चेहरे, पुरानो से परहेज, नए मिल नहीं रहे
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास भाजपा के कद्दावर और दिग्गज मंत्रियों के खिलाफ स्थानीय व दमदार प्रत्याशियों का संकट हैं। बुंदेलखंड के संभागीय मुख्यालय सागर से आने वाले तीन मंत्रियों के खिलाफ प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। संभव है कांग्रेस यहां बाहरी प्रत्याशियों को मौका दे...

मप्र विधानसभा चुनाव 2023 का बिगुल बज चुका है। मई-जून में कांग्रेस ने दावा किया था कि सबसे पहले वे अपने प्रत्याशी घोषित कर देंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा, सबसे पहले भाजपा ने बुंदेलखंड सहित प्रदेश में 39 विधानसभाओं के प्रत्याशी घोषित कर दिए। बीते हफ्ते आम आदमी पार्टी ने भी मप्र में 10 टिकट घोषित कर दिए...। जबकि कांग्रेस अभी प्रत्याशियों पर मंथन पर मंथन कर रही है। इसके पीछे एक बड़ा कारण भाजपा के कब्जे वाली और कद्दावर नेताओं व मंत्रियों की विधानसभाओं में कांग्रेस के पास सशक्त व मजबूत प्रत्याशियों का टोटा है।
बात बुंदेलखंड इलाके की करें तो संभागीय मुख्यालय व सागर जिले में कांग्रेस के पास देवरी और बंडा विधानसभा हैं। जबकि भाजपा का 6 विधानसभाओं पर कब्जा है। इनमें से सुरखी, खुरई और रहली विधानसभाओं से सरकार में तीन मंत्री हैं। इनमें कद्दावर व प्रदेश के सबसे सीनियर विधायक व पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव, खुरई से कद्दावर विधायक भूपेंद्र सिंह नगरीय आवास एवं विकास मंत्री तो सुरखी से सिंधिया खेमे के गोविंद राजपूत राजस्व एवं परिवहन मंत्री हैं। इन तीनों विधानसभाओं में कांग्रेस के पास स्थानीय स्तर पर ऐसा कोई कद्दावर और मजबूत प्रत्याशी नहीं है जो दमदारी से मैदान में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ खड़ा हो सके। वहीं कुछ ऐसी ही स्थिति सागर विधानसभा में हैं, जहां भाजपा के शैलेंद्र जैन तीन बार के विधायक हैं।
पुराने प्रत्याशियों पर दावं लगाने से बच रही कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी सूत्रों की माने से सागर जिले में बीना, सागर, सुरखी, खुरई, रहली, नरयावली सीटों पर लगातार हारती आ रही है। फिलहाल कांग्रेस से टिकट के दावेदारों की लाइन लगी है, लेकिन इनमें से कोई भी ऐसा नहीं है जो जीत का दावा ठोक सके। कांग्रेस पुराने व लगातार हार रहे प्रत्याशियों पर दांव लगाने से गुरेज कर रही है। मालूम हो की बीते दिनों सागर जिले से सटे यूपी के ललितपुर के गुड्डू राजा ने कांग्रेस ज्वाइन की थी। उन्हें मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ खुरई से बतौर कांग्रेस प्रत्याशी का चुनाव लड़ाने की सुगबुगाहट है। लेकिन संभव है बाहरी प्रत्याशी के तौर पर मतदाता उन्हें शायद ही स्वीकार करें।












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