Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

जलवायु परिवर्तन पर भारतः 100 अरब डॉलर तो सागर में बूंद बराबर हैं

नई दिल्ली, 01 अक्टूबर। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियो से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद चाहिए. संयुक्त राष्ट्र की क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस (COP26) में इस महीने जलवायु परिवर्तन पर अहम विमर्श होना है.

Provided by Deutsche Welle

यूएन के सम्मेलन से पहले अमीर देशों पर जलवायु परिवर्तन के लिए अहम वित्तीय कदम उठाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है. 2009 में दुनिया के सबसे धनी देशों ने सालाना सौ अरब डॉलर देने का वादा किया था ताकि गरीब देश, जो जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, इन चुनौतियों का सामना कर सकें. हालांकि यह वादा कभी पूरा नहीं हुआ.

भारत की प्रतिबद्धता कहां है?

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा सौ अरब डॉलर से कहीं ज्यादा मदद की जरूरत है. उन्होंने कहा, "ये जो सौ अरब डॉलर की बात आधुनिक अर्थव्यवस्थाएं जलवायु वित्त के नाम पर कर रहे हैं, असल में समुद्र में एक बूंद बराबर हैं. मुझे लगता है कि उनका योगदान कहीं ज्यादा होन चाहिए."

वैसे भारत ने अब तक कार्बन उत्सर्जन करने के लिए अब तक कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है. यानी, उसने अब तक नहीं बताया है कि वह किस साल तक देश में कार्बन उत्सर्जन का स्तर शून्य कर लेगा.

चीन ने 2060 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का वादा किया है जबकि अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि उनका देश 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को 50-52 प्रतिशत तक कम करके 2005 के स्तर पर ले जाएगा.

सुब्रमण्यन कहते हैं कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत अपने ऊर्जा संसाधानों में नवीकरणीय स्रोतों को जोड़ना जारी रखेगा और उद्योगों को भी स्वच्छ ऊर्जा के फायदे उठाने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी कंपनियों के लिए लाभ उपलब्ध करवा रही है, जो स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते हैं. सुब्रमण्यन ने कहा, "इन सब कदमों के बिना नेट जीरो की बात करना बस बात करना ही है."

कोयले से बिजली कब तक

भारत ने 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए संयंत्र लगाए हैं जो कुल क्षमता का लगभग 25 प्रतिशत है. ऊर्जा की अपनी बढ़ती जरूरतों के लिए भारत 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन 450 गीगावाट तक ले जाना चाहता है.

सुब्रमण्यन कहते हैं कि भारत 7 प्रतिशत से ज्यादा सालाना आर्थिक विकास दर चाहता है और उसके लिए हर संभव प्रयास करेगा. कोयले से बिजली पैदा करना उन प्रयासों का हिस्सा बना रहेगा.

भारत ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है. चीन और अमेरिका ही उससे ऊपर हैं. इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन रोकने की लड़ाई में भारत की भूमिका बेहद अहम है.

COP26 सम्मेलन को लेकर दुनियाभर के विशेषज्ञ बड़ी उम्मीदें लगाए हुए हैं. उन्हें उम्मीद है कि धरती का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से बढ़ने से रोकने में सरकारों की प्रतिबद्धता हासिल करने में यह सम्मेलन योगदान देगा. वैज्ञानिकों ने 1.5 डिग्री सेल्यिस की सीमा तय की है, जिससे ज्यादा औसत तापमान का बढ़ना विनाशक हो सकता है.

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

Source: DW

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+