Rajasthan News: जाटों के बाद अब ब्राह्मणों ने भरी हुंकार, 19 मार्च को जयपुर में होगी महापंचायत
Rajasthan News: राजस्थान के जयपुर में 19 मार्च को ब्राह्मण महापंचायत होने जा रही है। इस महापंचायत में ब्राह्मण समाज के विधायक, सांसदों के साथ कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे।

Rajasthan News: राजस्थान में साल 2023 के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावों के मद्देनजर राजस्थान में जातिगत समीकरण साधने की कवायद तेज हो गई है। हाला ही में राजस्थान के अंदर जाट महाकुंभ हुआ था। तो वहीं, अब जयपुर में 19 मार्च को ब्राह्मण महापंचायत होने जा रही है। ब्राह्मण महापंचायत को लेकर पिछले महीने भर से तैयारियां चल रही हैं और प्रदेशभर में कार्यकर्ता घर-घर संपर्क कर लोगों को महापंचायत में आने का निमंत्रण दे रहे हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान में जाट और ब्राह्मण महापंचायत आयोजित होने के अलग-अलग सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। तो वहीं, ब्राह्मण महापंचायत कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 40 से ज्यादा संगठन एक मंच पर आएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, इस महापंचायत में शामिल होने के लिए लाखों की संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग जयपुर पहुंचेंगे। इसके लिए पूरे प्रदेश में 5 हजार कार्यकर्ताओं की एक फौज को लगाया गया है। ब्राह्मण महापंचायत के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रघु शर्मा ने सभी को आमंत्रित करते हुए ट्वीट किया है।
उन्होंने कहा कि शनिवार 19 मार्च को सुबह 10 बजे विद्याधर नगर स्टेडियम में ब्राह्मण एक्ता के सम्मान में सभी बंधु आमंत्रिक है। वहीं, इस बीच जोधपुर के कांग्रेस नेता कन्हैया लाल ने ब्राह्मण समाज के लिए राजनीति में ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग उठाते हुए राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री ब्राह्मण बनाए जाने की मांग की। आपको बता दें कि इस साल के आखिर में राजस्थान में चुनाव हो सकते है, जिन्हें देखते हुए हाल में ही जाट महाकुंभ का आयोजन किया गया था। वहीं, अब ब्राह्मण समाज अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रहा है।
ब्राह्मण महापंचायत में लाखों लोगों के जुटने का दावा किया जा रहा है। चर्चा है कि इस आयोजन के जरिए विधानसभा में ब्राह्मणों के ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग की जाएगी। वहीं, समाज के कुछ लोगों ने सीएम की कुर्सी पर भी ब्राह्मण चेहरा होने की मांग की है। उन्होने बताया कि 40 साल पहले तक राजस्थान विधानसभा में 60 से 70 ब्राह्मण विधायक पहुंचते थे। जो अब घटकर 18 ही रह गए हैं। यही नहीं राजनीतिक दल भी चुनाव में ब्राह्मण नेताओं को कम टिकट देते हैं। लेकिन महापंचायत के जरिए शक्ति प्रदर्शन कर चुनाव में ब्राह्णों के ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग की जाएगी।












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