Vasundhara Raje: क्या राजस्थान में अकेली पड़ गईं वसुंधरा राजे, करीबी नेता क्यों छोड़ रहे BJP?
Vasundhara Raje News Rajasthan: लोकसभा चुनाव 2024 में सबसे पहले वसुंधरा राजे सिंधिया की यह सोशल मीडिया पोस्ट पढ़िए, जिसमें लिखा है 'जीवन में संयम होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि धैर्यवान इंसान हर मुश्किल काम को भी आसानी से कर सकता है'
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर वसुंधरा राजे द्वारा अपनी तस्वीर के साथ शेयर की गईं ये बातें यूं तो जीवन का मंत्रा हैं, मगर सियासी पंडित इनके राजनीतिक मायने भी निकाल रहे हैं। कह रहे हैं कि राजस्थान में स्टेट लेवल की राजनीति में वसुंधरा का सियासी कद कम किए जाने की कोशिश हो रही हैं।

राजनीति के जानकारों के बीच चर्चा है कि राजस्थान में 'मैडम' व 'महारानी' जैसे नामों से भी पुकारे जाने वाली वसुंधरा राजे सिंधिया लोकसभा चुनाव 2024 में अकेली पड़ती नजर आ रही हैं।
वसुंधरा राजे की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट को कोटा से भाजपा के दिग्गज नेता प्रह्लाद गुंजल से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि वसुंधरा राजे के करीबी प्रह्लाद गुंजल भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने वाले हैं।
प्रह्लाद गुंजल के बारे में खबर है कि ये भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले हैं और कांग्रेस इन्हें कोटा से भाजपा के ओम बिरला के सामने टिकट दे सकती है। प्रह्लाद गुंजल का भाजपा से जाना वसुंधरा राजे के खेमे का घटना है।

राहुल कस्वां ने भी भाजपा छोड़ी
वसुंधरा राजे और उनके खेमे के नेताओं को राजस्थान में पूरी तरह से हाशिए पर लाया गया है। इसका दो उदाहरण चूरू सांसद राहुल कस्वां व जालौर सांसद देवजी पटेल भी हैं। दोनों ही वसुंधरा खेमे से हैं और दोनों का ही लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट कट गया। राहुल कस्वां तो भाजपा से कांग्रेस में चले गए। चूरू से कांग्रेस उम्मीदवार हैं।
शेखावत-जोशी के इलाके में बागी को मनाया
लोकसभा चुनाव 2024 में गजेंद्र सिंह शेखावात के इलाके जोधपुर में शेरगढ़ विधायक बाबूसिंह राठौड़ व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी के इलाके चित्तौड़गढ़ में निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या बगावती तेवर अपनाए, लेकिन राजस्थान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दोनों ही बागी नेताओं को मना लिया।

प्रह्लाद गुंजल को क्यों मना रहे सीएम शर्मा?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भजनलाल शर्मा कोटा के दौरे पर हैं और इसी दौरान प्रह्लाद गुंजल के भाजपा छोड़कर कांग्रेस में जाने की बात पर उन्हें मनाते नहीं दिखे। इसकी एक वजह यह भी कोटा-बूंदी वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ से लगता है और गुंजल लंबे समय से राजे खेमे में हैं।












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