रीवा हुआ पानी-पानी: भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने किया रानी तालाब का निरीक्षण

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में पिछले 48 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर को पानी-पानी कर दिया है। नदी-नाले उफान पर हैं, सड़कों पर घुटने तक पानी भरा है, और कई स्कूलों व घरों में जलभराव की स्थिति बन गई है। बिगड़ते हालात को नियंत्रित करने के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने स्वयं मोर्चा संभाला और रानी तालाब का निरीक्षण किया।

उन्होंने राहत कार्यों का जायजा लिया और घोषणा की कि नगर निगम का कंट्रोल रूम 24x7 कार्यरत है, साथ ही प्रभावित रहवासियों के लिए गुढ़ चौराहा के शासकीय स्कूलों में ठहरने और स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई है। यह घटना न केवल रीवा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मानसून की चुनौतियों और प्रशासनिक तैयारियों को उजागर करती है।

Rewa flooded Flood-like situation due to heavy rains Deputy CM Rajendra Shukla inspected Rani Talab

भारी बारिश ने मचाई तबाही

रीवा में 10 जुलाई 2025 से शुरू हुई भारी बारिश ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। टमस नदी, बिछिया नाला, और सिलपारा नाला उफान पर हैं, जिसके कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है। गुढ़ चौराहा, सिरमौर चौराहा, बोधाबाग, नेहरू नगर, सतना रोड, और रानी तालाब के आसपास के क्षेत्रों में सड़कों पर घुटने तक पानी जमा है। कई स्कूलों और घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

स्थानीय निवासी रमेश कुशवाहा ने बताया, "हमारे घर के बाहर पानी भर गया है। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो रहा है। सड़कें टूटी हैं, और जलभराव ने हालात और खराब कर दिए।"

डिप्टी सीएम का रानी तालाब दौरा

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, जो रीवा से विधायक भी हैं, ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 12 जुलाई 2025 को सुबह-सुबह रानी तालाब का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, और PWD के अधिकारी मौजूद थे। रानी तालाब, जो शहर का एक प्रमुख जलाशय है, बारिश के कारण लगभग लबालब हो चुका है। शुक्ला ने तालाब के जलस्तर, नालों की सफाई, और जल निकासी व्यवस्था का जायजा लिया।

उन्होंने कहा, "हालात को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। नगर निगम का कंट्रोल रूम 24x7 कार्यरत है। प्रभावित रहवासियों के लिए गुढ़ चौराहा के शासकीय स्कूल नंबर 1 और 2 में ठहरने और स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी को परेशानी न हो।"

Rewa flooded Flood-like situation due to heavy rains Deputy CM Rajendra Shukla inspected Rani Talab

प्रशासन की तैयारियां और राहत कार्य, बिगड़ते हालात को देखते हुए कई कदम उठाए हैं:

  • 24x7 कंट्रोल रूम: नगर निगम ने एक हेल्पलाइन नंबर (जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा) शुरू किया है, जहां लोग जलभराव या अन्य समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  • राहत शिविर: गुढ़ चौराहा के शासकीय स्कूलों में प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन, और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
  • जल निकासी: PWD और नगर निगम की टीमें नालों की सफाई और जल निकासी के लिए काम कर रही हैं।
  • अलर्ट मोड: जिला प्रशासन ने सभी नदी-नालों के किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
  • जिला कलेक्टर अमन सिंह राठौर ने कहा, "हमारी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। रानी तालाब और अन्य जलाशयों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। लोगों से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के साथ सहयोग करें।"

विपक्ष का हमला: "सड़कों पर गड्ढे, अब बाढ़ भी"

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस संकट को लेकर मोहन यादव सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "रीवा में बाढ़ जैसे हालात हैं, लेकिन सरकार की तैयारियां नाकाफी हैं। भोपाल में 216 करोड़ का PWD प्लान फेल हो गया, और अब रीवा पानी-पानी हो रहा है। डिप्टी सीएम के निरीक्षण से कुछ नहीं होगा, जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे।"

कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने टिप्पणी की, "BJP के राज में सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं, और अब बारिश ने हालात और खराब कर दिए। रीवा में लोग परेशान हैं, लेकिन सरकार केवल कंट्रोल रूम और आश्रय की बात कर रही है। क्या यह स्थायी समाधान है?"

रीवा की सड़कों और जल निकासी की समस्या

रीवा की सड़कें और जल निकासी व्यवस्था लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। PWD ने भोपाल में 216 करोड़ रुपये के प्लान के तहत व्हाइट टॉपिंग और नाली निर्माण का दावा किया था, लेकिन वहां की सड़कें भी पहली बारिश में टूट गईं। रीवा में भी सतना रोड, सिरमौर चौराहा, और रानी तालाब रोड जैसी प्रमुख सड़कें गड्ढों और जलभराव से जूझ रही हैं।

स्थानीय निवासी श्यामलाल प्रजापति ने कहा, "हर साल बारिश में यही हाल होता है। नाले भरे रहते हैं, सड़कें टूटी रहती हैं। सरकार केवल कागजी योजनाएं बनाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।" समाजशास्त्री डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा, "रीवा में बाढ़ जैसे हालात प्रशासनिक तैयारी की कमी को दर्शाते हैं। जल निकासी और सड़क निर्माण के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीतियों की जरूरत है।"

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