International Women Day: आज भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका सिंह गुर्जर के संघर्ष की कहानी
International Women's Day: आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। देशभर में आज उन सफल महिलाओं की चर्चाएं हो रही है जिन्होने संघर्ष कर मंजिले हासिल की ।
आज ऐसी ही एक दबंग महिला जिन्होने आरएएस की ट्रैनिंग कर सरकारी नौकरी करने के बजाय राजनीति में अपना भविष्य संवारने का ठाना ।

राजस्थान के मालपुरा में 21 फरवरी 1961 में जन्मी अलका सिंह गुर्जर। आज यह नाम पूरे देश की सियासत में अपनी एक अलग पहचान के बूते चर्चा में रहता है।
Recommended Video
अलका सिंह गुर्जर का एम.ए.,एलएलएम,और पीएचडी करने बाद जब आरएएस में चयन हुआ और ट्रैनिंग शुरू कर खत्म तो की लेकिन सरकारी सेवा में आने के बजाय उन्होने राजनीति में अपना भविष्य संवारा।
अलका सिंह गुर्जर की शादी राजस्थान सरकार में पूर्व पंचायतीराज मंत्री नाथू सिंह गुर्जर से हुई। नाथू सिंह गुर्जर अपने दौर में भाजपा के दिग्गज और फायरब्रांड नेताओं में माने जाते थे।
नाथू सिंह गुर्जर पंचायतीराज मंत्री भी रहे। इनके ही कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर सियासी मैदान में उतरी अलका सिंह गुर्जर को कब राजनीति ने अपना लिया वह खुद भी याद करती है तो कहती है कि एक संयोग ऐसा हुआ कि अब इसी राजनीति के होकर रह गए।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर वन इंडिया टीम ने खास बातचीत कर अलका सिंह गुर्जर से उनके संघर्ष और सफलता के सफर के अनुभवों को टटोलने की कोशिश की।
अलका सिंह गुर्जर ने बातचीत में बताया कि मेरी शिक्षा ही थी जिसने मुझे सबसे पहले राजनीति केे पहली सीढ़ी तक उस समय पहुंचाया जब जिला परिषद के चुनावों में पहली बार शिक्षा की बाध्यता हुई।
बस वहीं दौरा था जब टोंक जिले में जिला परिषद के चुनावों में पहली बार नामांकन दाखिल किया। और आज सफर को तय करते विधायक से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में टीम जेपी नड्डा में राष्ट्रीय सचिव के पद पर पहुंच गए।
इसके साथ ही दिल्ली के सह प्रभारी भी अलका सिंह गुर्जर को वर्तमान में बनाया गया। अलका सिंह गुर्जर दौसा जिले की बांदीकुई से विधायक रह चुकी है और राजस्थान भाजपा में पूर्व प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष भी रही है।
अलका सिंह ने बातचीत में यह भी स्वीकार किया कि जिस गुर्जर समाज से वो आती है उस समाज में कभी बाल विवाह जैसी कुप्रथा थी। कई महिलाएं उस कुप्रथा का शिकार हो गई। और उनके सपने भी वहीं दफन हो गए।
लेकिन खुद को खुशकिस्मत मानते हुए कहती है कि उनके पिता बीएसएफ में कार्यरत सरकारी नौकरी में थे और भाई भी सब शिक्षित थे, परिवार में सभी लोगों के शिक्षा के प्रति जागरूकता से उन्हे अपनी शिक्षा को लेकर ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा।
शिक्षा को लेकर फायदा उन्होने पूरा उठाया भी, स्कूली शिक्षा से लेकर कॉलेज और फिर सरकारी नौकरी की ट्रैनिंग तक के सफर में उनके परिवारजन हमेशा उनके सपोर्ट में खड़े रहे।
जब पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर के साथ विवाह बंधन में बंधे तो उनके साथ राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में शामिल होने से उन्हे वह लोकप्रियता भी मिली जो उनका सपना था।
गरीब और मध्यमवर्गीय महिलाओं, बालिकाओं के साथ तमाम महिला वर्ग को सफलता का मंत्र देते हुए अलका सिंह ने कहा कि आपकों हमेशा सपने देखना चाहिए,सपनों को देखना कभी छोड़ना नहीं चाहिए।
यही सपने है जो आपकों मंजिल तक लेकर जाते है। इन्ही सपनों को आप तब ही पूरा कर पाएंगे जब उनके लिए प्रयास करेंगे।
वहीं आगामी लोकसभा चुनावों में खुद की दावेदारी को लेकर भी अलका सिंह गुर्जर ने बेबाकी से कहा कि भाजपा किसी परिवारवाद की पार्टी नहीं है,यह कार्यकर्ता आधारित पार्टी है और यहां हर कार्यकर्ता का पूरा सम्मान किया जाता है।
अगर संगठन और राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ प्रधानमंत्री मुझे कोई जिम्मेदारी देंगे तो मैं उसे पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी।
आपकों बता दे कि अलका सिंह गुर्जर का लोकसभा चुनावों में टोंक-सवाईमाधोपुर के साथ पूर्वी राजस्थान के टिकट को लेकर नाम चर्चा में चल रहा है।












Click it and Unblock the Notifications