'अगर उसे मजबूर करेंगे तो वह पूरी जिंदगी इस दर्द को झेलेगी, राजस्थान हाई कोर्ट ने किसे लेकर कही यह बात?

राजस्थान हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय रेप पीड़िता के गर्भपात की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि अगर गर्भपात की इजाजत नहीं दी गई तो इससे पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होगा।

जस्टिस सुदेश बंसल ने 10 मार्च को यह आदेश दिया, जो 8 मार्च की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर था। मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि 27 सप्ताह से अधिक के गर्भ को "हाई रिस्क कंसेंट" के तहत समाप्त किया जा सकता है।

पीड़िता के माता-पिता ने दी सहमति

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता एक नाबालिग लड़की है और रेप की शिकार है। उसके माता-पिता ने अपनी बेटी के गर्भपात के लिए सहमति दे दी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अनचाहे गर्भ को समाप्त करने की इजाजत नहीं दी गई तो पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होगा। कोर्ट ने कहा, "अगर पीड़िता को बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर किया गया तो वह पूरी जिंदगी इस दर्द को झेलेगी, जिसमें बच्चे की देखभाल और अन्य मुद्दे शामिल हैं।"

1971 और 2021 के कानून से आगे का फैसला

कोर्ट ने कहा कि 1971 के कानून और 2021 के संशोधित कानून के प्रावधानों से आगे बढ़कर भी, व्यक्तिगत मामले की परिस्थितियों को देखते हुए, रेप पीड़िता के गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने जयपुर के सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय के अधीक्षक को पीड़िता के गर्भपात की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर भ्रूण जीवित पाया जाता है तो अस्पताल को उसे बचाने के लिए सभी जरूरी चिकित्सा सहायता, जिसमें इनक्यूबेशन सुविधा भी शामिल है, प्रदान करनी होगी।

भ्रूण के टिशू से डीएनए टेस्ट की तैयारी

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भ्रूण जीवित नहीं पाया जाता है तो डीएनए टेस्ट रिपोर्ट के लिए भ्रूण के टिशू को सुरक्षित रखा जाए। पीड़िता की ओर से पेश वकील सोनिया शांडिल्य ने बताया कि रेप का मामला 3 मार्च को दर्ज किया गया था।

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