Rajasthan: देवली-उनियारा से निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा कांग्रेस से निलंबित, प्रदेश प्रभारी ने जारी किए आदेश
Rajasthan By-Polls: राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नरेश मीणा को पार्टी से निलंबित कर दिया है। नरेश मीणा द्वारा देवली निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के फैसले के बाद पार्टी ने यह कड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए नरेश मीणा के खिलाफ यह आदेश जारी किया है। कांग्रेस के अनुसार पार्टी की नीतियों और अनुशासन के खिलाफ जाकर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का उनका निर्णय स्वीकार्य नहीं है।
यह निलंबन ऐसे समय में हुआ है। जब राज्य में सात विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने वाले हैं। जिनका मतदान 13 नवंबर को होना है और नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। नरेश मीणा के इस कदम से देवली सीट पर चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस ने कस्तूर चंद मीना को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं भाजपा से राजेंद्र गुर्जर मैदान में हैं। अब नरेश मीणा के निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने से मुकाबला और भी रोचक हो गया है। जिससे कांग्रेस के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।

बीएपी का समर्थन और कांग्रेस के लिए चुनौती
भारत आदिवासी पार्टी ने इस चुनाव में नरेश मीणा को अपना समर्थन दे दिया है। जिससे आदिवासी मतदाताओं का झुकाव उनके पक्ष में होने की संभावना है। बीएपी के अध्यक्ष मोहन लाल रोत द्वारा भेजे गए समर्थन पत्र ने चुनावी समीकरणों में नए रंग भर दिए हैं। इस समर्थन के बाद कांग्रेस को अब न केवल भाजपा से। बल्कि अपने ही पूर्व सदस्य से भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। नरेश मीणा का यह कदम कांग्रेस के आंतरिक विद्रोह की ओर इशारा करता है। क्योंकि वे पहले कांग्रेस से टिकट की मांग कर चुके थे।
सचिन पायलट ने पार्टी एकता पर दिया जोर
इस उथल-पुथल के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने पार्टी की एकता और अनुशासन पर बल देते हुए कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहकर पार्टी के हित में कार्य करना चाहिए। पायलट ने उपचुनाव में सभी सातों सीटों पर जीत का दावा करते हुए पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी सबसे बड़ी है और हमें सभी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
राजस्थान उपचुनाव की बढ़ती जटिलता
जैसे-जैसे 13 नवंबर का मतदान दिन नजदीक आ रहा है। इस उपचुनाव का मुकाबला अत्यंत दिलचस्प होता जा रहा है। नरेश मीणा का निर्दलीय रूप से मैदान में उतरना और बीएपी का समर्थन कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। 23 नवंबर को घोषित होने वाले नतीजे राजस्थान की राजनीतिक दिशा और कांग्रेस की रणनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं।












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