नौसेना में शामिल हुए 3 स्वदेशी युद्धपोत, INS Dunagiri, Sanshodhak और Agray कैसे बदलेंगे हिंद महासागर का गेम?
Indian Navy New Warships: भारत ने अपनी समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देते हुए एक साथ तीन स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को नौसेना में शामिल कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन जहाजों को भारतीय नौसेना को समर्पित किया। खास बात यह है कि इन तीनों प्लेटफॉर्म्स में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है।
ये जहाज सिर्फ नौसेना की ताकत नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़, समुद्री निगरानी और दुश्मन पनडुब्बियों से निपटने की क्षमता को भी मजबूत करेंगे। आइए जानते हैं कि ये तीनों जहाज कितने ताकतवर और भारत के लिए क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं।

INS दुनागिरी: नौसेना का नया स्टील्थ शिकारी?
INS Dunagiri प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार की गई पांचवीं स्टील्थ फ्रिगेट है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान बेहद मुश्किल हो। यह आधुनिक सेंसर, अत्याधुनिक युद्ध प्रणाली और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों से लैस है। भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार इस युद्धपोत का मुख्य उद्देश्य समुद्र में दुश्मन के जहाजों, विमानों और मिसाइलों से मुकाबला करना है। स्टील्थ तकनीक की वजह से यह आधुनिक नौसैनिक युद्ध में भारत की बड़ी ताकत साबित होगी।
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ब्रह्मोस मिसाइल से लैस, कितना ताकतवर है दुनागिरी?
आईएनएस दुनागिरी की सबसे बड़ी ताकत इसकी मारक क्षमता है। इसमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं, जो समुद्र और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को सटीक निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम इसे हवाई खतरों से सुरक्षा देता है। आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एंटी-सबमरीन हथियार इसे मल्टी-रोल युद्धपोत बनाते हैं। युद्ध की स्थिति में यह अकेले ही बड़े समुद्री क्षेत्र में प्रभावी ऑपरेशन चलाने में सक्षम है।
INS संशोधक: समुद्र की हर जानकारी जुटाएगा?
आईएनएस संशोधक एक सर्वे वेसल (लार्ज) है, जिसका काम सीधे युद्ध लड़ना नहीं बल्कि समुद्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना है। यह तटीय क्षेत्रों से लेकर गहरे समुद्र तक हाइड्रोग्राफिक सर्वे कर सकता है। जहाज समुद्र की गहराई, समुद्री तल की संरचना और महासागरीय गतिविधियों का अध्ययन करता है। इसमें अत्याधुनिक सर्वे सिस्टम, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) लगे हैं। इससे जुटाया गया डेटा रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी होगा।
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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है INS संशोधक?
समुद्री नक्शे तैयार करने, सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने और भविष्य के नौसैनिक अभियानों की योजना बनाने में आईएनएस संशोधक की बड़ी भूमिका होगी। इसके जरिए जुटाई गई जानकारी नौसेना को समुद्री मार्गों, बंदरगाहों और रणनीतिक क्षेत्रों की बेहतर समझ देगी। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की खोज, समुद्री अनुसंधान और आपदा प्रबंधन में भी यह जहाज मदद करेगा। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच यह भारत की समुद्री डोमेन जागरूकता को काफी मजबूत करेगा।
INS अग्रय: दुश्मन पनडुब्बियों का काल?
आईएनएस अग्रय अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का चौथा जहाज है। इसका मुख्य काम तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है। आधुनिक सोनार सिस्टम की मदद से यह समुद्र के भीतर छिपे खतरों को खोज सकता है। इसके साथ ही इसमें हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर भी लगाए गए हैं। यह भारत के तटीय इलाकों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
तीनों जहाजों से कैसे बदलेगी भारत की समुद्री ताकत?
तीनों प्लेटफॉर्म अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं, लेकिन मिलकर भारतीय नौसेना की क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। दुनागिरी समुद्री युद्ध में ताकत बढ़ाएगा, संशोधक समुद्री जानकारी जुटाएगा और अग्रय पनडुब्बी खतरों से रक्षा करेगा। 75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी तकनीक के साथ इनका निर्माण भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की बड़ी सफलता है। 200 से अधिक एमएसएमई की भागीदारी ने यह भी साबित किया है कि भारत अब अत्याधुनिक युद्धपोत निर्माण में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।












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