सौरभ कटारा: शादी के 16 दिन बाद शहीद, बर्थडे के अगले दिन अंत्येष्टि, पत्नी ने कंधा देकर किया था विदा

भरतपुर। ए मेरे वतन के लोगों, जरा याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर ना आए...। ऐसे ही वीर सपूत थे सौरभ कटारा। आज से ठीक एक साल पहले यानी 8 दिसम्बर 2019 को सौरभ कटारा के सिर पर सेहरा सजा था। घर-घर का कोना-कोना खुशियों से सराबोर था, क्योंकि फौजी बेटा दूल्हा जो बना था। शादी के बाद सौरभ कटारा सप्ताहभर घर रहे और फिर 15 दिसम्बर को ड्यूटी लौट गया। फिर महज 8 बाद ही यह बेटा तिरंगे में लिपटा घर तो पूरा गांव रो पड़ा। नवविवाहिता के मेहंदी रचे हाथ आंसुओं से धुल गए। आज शहीद सौरभ कटारा की शादी की पहली वर्षगांठ है।

कौन थे शहीद सौरभ कटारा

कौन थे शहीद सौरभ कटारा

बता दें कि शहीद सौरभ कटारा मूलरूप से राजस्थान के भरतपुर जिले की रूपवास तहसील के गांव बरौली ब्राह्मण के रहने वाले थे। यहां नरेश कटारा के घर 23 साल पहले 25 दिसम्बर को सौरभ कटारा का जन्म हुआ था। बचपन से ही सौरभ की रगो में देशभक्ति का खून दौड़ रहा था। पिता नरेश कटारा भी फौज में थे। भारत पाकिस्तान के बीच 1999 में हुई जंग में हिस्सा लिया था और वर्ष 2002 में रिटायर हो गए थे।

आखिरी बार खुद की शादी में लेकर आए थे छुट्टी

आखिरी बार खुद की शादी में लेकर आए थे छुट्टी

दिसम्बर 2019 में सौरभ कटारा फौज से आखिरी बार छुट्टी लेकर आए थे। नवंबर 2019 में सौरभ की बहन दिव्या की शादी थी। फिर 8 दिसम्बर 2019 को खुद सौरभ की शादी पूनमदेवी के साथ हुई थी। सौरभ का छोटा भाई अनूप कटारा एमबीबीएस कर रहा है जबकि बड़ा भाई गौरव कटारा खेती करता है।

राजस्थान के सौरभ कटारा की वीरगाथा

राजस्थान के सौरभ कटारा की वीरगाथा

भरतपुर जिले के रूपवास थाना इलाके के गाँव बरौली ब्राह्मण निवासी 22 वर्षीय सौरभ कटारा तीन साल पहले भारतीय सेना में चालक पद पर भर्ती हुए थे। शहादत के समय भारतीय सेना की 28 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। उनकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में थी। बीते 23 व 24 दिसम्बर 2019 की रात को आतंकियों की ओर से किए गए बम ब्लास्ट में सौरभ शहीद हो गए थे।

25 दिसम्बर को था सौरभ का जन्मदिन

25 दिसम्बर को था सौरभ का जन्मदिन

25 दिसम्बर 2019 को जब पूरा परिवार फौजी बेटे सौरभ कटारा का 22वां जन्मदिन मनाने की तैयारियों में जुटा था। उसी दौरान सौरभ के शहीद होने की सूचना मिली। जन्मदिन से ठीक ​एक दिन पहले बेटे के शहीद होने की सूचना पर परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी पूनमदेवी भी सौरभ के ड्यूटी पर लौटने के कारण पीहर आ गई थी। 25 दिसम्बर को वह पति का जन्मदिन मनाने ही ससुराल आई थी।

पत्नी ने कंधा देकर किया था आखिरी सैल्यूट

पत्नी ने कंधा देकर किया था आखिरी सैल्यूट

जन्मदिन के अगले दिन 26 दिसम्बर को सौरभ कटारा का अंतिम संस्कार हुआ था। शहीद बेटे को अंतिम विदाई देने पूरा भरतपुर उमड़ा था। वीरांगना पूनमदेवी ने शहीद पति की अर्थी को कंधा दिया था और उन्हें आखिरी सैल्यूट भी किया था। यह देखकर वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति आंसू नहीं रोक पाया था।

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