7 पीढ़ी व 34 पड़ पोते देखकर 105 साल की उम्र में रूपा देवी की मौत, शवयात्रा में क्यों बजे लता दीदी के गाने?
अलवर, 9 फरवरी। राजस्थान अलवर जिले के मालाखेड़ा इलाके के पृथ्वीपुरा गांव में एक बुजुर्ग महिला रूपा देवी को अनूठी अंतिम विदाई दी गई। इनकी शवयात्रा में मातमी धुन की बजाय बॉलीवुड के गाने गाए गए। वो भी खासकर लता मंगेशकर के।

गाजे बाजे से विदा हुईं रूपा देवी
रूपा देवी की अंतिम विदाई राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह ये है कि रूपा ने सात पीढ़ियां देखकर और शतायु उम्र पाकर दुनिया छोड़ी है। ऐसे में उनके परिवार ने रूपा को गाजे-बाजे से अनूठ अंदाज में विदा किया गया।

शवयात्रा में महिलाएं भी शामिल हुईं
मंगलवार को रूपा देवी की शवयात्रा की खास बात यह भी थी कि उसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। गांव पृथ्वीपुरा में यह पहला मौका था जब किसी की शवयात्रा में महिलाएं भी गईं।

रूपा देवी लता मंगेशकर की जबरदस्त फैन थीं
बता दें कि 105 साल की रूपा देवी लता मंगेशकर की जबरदस्त फैन थीं। वे ज्यादातर उनके ही गाने सुनती थी। हाल ही लता दीदी की मौत की खबर सुन वे परेशान होने लगी थीं। ऐसे में परिवार में उनको लता दीदी के 'ऐ मेरे वतन के लोगों और हम छोड़ चले हैं महफिल' जैसे गाने के साथ विदा किया।

रूपा देवी के 34 पड़पोते
रूपा देवी का परिवार काफी बड़ा है। वे सात पीढ़ियां देख चुकी थीं। रूपा देवी के 4 बेटे हैं। 17 पोते, 34 पड़ पोते, 6 सड़ पोते हैं। महिलाएं अलग है। 3 बेटियों का परिवार भी अलग है।

परिवार के सदस्यों की संख्या 150
पूरे परिवार के सदस्यों की संख्या 150 के आसपास है। परिवार में 18 साल से अधिक उम्र के वोटर की संख्या में 82 हैं। बड़े बेटे रामजीलाल की उम्र 80 साल है। तीन बेटे भी 70 साल से अधिक उम्र के हैं।

परिवार के 11 सदस्य पुलिस में
रूपा देवी के परिवार की खासियत यह भी है कि गांव में सरकारी नौकरी में सबसे अधिक रूपा देवी के पोते-पड़ पोते हैं। कुल 15 लोग सरकारी नौकरी में है, जिनमें से 11 पुलिस में है। चार अन्य सरकारी सेवा में है।












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