Rajasthan News: आजाद हिंदुस्तान की यह कैसी तस्वीर, दो फीट पानी से होकर श्मशान पहुंची शव यात्रा

Rajasthan News: राजस्थान में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन पूरी तरह से बेपटरी हो गया है। सड़क से लेकर खेत तक यहां तक की श्मशान तक जाने वाले रास्ते भी पानी से भरे है। जिसके चलते आमजन को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश में लगातार बारिश के चलते राजधानी जयपुर से लेकर सूर्य नगरी जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, भरतपुर, करौली, दौसा, बूंदी, कोटा सहित कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हो गए है। सैकड़ों गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा सम्पर्क कटा हुआ है।

हद की बात तो यह है कि राजधानी जयपुर तक पहुंचने के लिए कई रास्ते पानी में डूब चुके है। जयपुर शहर में भी कई इलाकें पूरी तरह से जलमग्न है। ऐसे में टोंक जिले से आई एक तस्वीर की चर्चा होना लाजमी है।

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दरअसल टोंक जिले के दूनी इलाके में लुहारी का झोपड़ा के श्मशान तक पहुंचने लिए पक्की सड़क नहीं होने से चार घंटे तक शवयात्रा में शामिल लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ी है।

दूनी तहसील क्षेत्र की कनवाड़ा ग्राम पंचायत के लुहारी का झोपड़ा में श्मशान तक रास्ता पक्का नहीं होने से बुधवार को एक वृद्ध का अंतिम संस्कार करने काफी परेशान होना पड़ा। दो किमी के कच्चे रास्ते को पार करने में चार घंटे लग गये।

यह ही नहीं वृद्ध का अंतिम संस्कार करने के लिए जिस ट्रैक्टर -ट्रॉली में लकड़ियां भरकर लोग श्मशान स्थल तक ले जा रहे थे, वह भी रास्ते में पानी भरा होने से दो फ़ीट जमीन में धंस गया।

फिर उसे निकालने के लिए दूसरा ट्रैक्टर लाए, वह भी पानी में दो फ़ीट धंस गया। फिर तीसरा ट्रैक्टर लाए और लोग भी निकालने में जुटे। करीब दो घंटे की मशक्क्त के बाद बड़ी मुश्किल से ट्रैक्टरों को बाहर निकाला। फिर दोपहर करीब डेढ़ बजे वृद्ध का अंतिम संस्कार किया।

वार्ड पंच ओमप्रकाश मीना ने बताया कि लुहारी का झोपड़ा निवासी लोडक्या (70) पुत्र लाखा मीना का आज सुबह करीब 7 बजे वृद्धवस्था के चलते निधन हो गया था।

करीब 9 बजे लोग उसका अंतिम संस्कार करने के लिए दो किमी दूर श्मशान स्थल के लिए रवाना हुए, लेकिन पंचायत प्रशासन की ओर से अभी तक भी यह रोड पक्का नहीं बनाया है। इसके चलते बारिश के दिनों में लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। पक्का या ग्रेवल रोड नहीं होने 15-20 मिनट के रास्ते की दूरी तय करने में बारिश के दिनों में चार घंटे लग रहे है।

ग्रामीण पूरणमल मीणा, मदन लाल मीणा, मानसिंह मीना आदि ने बताया कि इस समस्या से सरपंच से लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।

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