Satpal Singh : झुंझुनूं में शहीद सतपाल सिंह को आखिरी सैल्यूट करने उमड़े लोग, हमले के 10 दिन बाद शहादत
झुंझुनूं, 23 अगस्त। जम्मू कश्मीर के दारहाल इलाके में 11 अगस्त को भारतीय सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले में झुंझुनूं जिले के हवलदार सतपाल सिंह भी वीरगति को प्राप्त हो गए। अस्पताल में उपचार के दौरान दस दिन बाद ये शहीद हुए हैं। मंगलवार को इनके गांव जैतपुरा में अंतिम संस्कार किया गया। शहीद सतपाल के बेटे शांतनु ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। 11 राज राइफल्स के रिटायर्ड जवानों के साथ लोगों ने नारे लगाकर नम आंखों से विदाई दी।

आतंकियों के हमले में करीब 3 घंटे तक आमने-सामने से गोलीबारी होती रही। मौके पर ही 4 जवान शहीद हो गए थे। सतपाल समेत कई जवान घायल हो गए। घायलों को तत्काल आर्मी हॉस्पिटल भेजा गया। करीब 10 दिन इलाज के बाद वो 21 अगस्त को शहीद हो गए।
मुठभेड़ में सतपाल आतंकियों के काफी करीब चले गए थे। इसी दौरान एक गोली उनके सिर में और दूसरी कमर में आ धंसीं। घायल होने के बाद भी वे लड़ते रहे। अपनी बहादुरी से सतपाल और अन्य सैनिकों ने दोनों आतंकियों को अंदर घुसने नहीं दिया। कुछ देर बाद दोनों आतंकियों ने जवानों को ढेर कर दिया।

शहीद की पत्नी विंतोष देवी गृहिणी हैं। भारतीय सेना के जवानों ने शहीद के बड़े भाई नायब सुबेदार राजेश कुमार, बेटे शांतनु, भतीजे नीरव को तिरंगा सौंपा। शहीद की 15 साल की बेटी प्रीत 11वीं और बेटा शांतनु (12) नौवीं क्लास में पढ़ रहा है। दोनों बच्चे पिलानी में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। शहीद की माता का नाम बादामी देवी है। वीरांगना विंतोष देवी ने हाथ जोड़कर शहीद पति के अंतिम दर्शन किए। इस दौरान वह बेसुध हो गईं।
बता दें कि शहीद सतपाल सिंह की अंतिम यात्रा पैतृक गांव जैतपुरा से 4 किलोमीटर पहले कुहाडवास गांव से शुरू हो गई थी। उन्हें अंतिम नमन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आए। बुहाना से मंगलवार सुबह 9 बजे तिरंगा यात्रा के साथ शहीद की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव जैतपुरा पहुंची। इससे पहले पार्थिव देह जम्मू कश्मीर से दिल्ली लाई गई थी।












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