वसीम का पैरों से लिखने का वीडियो हुआ था वायरल, प्रशासन ने अमेरिका से मंगवाकर लगा दिए सेंसर बेस्ड हाथ
"गम तो है हर एक को, मगर हौसला है जुदा जुदा, कोई टूट कर बिखर गया, कोई मुस्कुरा के चल दिया", ये शायद वसीम के हौसले का ही असर है कि प्रशासन भी उसकी मदद के लिए सात समुंदर पार कर गया।

उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद में प्रशासन की अनोखी और नायाब पहल ने एक गरीब परिवार के 10 साल के बच्चे को तो जैसे नई जिंदगी दे दी। बता दें कि पूर्व में हुए एक हादसे में इस बच्चे ने अपने दोनों हाथ तो गवां दिए थे, लेकिन इसने कभी हार नहीं मानी। ये बच्चा फिर भी स्कूल जाता था और अपने पैरों से लिखता था। जिसका वीडियो भी कुछ समय पहले काफी वायरल हुआ था। शायद बच्चे के इसी साहस को देख योगी सरकार और रामपुर जिला प्रशासन ने मिशन सामर्थ के तहत बच्चे के लिए अमेरिका से सेंसर बेस्ड हाथ मंगवाए और बच्चे के लगवा दिए। अब इन अमेरिकी हाथों के जरिए बच्चा अपनी तकदीर लिखेगा और जिले का नाम रोशन करेगा।

वसीम के हौसले को देख पिघला प्रशासन का दिल
दरअसल, रामपुर जिले के बेजना गांव निवासी 10 वर्षीय वसीम के दोनों हाथ करंट से झुलस गए थे, जिसको काटना पड़ा था। लेकिन उसके बावजूद भी वसीम ने हिम्मत नहीं हारी और वसीम हाथ न होने के बाद भी स्कूल पढ़ने जाता रहा और अपने पैरों से लिखता रहा। स्कूल में कोई भी प्रतियोगिता हो, उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लिया। वसीम के हाथ न होने के बावजूद भी उसने और बच्चों की तरह ही अपने आप को भी समझा। वसीम ने अपने अंदर कभी हीन भावना को नहीं आने दिया।

वसीम के पिता हैं मजदूर, जिला प्रशासन ने उठाया खर्च
उसके इसी जज्बे को देखते हुए जिला प्रशासन ने मदद के लिए हाथ बढ़ाएं और वसीम के कृत्रिम अंग यानि हाथ अमेरिका से मंगवा कर लगवाए। इसका सारा खर्च भी जिला प्रशासन ने ही उठाया। गौरतलब है कि वसीम के पिता एक मजदूर हैं और वसीम एक गरीब परिवार से हैं। इस कारण से वसीम के परिवार वाले यह खर्च नहीं उठा पाते। ऐसे में जिला प्रशासन की इस पहल से वसीम को उसके हाथ वापस मिले। वसीम के पिता ने जिलाधिकारी का नम आँखों से धन्यवाद किया।

हाईटेंशन तार से कटे थे बच्चे के दोनों हाथ
जनपद रामपुर के सेदनगर ब्लाक के ग्राम बेजना निवासी हिदायत अली जो पेशे से मजदूर हैं, उनका एक बच्चा वसीम जो इस वक़्त 10 साल का है। आज से 4 साल पहले छत के ऊपर से गुजर रही 11000 की बिजली की लाइन को नसमझी में वसीम ने पकड़ लिया था। जिसमें वसीम के दोनों हाथ झुलस गए थे और उसके बाद वसीम के हाथ काटना पड़े थे। बरहाल इस घटना से परिवार में काफी गम का माहौल था, लेकिन अब वसीम की मदद के लिए जिला प्रशासन आगे आया और वसीम के दोनों सेंसर बेस्ड हाथ अमेरिका से मंगवा कर उसे लगवाए है।

परिवार और वसीम का क्या कुछ है कहना
वसीम के पिता हिदायत अली ने बताया कि 4 साल पहले वसीम के साथ एक दुर्घटना हो गई थी। बिजली के तारों से उसके हाथ झुलस गए थे। जिसको काटना पड़ा था, वसीम इस वक्त 10 साल का है और तीसरी कक्षा में कमपोजिट विद्यालय घाटमपुर में पढ़ता है।
वही बच्चे के पिता हिदायत अली ने बताया वे पहले टेलर का काम करता था, लेकिन जब से यह हादसा हुआ है तब से वह घर पर ही रह कर आसपास मजदूरी करता है और अपने परिवार का पालन पोषण करता है। हिदायत अली के 4 बच्चे हैं जिसमें दूसरे नंबर का बच्चा वसीम है।

6 लाख की लागत से अमेरिका से आए वसीम के दोनों हाथ
हिदायत अली ने बताया कि जिलाधिकारी ने उनके बच्चे के हाथ लगवाने में काफी सहयोग किया है। ₹6 लाख रुपये के अमेरिका से उनके बच्चे के लिए कृतमअंग हाथ मंगवा कर लगवाए हैं। वसीम के पिता ने जिलाधिकारी का धन्यवाद किया।
वही वसीम के पिता हिदायत अली ने बताया कि उनके बेटे ने उनसे कहा कि जिलाधिकारी का और डीपीआरओ का एक फोटो लाकर मुझे दे दीजिए। जब भी मैं सुबह उठूंगा तो उनका फोटो देखकर उठूंगा। बरहाल वसीम का हाथ लगने से परिवार में खुशी का माहौल है।

रामपुर की जनता का भी है बड़ा योगदान: जिला अधिकारी रविंद्र कुमार मादड़
जिला अधिकारी रविंद्र कुमार मादड़ ने बताया कि 'मिशन सामर्थ' नाम से एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके तहत जो दिव्यांग बच्चे हैं उनको सर्जरी कराकर उन्हें ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। 3 माह पूर्व वसीम नाम का बच्चा हमें एक कार्यक्रम में मिला था तो हमने तय किया था कि इस बच्चे के हाथ लगवाए जाएंगे। उसके बाद हमने दिल्ली की एक संस्था से संपर्क किया और उनके माध्यम से अमेरिका से sensor-based हाथ मंगवाए। इसमें ₹6 लाख का खर्चा आया था और इसमें मैं रामपुर की जनता का भी धन्यवाद करूंगा, जो चाइल्ड केयर प्रोटक्शन फंड चलता है उस के माध्यम से वह खर्चा पूरा किया गया था।

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61 और बच्चों की कराई जाएगी सर्जरी
समाज में जो सामाजिक कार्य के लिए लोग आगे आते हैं, उन्हीं के माध्यम से यह कार्य कराया जा रहा है। इस पूरे अभियान में हमने 51 बच्चों की सर्जरी कराई है। अभी 10 बच्चे और बचे हैं। इस महीने हम उनकी भी सर्जरी कराएंगे। 102 बच्चे हमने चयनित किए थे और 61 बच्चे सर्जरी के लिए पाए गए थे। उन बचे हुए सभी बच्चों की सर्जरी कराई जाएगी।
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