'परीक्षा से ज्यादा पहचान जरूरी', NEET Re Exam में बुर्का पर बवाल, एग्जाम सेंटर से कुलसुम बानो का वीडियो वायरल
NEET UG Re-Exam Burqa Controversy: देशभर के लाखों छात्रों ने रविवार 21 जून 2026 को NEET UG री-एग्जाम दिया। परीक्षा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और सभी केंद्रों पर अभ्यर्थियों की जांच की जा रही थी। इसी बीच राजस्थान के अजमेर से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। परीक्षा केंद्र पहुंची एक छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे बुरका और दुपट्टा पहनकर अंदर जाने से रोका गया।
छात्रा का कहना है कि जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने निर्धारित नियमों के तहत ऐसी पोशाक की अनुमति दी है, तो केंद्र पर मौजूद कर्मचारी उन्हें रोक नहीं सकते। छात्रा का बयान सामने आने के बाद यह मुद्दा केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक पहचान, व्यक्तिगत अधिकार और परीक्षा सुरक्षा को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

अजमेर के परीक्षा केंद्र पर हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, ब्यावर से परीक्षा देने पहुंचीं कुलसुम बानो ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें दुपट्टा हटाने के लिए कहा। छात्रा का कहना है कि कुछ देर बाद उनसे बुरका हटाने की भी बात कही गई। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें कहा गया कि इसी शर्त पर अंदर प्रवेश मिल सकेगा। इस बात को लेकर वहां कुछ समय तक बहस भी हुई।
#WATCH | Ajmer, Rajasthan: A Burqa-wearing candidate was allegedly denied entry at a medical entrance exam centre ahead of the NEET examination today.
A candidate, named Kulsum Bano, says, "I have come from Beawar to take the NEET exam. When I took the exam on May 3rd, I was in… pic.twitter.com/3TVNnYk52n
— ANI (@ANI) June 21, 2026
छात्रा बोलीं- पहले भी इसी पोशाक में दी थी परीक्षा
कुलसुम बानो ने कहा कि उन्होंने 3 मई को आयोजित NEET परीक्षा भी इसी पोशाक में दी थी। उस समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा था। उनका कहना है कि यदि NTA ने धार्मिक पोशाक पहनने वाले छात्रों के लिए नियम बनाए हैं और उन्हें अनुमति दी है, तो परीक्षा केंद्र के कर्मचारी अलग नियम नहीं बना सकते।
ये भी पढ़ें: धरना, नारेबाजी और चौके-छक्के! जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शनकारियों का अनोखा अंदाज, अभिजीत दिपके का वीडियो वायरल
'मेरे लिए पहचान ज्यादा जरूरी'
छात्रा का बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें बुरका पहनकर परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी तो वह परीक्षा ही नहीं देंगी।
कुलसुम ने कहा, "मेरे लिए परीक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण मेरी पहचान और मेरा बुरका है। अगर मुझे इसी पोशाक में परीक्षा नहीं देने दी जाती, तो मैं परीक्षा नहीं दूंगी।" उन्होंने यह भी कहा कि 18 साल के छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाना शर्मनाक है।
NEET में धार्मिक पोशाक को लेकर क्या हैं नियम
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा जांच को बेहद अहम माना जाता है। परीक्षा से पहले उम्मीदवारों की जांच की जाती है और ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य होता है।
हालांकि धार्मिक या पारंपरिक पोशाक पहनने वाले उम्मीदवारों के लिए अलग दिशा-निर्देश भी जारी किए जाते हैं। ऐसे छात्रों को आमतौर पर परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचने की सलाह दी जाती है ताकि अतिरिक्त जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके और परीक्षा समय पर शुरू हो सके।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने छात्रा के पक्ष में अपनी बात रखी और इसे व्यक्तिगत पहचान तथा धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बताया। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता सबसे ऊपर होनी चाहिए। उनके अनुसार, जांच के नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, चाहे वे किसी भी पृष्ठभूमि से आते हों।
केंद्र प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले पर परीक्षा केंद्र प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं छात्रा का वीडियो और बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार वायरल हो रहा है, जिसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है।
ये भी पढ़ें: NEET UG री-एग्जाम आज, परीक्षा से पहले NTA ने क्यों बदली गाइडलाइन? दी पारदर्शी फाइल ले जाने की परमिशन












Click it and Unblock the Notifications