Rajasthan Teacher Video: स्कूल में इश्क लड़ाने वाले टीचर्स की गई नौकरी, DEO को मेल पर किसने भेजा वीडियो?
Rajasthan Teacher Video: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के गांव सालेरा में एक सरकारी स्कूल के संस्था प्रधान और एक शिक्षका का आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद शिक्षकों के बीच नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की।
राजस्थान शिक्षामंत्री मदन लाल दिलावार ने बताया कि चित्तौड़गढ़ के गांव सालेरा के सरकारी स्कूल में प्रेम प्रसंग चल रहा था, उसमें लिप्त पाए दोनों शिक्षक-शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया है। दोनों का वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित किया गया था और फिर न्यायिक प्रक्रिया अपनाकर उन्हें नौकरी से हटाया गया है। इसमें अरविंद नाथ व्यास, जो लेवल टू के टीचर थे। इनके साथ ही कांता पड़िया को भी बर्खास्त किया गया है।
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उधर, डीईओ की जांच में पता चला कि दोनों व्यक्ति स्कूल परिसर में अनुचित गतिविधियों में लिप्त थे। परिणामस्वरूप, उन्हें राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1958 के नियम 19 (2) के तहत बर्खास्त कर दिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की अखंडता को बनाए रखना है।
DEO राजेंद्र शर्मा को ईमेल के ज़रिए यह आपत्तिजनक वीडियो मिला
जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा को ईमेल के ज़रिए यह आपत्तिजनक वीडियो मिला। इसे हेडमास्टर के दफ़्तर के अंदर छत के पास रखे एक छिपे हुए कैमरे से रिकॉर्ड किया गया था। इस कैमरे को लगाने वाले व्यक्ति की पहचान अभी तक अज्ञात है। इस खुलासे ने शैक्षणिक संस्थानों में गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
सोमवार को शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक के नेतृत्व में एक जांच समिति ने स्कूल का दौरा किया। उन्होंने स्थिति का आकलन किया और घटना के बारे में जानकारी जुटाई। समिति के निष्कर्षों के आधार पर दोनों शिक्षकों को उनके पदों से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। इस घटना ने स्कूल की छवि और स्थानीय शिक्षा विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल में नौ शिक्षक हैं, जिनमें से सात महिलाएँ हैं। इस कांड ने गंगरार और उसके बाहर उनकी सामूहिक प्रतिष्ठा पर दाग लगा दिया है।
राजस्थान स्कूल संस्था प्रधान व लेडी टीचर का वीडियो वायरल
पुलिस ने सोमवार को स्कूल में जांच भी की। उनकी संलिप्तता शिक्षकों के बीच नैतिक आचरण बनाए रखने की गंभीरता को रेखांकित करती है। सरकार की निर्णायक कार्रवाई शिक्षा में नैतिक मानकों को बनाए रखने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बर्खास्तगी आदेश में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि ऐसी घटनाओं से न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है, बल्कि व्यापक शैक्षणिक निकायों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचता है। शैक्षणिक संस्थानों में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए शिक्षकों के बीच नैतिक आचरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
यह मामला स्कूलों में नैतिक व्यवहार के महत्व की याद दिलाता है। यह इस बात पर जोर देता है कि कैसे प्रौद्योगिकी कदाचार को उजागर कर सकती है और शैक्षिक सेटिंग में गोपनीयता मानदंडों को चुनौती दे सकती है।
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