कौन हैं दीया कुमारी जिन्हें बताया जा रहा है राजस्थान की अगली वसुंधरा राजे?
राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावों को लेकर बीजेपी औऱ कांग्रेस जोरशोर से जुटी हुई है। लेकिन इस बार बीजेपी राज्य की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की जगह एक दूसरे राजघराने वाली महिला नेता को अधिक तबज्जो दे रही है।
यह महिला नेता भी वसुंधरा राजे के तरह राजूपत राजघराने से संबंध रखती हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखती हैं। हम बात कर रहे हैं- जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी की। दीया कुमारी को बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व वसुंधरा राजे से अधिक महत्व दे रहा है।

जिसका बानगी हाल ही में जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 सिंतबर को हुई परिवर्तन संकल्प महासभा में देखने को मिला। इस जनसभा में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का कोई भाषण नहीं हुआ था। जबकि मंच का संचालन राजसमंद सांसद दीया कुमारी ने किया।
मोदी की रैली में ऐसी जिम्मेदारियां आम तौर पर पार्टी के वरिष्ठ और भरोसेमंद नेताओं को दी जाती हैं। लेकिन दीया कुमारी को इस कार्यक्रम में तवज्जो मिलना प्रदेश में नए सियासी समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। अब इस बात की अटकलें भी लगनी शुरू हो गई हैं कि बीजेपी वसुंधरा राजे की काट के तौर पर दीया को आगे कर रही है।
कई लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या भाजपा 52 वर्षीय राजकुमारी को अगली वसुंधरा राजे सिंधिया बनने के लिए तैयार कर रही है। भले ही बीजेपी दीया कुमारी की आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। लेकिन आज भी राजस्थान में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा वसुंधरा राजे सिंधिया ही हैं।

बता दें कि, भाजपा ने सभी आगामी राज्य चुनावों में पीएम मोदी के चेहरे के साथ जाने का फैसला किया है। बीजेपी ने राज्य में अपने सबसे प्रमुख चेहरा वसुंधरा राजे सिंधिया को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है।
लेकिन राज्य इकाई में वसुंधरा राजे सिंधिया के एकछत्र राज के चलते कई बार उनकी बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से सीधी लड़ाई देखने को मिली। राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री राजे और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच मतभेदों के कारण 2018 में पार्टी की राज्य इकाई के नए अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हुई थी। जिसका असर उस समय के चुनाव पर भी देखने को मिला था।
इसी महीने दीया कुमारी को जयपुर में हिंदू संगठनों और जयपुर बचाओ संघर्ष समिति के एक बड़े प्रदर्शन में देखा गया था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी दुकानों को एक खास समुदाय द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। जयपुर शाही परिवार की राजकुमारी की उपस्थिति को राजपूत मतदाता को अपनी ओर खींचने और बड़े पैमाने पर हिंदुओं तक पहुंचने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जिसके बाद भाजपा के अंदर ही नेताओं में ये बहस चल रही है कि, बीजेपी दीया कुमारी को इस चुनाव के लिए ही नहीं बल्कि लंबी रणनीति के तहत अगली वसुंधरा राजे बनाने की तैयारी कर रही है। अगर बीजेपी चुनाव जीतती है तो इस बात की संभावना नजर आ रही है कि दीया कुमारी को पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

कौन हैं दीया कुमारी?
1971 को जन्मी दीया कुमारी जयपुर के पूर्व राजपरिवार से है। दीया कुमारी भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान जयपुर के अंतिम शासक महाराजा मान सिंह द्वितीय की पोती हैं। वह खुद जयपुर की राजकुमारी हैं और जयपुर के वर्तमान महाराजा पद्मनाभ सिंह की मां हैं।
वह जयपुर के पूर्व महाराजा व होटल व्यवसायी ब्रिगेडियर भवानी सिंह और पद्मिनी देवी की बेटी हैं। कुमारी ने मॉडर्न स्कूल (नई दिल्ली), जीडी सोमानी मेमोरियल स्कूल (मुंबई) और महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल (जयपुर) से पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने लंदन में डेकोरेटिव आर्ट्स का कोर्स किया।
दीया कुमारी ने परंपरा के खिलाफ जाकर 1997 में एक आम आदमी नरेंद्र सिंह से शादी की थी। जिसके बाद 2019 में उन्होंने तलाक ले लिया था। दीया व नरेंद्र सिंह के दो बेटे पद्मनाभ सिंह व लक्ष्यराज सिंह और बेटी गौरवी है। दीया कुमारी जयगढ़ किले, आमेर फोर्ट, दो ट्रस्टों - महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय ट्रस्ट, जयपुर और जयगढ़ पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट को संभालती हैं। इसके अलावा वह 2 स्कूल और तीन होटलों को भी चलती हैं।
दीया कुमारी ने साल 2013 में भारतीय जनता पार्टी ज्वॉइन करने के बाद उसी साल सवाई माधोपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक बनीं। इसके बाद वह 2019 में राजसमंद सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ी और सांसद बनीं। वर्तमान में दीया कुमारी राजस्थान बीजेपी में महिला मोर्चे की प्रदेश प्रभारी हैं।












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