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राजस्थान: 9वीं सदी की भगवान शिव की मूर्ति लंदन से वापस लौटेगी घटेश्वर मंदिर, जानिए खासियत

नई दिल्ली- राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। 22 साल पहले राजस्थान के एक प्राचीन मंदिर से चोरी करके विदेश ले जायी गई भगवान शिव की एक अनमोल प्रतिमा के स्वदेश लौटने का रास्ता साफ हो चुका है। इस मूर्ति को वापस लाने के लिए 15 साल से संघर्ष किया जा रहा था, लेकिन आखिरकार वह समय आ गया है। अभी तक की जानकारी के अनुसार ये प्रतिमा वापस राजस्थान के बाड़ौली के उसी घटेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित की जाएगी, जहां से मूर्ति चोर उसे दो दशक पहले चुराकर ले गए थे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत से विदेश चोरी करके ले जायी गई कई ऐसी अनमोल धरोहरें अपने देश में वापस लौट आई हैं।

प्रतिहार राजाओं के समय की शिव मूर्ति

प्रतिहार राजाओं के समय की शिव मूर्ति

भगवान शिव की एक अति प्राचीन और अनमोल मूर्ति के लगभग 22 वर्षों बाद राजस्थान के प्रसिद्ध घटेश्वर मंदिर में वापस लौटने का रास्ता साफ हो गया है। यह ऐतिसाहिसक और धार्मिक धरोहर चोरी करके इंग्लैंड ले जाई गई थी। 4 फीट ऊंची यह मूर्ति प्रतिहार राजाओं द्वारा 9वीं सदी में बनवाई गई थी और कहा जाता है कि 1998 में राजस्थान के बाड़ौली से उसकी चोरी हो गई थी। बाद में यह पता चला की यह अनमोल मूर्ति यूनाइटेड किंग्डम में किसी अमीर शख्स के पास पहुंच चुकी है, जो बेशकीमती वस्तुओं का कलेक्शन रखता है। बाद में उस शख्स से शिव मूर्ति वापस लेने के लिए ब्रिटिश और भारतीय अधिकारियों ने पूरा जोर लगा दिया। तब जाकर उस व्यक्ति ने खुद से 2005 में भगवान शिव की प्रतिमा को लंदन में भारतीय उच्चायोग को सौंप दिया।

चतुर मुद्रा वाले भोलेनाथ की प्रतिमा

चतुर मुद्रा वाले भोलेनाथ की प्रतिमा

तब से भगवान भोलेनाथ की यह चतुर मुद्रा वाली प्रतिमा, जिसमें जटा मुकुट और त्रिनेत्र है, लंदिन के प्रमुख स्थान पर स्थित इंडिया हाउस में रखी हुई है। 2017 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों को भी लंदन बुलाया गया था, ताकि वह इस बात की पुष्टि कर सकें कि क्या यह वही प्रतिमा है, जो राजस्थान के बाड़ौली शिव मंदिर से चोरी हुई थी। अब इस चर्चित प्रतिमा के अपने मूल स्थान पर लौटने का रास्ता साफ हो चुका है। बता दें कि भारत से बाहर ले जायी गई अनमोल कलाकृतियों और प्राचीन वस्तुओं के खोजने की भारत सरकार के ऑपरेशन में यह सबसे नई सफलता है, जो उसने यूके, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जर्मनी की सरकारों के साथ मिलकर हाल के वर्षों में चलाया है।

ब्रह्मा ब्राह्मणी की प्राचीन प्रतिमा भी लौट चुकी है

ब्रह्मा ब्राह्मणी की प्राचीन प्रतिमा भी लौट चुकी है

हाल के वर्षों में भारत की कोशिशों से जो अनमोल कलाकृतियां स्वदेश लौट सकी हैं, उनमें प्रसिद्ध ब्रह्मा ब्राह्मणी की प्रतिमा भी शामिल है। जो विश्व धरोहर स्थल गुजरात के पाटन स्थित रानी की वाव से चोरी कर ले जाई गई थी। लेकिन, 2017 में यह विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा वापस एएसआई के पास लौट आई। उसी साल 12वीं सदी की भगवान बुद्ध की पीतल की एक प्रतिमा लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने वहां पर भारतीय उच्चायुक्त को सौंपी थी, जिसे 2019 में केंद्रीय वित्त मंत्री ने संस्कृति मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्री के हवाले कर दिया था। जबकि, पिछले साल 15 अगस्त को 17वीं सदी की नवनीता कृष्णा की एक पीतल की मूर्ति और दूसरी सदी में चूना पत्थर की बने नक्काशीदार स्तंभ आकृति अमेरिकी दूतावास ने उच्चायुक्त को सौंप दिया था।

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