राजस्थान: इंदिरा गांधी को लेकर भाजपा सरकार ने उठाया बड़ा कदम, कांग्रेस भड़की

राजस्थान में भाजपा सरकार ने स्कूल के सिलेबेस में 1975 की इमरजेंसी को पढ़ाने का फैसला लिया है। इस पर कांग्रेस भड़क गई है।

जयपुर। एक तरफ कांग्रेस 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जन्मशती मनाने की व्यापक तैयारियों मे जुटी है वहीं राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इसको काउंटर करने के लिए स्कूल के सिलेबेस में 1975 की इमरजेंसी को पढ़ाने का फैसला लिया है। देश में इंदिरा गांधी के शासनकाल में विवादास्पद इमरजेंसी लगाई गई थी।

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indira gandhi

दसवीं और बारहवीं के सिलेबस में इमरजेंसी

राजस्थान में दसवीं और बारहवीं के स्टूडेंट्स को सोशल साइंस के टेक्स्टबुक में इंदिरा गांधी के इमरजेंसी रूल के बारे में पढ़ाया जाएगा।

इसकी घोषणा राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने अपने क्षेत्र अजमेर में एक सरकारी स्कूल के फंक्शन के दौरान की है।

vasudev devnani

भाजपा सरकार क्यों पढ़ाना चाहती है इमरजेंसी

राजस्थान सरकार के इस फैसले की वजह बताते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा, '1975 में इमरजेंसी देश पर थोपा गया। इसमें लोगों को जेल में डाला गया। यह राजनीतिक उथल पुथल और परिवर्तन का दौर था। लोकतंत्र की रक्षा कैसे की जाए, यह युवाओं को बताना जरूरी है।'

भाजपा सरकार के फैसले से भड़की कांग्रेस

राजस्थान सरकार के इस फैसले से कांग्रेस भड़क गई है। इससे पहले भी शिक्षा मंत्रालय ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम आठवीं क्लास के सोशल साइंस टेक्स्ट बुक से गायब कर दिया था। इसमें महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे द्वारा किए जाने का भी जिक्र नहीं था।

कांग्रेस ने की भाजपा की आलोचना

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि इंदिरा गांधी देश की सबसे ताकतवर नेताओं में से एक रही हैं। अगर उनके बारे में बात करनी हो तो पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उनकी भूमिका को पढ़ाना चाहिए।

राजस्थान सरकार के शिक्षा पर उठाए गए विवादित कदम

स्कूल करिकुलम में बदलाव को लेकर राजस्थान सरकार के उठाए कदमों पर पहले भी विवाद होते रहे हैं। पहली बार 2014 में राजस्थान सरकार ने सूर्य नमस्कार को स्कूलों में अनिवार्य किया था। इसको लेकर मुस्मिम नाराज हो गए थे। मुस्लिम समुदाय का कहना था कि सूर्य हिंदुओं के देवता हैं इसलिए सूर्य नमस्कार वे नहीं कर सकते।

2015 में शिक्षा बोर्ड ने किताबों में बदलाव करके टेक्स्टबुक में अकबर के साथ उनका टाइटल 'द ग्रेट' हटा दिया और उनकी तुलना में महाराणा प्रताप को ज्यादा महत्व देने का फैसला लिया। इन फैसलों पर देश में काफी विवाद हुआ।

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