Balen Shah: अब निकली बालेन शाह की हेकड़ी! भारतीय समान पर लगाया था टैक्स, अब इस चीज के लिए फैलाए हाथ
Balen Shah Fertilizer Decision: नेपाल की बालेन शाह सरकार, जो पिछले कुछ समय से भारत से आने वाले सामानों पर सख्ती दिखा रही थी, अब खाद की किल्लत के आगे झुकती नजर आ रही है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से नेपाल में खाद की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं।
ऐसे संकट के समय में नेपाल को एक बार फिर अपने पुराने साथी भारत की याद आई है। काठमांडू सरकार ने अब भारतीय कंपनियों से 80 हजार टन रासायनिक उर्वरक (Fertilizer) खरीदने का बड़ा फैसला लिया है, ताकि देश के किसानों को राहत मिल सके।

संकट में आया काम पुराना दोस्त
नेपाल इस समय खाद की भारी कमी से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और सप्लाई की दिक्कतों के कारण बालेन सरकार ने तय किया है कि वे भारत से मदद लेंगे। इस फैसले के तहत नेपाल करीब 80 हजार टन खाद खरीदेगा, जिसमें यूरिया और डीएपी (DAP) शामिल है। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही खरीद की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। यह कदम दिखाता है कि लाख कड़वाहट के बावजूद जरूरत के समय भारत ही सबसे भरोसेमंद विकल्प है।
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भारत के साथ पुराने समझौते का सहारा
नेपाल और भारत के बीच साल 2022 में खाद की सप्लाई को लेकर एक खास समझौता (G2G) हुआ था। हालांकि, यह समझौता मार्च 2026 में खत्म हो गया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए नेपाली अधिकारी इसे फिर से शुरू करने की कोशिशों में जुट गए हैं। नेपाल पहले भारत से 1.5 लाख टन खाद खरीदना चाहता था, लेकिन फिलहाल 80 हजार टन पर सहमति बनी है। यह समझौता नेपाल के कृषि क्षेत्र के लिए लाइफलाइन साबित हो सकता है क्योंकि वहां की खेती पूरी तरह खाद पर निर्भर है।
भारतीय सामान पर सख्ती पड़ी भारी
कुछ समय पहले तक बालेन सरकार का रुख भारत के प्रति काफी कड़ा था। अप्रैल में नेपाल ने भारत से लाए जाने वाले 100 रुपये से ज्यादा के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगा दी थी। बॉर्डर पर कड़ी जांच शुरू कर दी गई थी, जिससे आम जनता को किराने का सामान, कपड़े और दवाइयां लाने में भारी परेशानी हो रही थी। लेकिन अब खाद के संकट ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भारत से रिश्ते बिगाड़ना नेपाल की जनता और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
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जनता और विपक्ष में बढ़ता आक्रोश
सरकार के इस दोहरे रवैये पर नेपाल के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है। जनमत पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने सरकार के पहले के फैसलों को तराई क्षेत्र के लोगों पर हमला बताया था। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार छोटी-मोटी खरीदारी करने वालों पर सख्ती कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बड़े संकट आने पर भारत की ओर हाथ फैला रही है। सीमावर्ती इलाकों के लोग, जो रोजमर्रा की चीजों के लिए भारत पर निर्भर हैं, इस नई खाद डील को सरकार की मजबूरी और 'हेकड़ी' का अंत मान रहे हैं।












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