राजस्थान : होटल पर चाय के गिलास धोने वाला पुरखाराम बनेगा डॉक्टर, गरीबी को मात देकर NEET में पाई सफलता
बाड़मेर, 12 सितम्बर। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो गरीबी को मात देकर कामयाबी की नई कहानी लिख देते हैं। अधिकांश लोग परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति के सामने घुटने टेक देते हैं। इस मामले में राजस्थान के बाड़मेर पुरखाराम की कहानी सबसे जुदा और हर किसी को प्रेरित करने वाली है। पुरखाराम वो शख्स है, जो कभी होटल पर चाय के गिलास धोया करता था और आज डॉक्टर बनने से बस एक कदम दूर है।

बता दें कि पुरखाराम मूलरूप से बाड़मेर जिले के शिवकर का रहने वाला है। इसके पिता मल्लाराम किसान और माता गृहणी है। पुरखाराम के 4 भाई और 2 बहनें हैं। परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण पुरखाराम को एमबीबीएस करवाना सिर्फ एक ख्वाब ही था।
गरीबी के कारण पुरखाराम ने 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ने चाही, मगर चाय की दुकान पर मजदूरी करने लगा। अगले ही दिन होटल पर जा रहा था तब उसके विज्ञान के शिक्षक भेरूसिंह ने बाड़मेर की फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान के बारे में बताया। जहां से पुरखाराम को आर्थिक मदद मिली और ख्वाब पूरा होने के करीब पहुंच गया।
पुरखाराम ने उसी दिन से फिफ्टी विलेजर्स प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। परीक्षा के बाद उसे फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान में प्रवेश मिला। तबसे उसने यहां रहकर नियमित रूप से अध्ययन कर 11वीं में अच्छे अंको से उत्तीर्ण की। अगले साल NEET की तैयारी की तो 540 अंक प्राप्त किए लेकिन चयन नहीं हुआ। फिर NEET की तैयारी की एवं 588 अंक प्राप्त किए।
मीडिया से बातचीत में पुरखाराम ने बताया कि दो बार की असफलता भी इरादे नहीं बदल सकी। तीसरी बार में MBBS में चयन हो गया है। इस बार AIR 5655 रही है। पुरखाराम कहता है कि अगर मेरा बाड़मेर की फिफ्टी विलेजर्स में चयन नहीं होता तो वह आज भी होटल पर चाय बना रहा होता या कहीं मजदूरी कर रहा होता।












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