International Women's Day: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज आईएएस डॉक्टर सौम्या के संघर्ष की कहानी
International Women's Day 2024: आज देशभर में महिला दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों ने महिलाओं ने आज विशेष सौगातों का पिटारा भी खोला है।
आज हम आपकों ऐसी महिलाओं से रूबरू करवाएंगे जिन्होने अपने संघर्ष के बूते अपना एक अलग मुकाम हासिल किया। जो अलग अलग क्षेत्रों में रहकर आज देश और प्रदेशों के लिए एक मिसाल बनी हुई है।

आज हम आपकों बताएं गे डॉक्टर से IAS ऑफिसर बनी सौम्या झा की, पहले ही प्रयास में बिहार की सौम्या ने यह सफर पूरा किया।
सौम्या झा ने साल 2016 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सीएसई परीक्षा में 58वीं रैंक के साथ टॉप किया था। यह उनका पहला अटेम्प्ट था, जानते हैं सौम्या से परीक्षा की तैयारी के टिप्स।
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बिहार की सौम्या झा ने वन इंडिया के माध्यम से देश,प्रदेश की सभी महिलाओं को महिला दिवस की बधाई दी। खास बातचीत में बताया कि वह पढ़ाई में हमेशा से बहुत अच्छी थीं, पिता आईपीएस थे तो पढ़ाई लिखाई में ज्यादा परेशानियों से जूझना नहीं पड़ा।
बिहार के दरबंगा में पैदा हुई सौम्या झा ने बताया कि पिता आईपीएस थे तो बचपन दरबंगा में ही गुजरा, स्कूली शिक्षा मध्यप्रदेश में हुई। सौम्या झा ने बताया कि स्कूली शिक्षा के दौरान 12 स्कूल बदलने पड़े। हर साल ही स्कूल बदलना पड़ता था।
अपनी जिंदगी के अनुभव शेयर करते समय सौम्या ने बताया कि पिता आईपीएस थे तो सर्विस के साथ मेरा शुरू से इंट्रेक्शन था। उनकी ट्रांसपेरेबल नौकरी थी तो कभी एक जगह नहीं टिकते थे।
मेरी जिंदगी में वैसे आम लड़कियों, महिलाओं जैसी समस्याएं नहीं थी। इसमें कोई क्यूशन नहीं है कि जो समस्याएं आम महिलाओं,लड़कियों आती है वो मुझे बिल्कुल नही आई।
मां-पिता ने मुझे पढ़ाई करवाने में हर मुश्किलों में मार्गदर्शन किया। मुझे हमेशा उनका सपोर्ट मिला। मै काफी खुश किस्मत थी कि उस सपोर्ट की वजह से जो भी एक्जाम थे बिना किसी टेंशन के दे पाई।
यही वजह है कि जो भी एक्जाम थे उनकों देकर आज इस ओहदें पर हूं। महिला होने के नाते कुछ मुश्किलें जरूर थी लेकिन जिस तरह से हमारा देश बदल रहा है यह में बिल्कुल क्लियरली कह सकती हूं कि जो मुश्किलें मेरी दादी को थी वो मेरी मां को नहीं थी जो मेरी मां को थी वो मुझे बिल्कुल नहीं आई है।
देश आगे बढ़ रहा है,सोच बदल रही है, जहां नहीं बदल रही है वहां महिलाएं इतनी समझदार है कि वो तानों और बातों को छोड़कर अपने काम से काम कर रही है।
बिहार के आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों पर बात करते हुए डॉक्टर सौम्या झा ने बताया कि बिल्कुल बिहार में एक तरफ देखा जाता है कि प्राइवेट सेक्टर ज्यादा नहीं है,इंडस्ट्री नहीं है नौकरियां नहीं है।
इसलिए वहां के बच्चों पर पढ़ाई का बचपन से प्रेशर रहता है। उनको पहले से यह आभास होता कि अगर वो सरकारी नौकरी में नहीं आएंगे तो उनका भविष्य खराब हो जाएगा। तो यह अनुभव होने की वजह से बिहार के बच्चे बचपन से काफी मेहनती भी होते है और यह भी स्वभाविका है कि उनके ऊपर प्रेशर ज्यादा रहता है।
कितनी ही बार बच्चे मेहनत करते है,कोशिश करते है लेकिन लक भी एक बड़ा फैक्टर होता है जिस वजह से बच्चे एक्जाम सक्सेजफूल या अनसक्सेजफूल हो पाते है।
जिस तरह का प्रेशर बिहार के बच्चों में होता है उसी तरह के प्रेशर जब कोटा में बच्चे पढ़ने जाते है तो उनकों भी झेलना पड़ता है। मै सोचती हूं कि बिहार से होने के एक बड़ा फायदा यह है कि वो यह प्रेशर झेल पाते है लक का फेक्टर भी ठीक से समझ गए थे।
पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली तो दूसरे प्रयास की तैयारियों में जुट कर फिर उसकी सफलताओं में लग जाते है। साथ ही इसका एनालाइसिस करते है कि आखिर विफलता की वजह क्या रही ।
सौम्या झा ने विद्यार्थियों को बड़ी नसीहत देते हुए कहा कि किसी भी विफलता के बाद हमेशा प्लान बी तैयार रखना चाहिए।
पिता के साथ बिताए एक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जब कही झगड़े या तनाव होते थे तो मेरे पिता पुलिस अधीक्षक थे और कलेक्टर के साथ कही दौरा करते थे तब हमें भी पता चलता था कि एसपी-कलेक्टर गए और वार्ता कर सुलह करवादी। भाईचारा करवा दिया।
तो बस यही चार्म था कि कैसे लोगों को तुरंत राहत दी गई। और यहीं मुझे डॉक्टर से लेकर आईएएस तक ले आया।
इसी का परिणाम था कि अपने पहले ही प्रयास में सौम्या ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा में 58वीं रैंक के साथ टॉप किया और उन्हें आईएएस पद नवाजा गया।
इस क्षेत्र में आने के पहले सौम्या ने डॉक्टरी की पढ़ाई की है और वे एमबीबीएस कर चुकी हैं. हालांकि मेडिकल साइंस से ग्रेजुएशन करने के बाद सौम्या ने इसी विषय से पीजी करने के बजाय सिविल सर्विसेस देने की सोची और तैयारी शुरू कर दी।
इरादे की पक्की सौम्या ने पहले ही प्रयास में सफलता पाकर यह साबित कर दिया कि उनका फैसला सही था। दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सौम्या ने परीक्षा की तैयारी के विभिन्न विषयों पर बात की. जानते हैं विस्तार से
मेडिकल स्टूडेंट रही हैं सौम्या
सौम्या मुख्यतः बिहार की हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई यहीं हुई है. सौम्या के परिवार की बात करें तो उनकी मां भी डॉक्टर हैं और रेलवे में कार्यरत हैं जबकि उनके पिता अपने समय के आईपीएस ऑफिसर हैं।
सिविल सेवा के क्षेत्र में आने का विचार सौम्या को अपने पिता के कारण ही आया. हालांकि, यह फैसला वे थोड़ा देर से ले पाईं और उसके पहले वे एमबीबीएस कर चुकी थीं।
सौम्या ने अपने पहले ही अटेम्प्ट में पूरी ताकत झोंकने की योजना बनाई थी और बहुत हद तक वे इसमें सफल भी रहीं, पहली ही बार में सौम्या ने न केवल सफलता हासिल की बल्कि वे टॉपर भी बनीं।
सौम्या की सबसे जरूरी एडवाइज
सौम्या तैयारी के विषय में कोई भी सलाह देने से पहले एक जरूरी बात कहती हैं कि कभी भी किसी दूसरे को देखकर या उसकी स्ट्रेटजी जानकर अपने लिए योजना न बनाएं।
वे बहुत साफ शब्दों में कहती हैं कि दूसरों के अनुसार आगे बढ़ेंगे तो कहीं नहीं पहुंचेंगे उल्टा डिप्रेशन में आ जाएंगे. सौम्या कहती हैं कि उनके साथ यही होता था।
वे जब टॉपर्स के इंटरव्यू वगैरह देखकर अपने लिए प्लान बनाती थी तो कभी उसे फॉलो नहीं कर पाती थी. नतीजा यह होता था कि वे निराश महसूस करने लगती थी कि योजना के अनुसार चीजें आगे नहीं बढ़ रही।
इसी बात से शिक्षा लेकर सौम्या दूसरे कैंडिडेट्स को यही सलाह देती हैं कि ज्ञान सबसे लें लेकिन उसे कितना और कहां इम्प्लीमेंट करना है यह आपका अपना निर्णय होना चाहिए।
अपने लिए खुद प्लानिंग करें और खुद तय करें कि आपको कैसे और कब पढ़ना है, जो दूसरों के लिए काम किया वह आपके लिए कभी काम नहीं करेगा।












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