Rajasthan Election: दौसा में क्या हैं असल मुद्दे? कांग्रेस-बीजेपी की गारंटियों के बीच बोले वोटर्स
Rajasthan Assembly Election: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों की अपने-अपने वादों के साथ चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में राज्य के अंदर चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है। 25 नवंबर को उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो जाएगा। प्रत्याशी अपने स्तर पर भी जनता से वादे कर रहे हैं। ऐसे में दौसा जिले (Dausa Assembly Seat) के वोटर्स के असल मुद्दे क्या है? दौसावासियों ने खुद बताया।
राजस्थान की सभी सीटों पर चुनावी सरगर्मी और सियासी पारी चढ़ा हुआ है। ऐसे में दौसा की पांचों विधानसभा सीट पर भी चुनावी माहौल परवान पर है। जिले में हर कोई इस समय चुनाव की ही बात कर रहा है।

समाज के किसी भीं वर्ग से कहीं भी आप बात कर लीजिए, चर्चा आकर इलेक्शन पर ही टिक जाती है। ऐसे में जब हम दौसा विधानसभा क्षेत्र के कृषि उपज अनाज मंडी में पहुंचे तो वहां मौदूग लोगों का क्या कहना था?
जब लोगों से पूछा गया कि दौसा शहर का असल मुद्दा क्या है, तो लोगों का मनना है कि यहां कोई मुद्दा नहीं है अगर कोई बड़ा मुद्दा है तो वह पानी ही है। राजस्थान में पानी की स्थिति गर्मी हो या सर्दी हर वक्त एक जैसी बनी रहती है। दौसा में भी पानी की भारी किल्लत देखी जाती है। ऐसे में यहां पानी का मुद्दा सबसे बड़ा है।
वहीं आए किसानों की मानें तो पानी के लिए हर कोई वादा करता है कोई क्या कहता है तो कोई ईस्टर्न राजस्थान कनाल का मुद्दा उठाता है, लेकिन यह बातें इतनी ज्यादा बार और इतनी जगह बोली जा चुकी है कि अब किसी पर भी यकीन नहीं है।
वोटर्स ने कहा कि पानी जब कभी आ जाएगा तो हम मान लेंगे, हम मान लेंगे कि यह जगह अब रहने लायक हो गई है, सिंचाई करने लायक हो गई है, खेती करने लायक हो गई है।
आपको बता दें कि राजस्थान में 25 नवंबर को 199 सीटों पर मतदान होने जा रहा है। इससे पहले दौसा में भी नेताओं और बीजेपी-कांग्रेस के स्टार प्रचरकों के ताबड़तोड़ दौरे हो रहे हैं। ऐसे में अब 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के बाद दौसा शहर का असल मुद्दा पूरा होगा ये आने वाले सालों में देखने वाला होगा।
संवाद सूत्र: सुनील सत्यवादी, दौसा












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