फीस नहीं हुई जमा तो शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की नातिन का काटा नाम, लाइन में लगकर जमा की फीस
रांची। कोरोना वायरस महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के चलते लोगों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो (Jagarnath Mahato) ने निजी स्कूलों को फीस के लिए अभिभावकों को परेशान नहीं करने की हिदायत दी थी। हालांकि, इस बार शिक्षा मंत्री को खुद ही स्कूल द्वारा फीस की मनमानी से जूझना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो की नातिन रिया की फीस जमा नहीं होने पर स्कूल ने उसे ऑनलाइन क्लास से हटा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा मंत्री तुरंत स्कूल पहुंचे और काउंटर पर खड़े होकर 22,800 रुपए की फीस जमा की। वहीं, जब उनसे इस घटनाक्रम को लेकर सवाल किया गया तो महतो ने कहा, वह मंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक अभिभावक के तौर पर स्कूल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनकी नातिन रिया ने उन्हें क्लास से हटाने के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने खुद ही स्कूल पहुंचकर फीस जमा करवाई। मंत्री की नातिन बोकारो डीपीएस स्कूल में पढ़ती है।
वहीं, दूसरी तरफ जब इस मामले को लेकर मीडिया कर्मियों ने बोकारो डीपीएस से जानकारी ली गई तो स्कूल की प्रधानाध्यपक शैलजा जयकुमार ने बताया कि छात्रा का नाम सूची से नहीं हटाया गया था। वहीं, इस मामले में शिक्षा पदाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं, ताकि स्कूल के दावे की पड़ताल की जा सके। बता दें कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की पुत्री रीना देवी नावाडीह में रहती हैं। रीना की बेटी रागिनी को डीपीएस चास में कक्षा चार में पढ़ती है।
वहीं, इस घटना पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी का आलम सरकार को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि चास के दिल्ली पब्लिक स्कूल की घटना तो बस एक उदाहरण मात्र है। चूंकि यह मामला सूबे के शिक्षा मंत्री के घर से संबंधित था, इसलिए मंत्री आनन-फानन में स्कूल पहुंच गए। उन्होंने कहा कि हर दिन राज्य के सैकड़ों-हजारों अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान हैं, लेकिन प्रदेश का शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार इन स्कूलों के सामने असहाय हैं।












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