Saroj Kumari IPS : मसीहा बनीं राजस्थान की अफसर बेटी, गुजरात में रोजाना 600 लोगों को करवाया भोजन

नई दिल्ली। लॉकडाउन में जरूरतमंदों के लिए फिल्म अभिनेता सोनू सूद समेत कई लोगों ने 'रियल लाइफ हीरो की भूमिका निभाई। ऐसे ही लोगों में राजस्थान की अफसर बेटी सरोज कुमारी भी शामिल हैं। सरोज कुमारी गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं।

आईपीएस सरोज कुमारी साक्षात्कार

आईपीएस सरोज कुमारी साक्षात्कार

सरोज कुमारी की 'पुलिस रसोई' पूरे गुजरात और राजस्थान में सुर्खियों में रही है। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में आईपीएस सरोज कुमारी ने बताया कि किस तरह से उन्होंने पुलिस रसोई की शुरुआत की। कैसे लोग जुड़ते गए और लॉकडाउन में जरूरतमंद लोगों का पेट भरने में उनकी 'पुलिस रसोई' कितनी मददगार साबित हुई।

गुजरात के वडोदरा डीसीपी में हैं सरोज कुमारी

गुजरात के वडोदरा डीसीपी में हैं सरोज कुमारी

गुजरात के वडोदरा में डीसीपी (एडमिन हेडक्वार्टर) सरोज कुमारी ने बताया कि 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन में हमें महसूस हुआ कि वडोदरा में कच्ची बस्ती, सड़क किनारे और ओवर ब्रिज के नीचे रहने वाले कई लोगों के सामने पेट भरने की समस्या आ गई थी। कोई भी व्यक्ति भूख से नहीं मरे इसके लिए 'पुलिस रसोई' शुरू करने का फैसला लिया। सरोज कुमारी ने वुमन सेल की सात महिला कांस्टेबल, एसआई आदि के साथ चर्चा की।

पहले ड्यूटी फिर समाजसेवा

पहले ड्यूटी फिर समाजसेवा

सरोज कुमारी समेत आठों महिला पुलिसकर्मियों ने अप्रेल में पुलिस की मेस में खाना बनाना शुरू किया। पुलिस अधिकारियों व थानाधिकारियों ने आटा, चावल, तेल, मसाला उपलब्ध करवाया। फिर इन ​महिलाओं ने अपने हाथों से खाना पकाकर भोजन के पैकेट तैयार किए, जो पुलिस की गश्त करने वाली टीमों को सौंपे गए। गश्त टीम ने वड़ोदरा शहर में घूमकर घूमकर रोजाना 600-700 जरूरतमंद लोगों तक भोजन उपलब्ध करवाया।

पुलिस की पहल पर आमजन भी जुड़े

पुलिस की पहल पर आमजन भी जुड़े

आईपीएस सरोज कुमारी ने बताया कि पुलिस रसोई का पूरा भोजन खुद महिला पुलिसकर्मी ही तैयार करती थी। कभी पूड़ी सब्जी, रोटी, कड़ी, दाल, चावल आदि बनाते थे। पुलिस अधिकारियों के बाद आमजन भी पुलिस की इस पहल से जुड़ गए। हर किसी ने राशन सामग्री उपलब्ध करवाई, जिससे भोजन के पैकेट तैयार किए गए।

 भोजन की उम्मीद में इंतजार करते मिलते थे लोग

भोजन की उम्मीद में इंतजार करते मिलते थे लोग

वुमन सेल के हेल्प लाइन नंबर समेत पुलिस कंट्रोल रूम में भी लोग फोन करके भोजन की जरूरत के बारे में सूचना देते थे, जिन्हें भोजन उपलब्ध करवाते थे। इसके लिए 12 जगह चिहिन्त कर रखी थी। इन जगहों पर पुलिस की गाड़ी पहुंचने पर लोग हाथों में बर्तन लिए भोजन का इंतजार करते मिलते थे। पुलिस की यह रसोई अप्रेल से लेकर 11 जून 2020 तक चली है। अब अनलॉक-1 की शुरुआत होने पर लोग अपने स्तर पर ही भोजन की व्यवस्था करने में सक्षम हो गए हैं।

 आईपीएस सरोज कुमारी का जीवन परिचय

आईपीएस सरोज कुमारी का जीवन परिचय

बता दें कि सरोज कुमारी मूलरूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के चिड़ावा उपखंड के गांव बुडानिया की रहने वाली हैं। सरकारी स्कूल में पढ़कर सरोज कुमारी ने ​यूपीएससी परीक्षा उत्तीण की और वर्ष 2011 में गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी बनीं। वडोदरा डीएसपी से पहले ये गुजरात के बोटाद की एसपी रह चुकी हैं। वहां फिरौली, वसूली करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई और महिलाओं का देह व्यापार के दलदल से निकालने के चलते इनकी छवि लेडी सिंघम की बन गई थी।

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