आदिवासी समुदाय की विरासत सहेजने का अनूठा प्रयास, 3 राज्यों के 1000 गांवों में निकाली विरासत स्वराज यात्राएं
बांसवाड़ा, 5 जनवरी। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का सपना साकार करने का एक प्रयास इन दिनों राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में आदिवासी समुदाय की ओर से किया जा रहा है। लक्ष्य है विरासत सहेजना, चाहे मिट्टी-जल-वन हो या फिर परम्परागत बीज। इनके संरक्षण के साथ ही परम्परागत साधनों से स्वस्थ और पोषित समाज को लेकर कार्य किया जा रहा है।

12 पंचायत समितियों में निकाली यात्रा
यहां सबसे बड़ी समस्या पलायन की है। जबकि हर राह यहां परम्परागत और प्राकृतिक स्रोतों की भरमार है। कुपोषण बढ़ रहा है जबकि कंद मूल यहां का भोजन रहा है। बढ़ते कुपोषण के घेरे को तोड़ने के साथ ही आदिवासी समुदाय का पलायन रोकने की तैयारी हो रही है। विरासत स्वराज को लेकर राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की 12 पंचायत समितियों के 1000 गांवों में यात्रा निकाली गई और अब गांव-ढाणी जनजागरण बैठकें हो रही हैं। बच्चों को बाल श्रम से निकालकर उनके हाथ में पोथी थमाने पर भी जोर दिया रहा है।

यात्रा में प्रश्रोत्तरी पर फोकस रहता है
बांसवाड़ा के स्वयंसेवी संगठन वाग्धारा के सचिव जयेश जोशी की अगुवाई में इसकी लौ गांव-ढणियों तक पहुंचाई जा रही है। यात्रा में प्रश्रोत्तरी पर फोकस रहता है। ग्रामीणों से उन प्रश्रों को उत्तर जानने का प्रयास करते हैं, जिनकी उन्हें जरुरत है लेकिन कर नहीं रहे हैं। इस प्रश्नोत्तरी में ही उन्हें अहसास दिलाते हैं कि उनकी विरासत कितनी अनमोल है, जिसे वे व्यर्थ कर रहे हैं।

शहरों में बस रहे ग्रामीण, यह कैसा ग्राम स्वराज?
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में संस्था सचिव जयेश जोशी कहते हैं कि हम ग्राम-स्वराज के रास्ते गांधी हिंद स्वराज का सपना साकार होते देखना चाहते थे। लेकिन हमारे गांव इससे दूर होते जा रहे हैं। विकास के नाम पर शहरीकरण, मशीनीकरण दैत्याकार रूप में फैलते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ गांवों की रौनक शहरों की ओर कूच करती जा रही है।
गांवों से युवा-शक्ति का पलायन रोकना आज एक बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती को स्वीकार कर ग्रामीण अंचल विशेषकर आदिवासी समुदाय के साथ विरासत सहेजने की तरफ ध्यान दिया जा रहा है। आदिवासी समुदाय जल-जंगल और जमीन से बेहद प्यार करते हैं। ऐसे में इनकी पूरी भागीदारी मिल रही है।

यात्रा में विरासत पर प्रश्रों के साथ चर्चा, अब कार्य की तैयारी
1. जल स्वराज- हमारे जल के स्त्रोतों की क्या स्थिति है? वर्तमान में स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण की क्या व्यवस्था है? जल संरक्षण के क्या-क्या तरीके होते हैं? क्या हमारे गांव के किसान इन्हें अपनाते हैं? जल का हमारे जीवन में महत्व भी बताया जा रहा है।
2. मिट्टी स्वराज- जमीन और मिट्टी की क्या स्थिति है? क्या हमारी मिट्टी जीवंत है? क्या मिट्टी को जीवंत बनाना उपयोगी है? मिट्टी को जीवंत कैसे बनाया जा सकता है? इसके लिए गांव में क्या तरीके हो सकते हैं?

बीजों के बारे में भी दे रहे जानकारी
3. बीज स्वराज- हमारी खेती में परम्परागत एवं अपने बीजों का क्या महत्व है? एक स्वस्थ बीज कैसे प्राप्त किया जाता है? हमारे कितने किसान उन्नत बीज प्रयोग करते हैं? बीज को उपचारित कैसे करते हैं? कितने किसान इसे अपनाते हैं? क्या परंपरागत फसलों के बीजो को उन्नत बनाया जा सकता है?
4. वन स्वराज-
हमारे जीवन में वनों का क्या महत्व है? क्या आप इसको संरक्षित रखते है या नहीं? अगर संरक्षित करते हैं तो कैसे ? वन उपज के रूप में आपको क्या मिलता है? इस वन उपज को स्थानीय स्तर पर आप कैसे सहेज रहे हैं?

5. खाद्य एवं पोषण स्वराज
क्या आपने बावटा, कांग, कुरी, चीना व कोदो का नाम सुना है? यह क्या है? इनकी खेती कैसे की जाती है? क्या अब कोई इनकी खेती करता है? क्या आदिवासी संस्कृतियों का इन फसलों के साथ कोई लेना-देना है? क्या इनको खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है? अब इनकी खेती बड़े स्तर पर क्यों नहीं की जाती है?
आजकल बीमारियां अधिक होने का क्या कारण है? गाँव में कितने बच्चे कुपोषित है? कुपोषण दूर करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे है? खुद का उपजाया हुआ और बाजार से खरीदा हुआ भोजन में क्या अंतर होता हैं? गाँव में गर्भवती महिला और बच्चो का टीकाकरण कब होता हैं?

6. वैचारिक स्वराज
हमारे समुदाय में एक दूसरे के विचारों को कितना सम्मान दिया जाता है? क्या कभी कोई वैचारिक मतभेद भी होता है? अगर हाँ, तो क्या कारण है? गाँव विकास के मुद्दों में सामुदायिक भागीदारी का महत्व? वंचित वर्ग की भागीदारी होती है या नहीं? ग्राम-सभा की क्यों जरुरत है? आपकी नजर में ग्राम स्वराज से क्या आशय है? और इसको कैसे स्थापित किया जा सकता है?
7. पशुपालन संरक्षण-
आदिवासी परिवार का पशुपालन से क्या सम्बन्ध? हम कौन हैं? कौन से पशु पालते हैं? उनसे हमारे जीवन के जोखिमों का कोई सम्बन्ध है क्या? क्या पशुपालन से किसान का जोखिम कम होता है? क्या पशुपालन का खेती से कोइ सम्बन्ध है? क्या पशुपालन में सुधार की सम्भावना है? यदि हाँ तो कैसी-कैसी?
बच्चों के अधिकारों पर भी चर्चा
बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में समुदाय की भूमिका को भी चर्चा में शामिल किया गया और अब गांव स्तर तक यह बैठकों के रूप में जारी है। गाँव में 100 प्रतिशत बच्चे शिक्षा से जुड़े तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे प्राप्त कर सकते हैं, इसको कैसे सुनिश्चित करेंगे? अपने गाँव को बाल मित्र कैसे बनायेंगे जिससे सभी बच्चों को उनके सभी अधिकार मिले एवं इसमें समुदाय की भूमिका क्या होगी?
क्या हमारा गाँव बच्चों के लिये उपयुक्त जगह हैं? हमारे गाँव में कितनी कक्षा तक पढ़ाई होती हैं? कितने बच्चें दूसरी जगह पढऩे जाते है? क्या लड़कियां भी अन्य गाँव में पढऩे जाती हैं? हमारे बच्चो की शादी की उम्र क्या हैं? गाँव में ऐसा कोई बच्चा जो 18 वर्ष से कम हो और माता-पिता के साथ पलायन के लिए जाता हैं? हमारे गाँव में कितनी आंगनवाडी हैं और क्या गाँव के सभी 6 वर्ष आयु तक के बच्चे आंगनवाडी से जुड़े हैं?
इस तरह निकाली यात्रा
गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2021 से विरासत स्वराज संप्रभुता यात्रा शुरू की गई। शुभारम्भ वाग्धारा संस्थान के कूपड़ा स्थित जनजाति स्वराज केंद्र से किया गया, जिसमें पानी बाबा राजेन्द्र सिंह और सर्वोदय विचारक आशा बोथरा बतौर अतिथि मौजूद रही। समापन 14 अक्टूबर को राजस्थान के जलियांवाला बाग कहे जाने वाले बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम में हुआ।
यात्रा राजस्थान, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के 12 पंचायत समितियों के 1000 गांवों में गई। व्यक्तिगत के साथ ही सामुदायिक पहल पर जोर दिया गया ताकि समुदाय आधारित गतिविधियों का लाभ मिल सके। सीधे तौर पर इसमें करीब 20000 लोगों का जुड़ाव रहा। लोगों को समझाया गया कि स्वराज का अर्थ केवल राजनीतिक स्तर पर विदेशी शासन से स्वाधीनता प्राप्त करना नहीं था, बल्कि गांधी का स्वराज आत्म-सयंम, ग्राम-राज्य व सत्ता के विकेन्द्रीकरण पर बल देता है।












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