राजस्थान में KCC का लोन नहीं चुकाने पर किसान की 15 बीघा जमीन 46 लाख में नीलाम, ऋण के बाकी थे 7 लाख
दौसा, 19 जनवरी। राजस्थान के दौसा में कृषि ऋण नहीं चुका पाने वाले एक किसान परिवार की जमीन मंगलवार को नीलाम हो गई। दौसा के इस किसान परिवार के मुखिया पर बैंक का 7 लाख का कर्ज था। किसान की मौत हो गई थी। उसका परिवार कर्ज नहीं चुका सका।

किसान की यह जमीन पहले कुर्क की गई थी
बता दें कि दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा में स्थित किसान की यह जमीन पहले कुर्क की गई थी और मंगलवार को उस जमीन की नीलामी भी कर दी गई। जमीन खो चुका किसाना परिवार दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा के जामुन की ढाणी का है।

7 लाख रुपए से अधिक का ऋण नहीं चुकाया
बता दें कि दौसा जिले के किसान कजोड़ मीणा ने रामगढ़ पचवारा स्थित राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक से केसीसी का लोन लिया था। वर्ष 2017 के बाद किसान ने 7 लाख रुपए से अधिक का ऋण नहीं चुकाया। केसीसी लोन लेने वाले किसान कजोड़ मीणा की मौत भी हो गई।

पैसे जमा कराने के लिए कई बार नोटिस दिए
इसके बाद बैंक ने मृतक किसान के पुत्र राजू लाल और पप्पू लाल को पैसे जमा कराने के लिए कई बार नोटिस दिए, लेकिन किसान परिवार की आर्थिक स्थिति और सरकार के कर्ज माफी के इंतजार में लोन जमा नहीं हो पाया। आखिर में रामगढ़ पचवारा एसडीएम कार्यालय की ओर से जमीन कुर्की के आदेश दिए गए।

मंगलवार को नीलामी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई
जमीन कुर्की के आदेश के बाद भी किसान परिवार के पास जमा कराने के पैसे नहीं थे। ऐसे में जमीन कुर्क होने के बाद मंगलवार को नीलामी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। ऐसे में किसान कजोड़ मीणा की करीब 15 बीघा 2 बिस्वा जमीन की नीलामी हुई। और 46 लाख 51 हजार रुपए में किसान की जमीन नीलाम कर दी गई। यह जमीन किरण शर्मा निवासी मंडावरी ने नीलामी के तहत छुड़वाई।
Rajasthan | A farmer's land was auctioned yesterday in Ramgarh Pachwara village of Dausa for non-payment of the loan amount
My father had taken a loan & he is dead now. We were unable to repay it & requested bank but they denied to give any chance: Pappu Lal, farmer's son pic.twitter.com/4rdqXN8ehR
— ANI (@ANI) January 19, 2022
सेटलमेंट के प्रयास भी किए थे
मिथलेश मीणा एसडीएम ने कहा कि सेटलमेंट के प्रयास भी किए थे। किसान ने केसीसी लोन जमा नहीं कराया था। इसके लिए बार-बार किसान परिवार से संपर्क भी किया गया था। सेटलमेंट के लिए भी प्रयास किए गए थे। लेकिन किसान की ओर से लिया गया लोन नहीं चुकाया गया। इसके बाद जमीन की नीलामी की गई है।












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