Rajasthan News: राजस्थान में राज्यपाल की सक्रियता से बढ़ी सियासी हलचल, क्या फिर से खड़ा हो रहा नया पावर सेंटर
Rajasthan News: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्टी ने साधारण कार्यकर्ता भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया है। लेकिन प्रदेश में सरकार का इकबाल बुलंद नहीं हो पा रहा है। इसी बीच प्रदेश के मुख्य सचिव सुधांशु पंत की सक्रियता ने विधायकों और कार्यकर्ताओं का संशय और बढ़ा दिया।
मुख्यमंत्री के बाद मुख्य सचिव की सक्रियता से प्रदेश में दो पावर सेंटर होने का संदेश गया। अब राजस्थान में हाल ही में नियुक्त हुए राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े की सक्रियता राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रदेश में राज्यपाल की भूमिका को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

राज्यपाल की बैठकों और दौरों की चर्चा
राजस्थान में राज्यपाल नियुक्त होने के साथ ही हरिभाऊ बागड़े एक्टिव मोड में नजर आने लगे हैं। पिछले दिनों राज्यपाल ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर आदिवासी इलाकों में चिकित्सा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्र में बच्चों की पढाई लिखाई। आवास योजनाओं और काश्तकारों को लेकर जनजाति विकास विभाग मंत्री बाबू लाल खराड़ी से जानकारी ली।
पिछले दिनों राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े सीमावर्ती जिले बाड़मेर के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने सैनिकों से मुलाकात की। अपने दौरे के दौरान राज्यपाल ने शिव विधानसभा बॉर्डर गांव तामलोर में जनसुवाई की। इस दौरान बाड़मेर कलक्टर और विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने बाड़मेर के स्कूलों का भी जायजा लिया और घरों में जाकर आमजन से सरकारी योजनाओं का फीडबैक लिया।
राज्यपाल की सक्रियता की सियासी चर्चा
राजस्थान में राज्यपाल की सक्रियता को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक नारायण बारेठ कहते हैं कि राज्यपाल प्रदेश के लिए नए हैं। उनके लिए प्रदेश की राजनीति, संस्कृति, भूगोल, सामाजिक परिस्थितियां सब कुछ नया है। जाहिर है कि वे इतने नए हैं कि उनके लिए राजस्थान को जानना आवश्यक है। लेकिन जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री प्रबल व्यक्तित्व के धनी न हो तो इस तरह की चर्चाएं ज्यादा होने लगती है।
वे कहते हैं कि राज्यपाल अधिक सियासत के धनी व्यक्तित्व रहे हैं। सहकारिता आंदोलन से निकले हैं। उनका सक्रिय होना राजनीति में इस बात को बल देता है कि उनकी सक्रियता क्यों है। जिन राज्यों में मुख्यमंत्री बहुत विराट व्यक्तित्व वाले नहीं होते हैं और नए होते हैं। उनके पास अनुभव की कमी होती है। तब इस तरह की चर्चा होना लाजिमी होता है।
वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ आगे कहते हैं कि राज्यपाल एक संवैधानिक प्रमुख होते हैं। उनका इतना काम नहीं होता है। खासतौर पर जब उनकी ही पार्टी ने उन्हें नॉमिनेट किया हो तब भूमिका और सिमित हो जाती है। लेकिन राज्य में इस समय राजनीति से अधिक नौकरशाही प्रभावशाली है। ऐसे में ऐसी चर्चाओं को पंख लगना जरूरी हो जाता है। इसीलिए ऐसी चर्चा हो रही है। अगर मुख्यमंत्री लंबे राजनीतिक अनुभव वाले व्यक्तित्व होते या राजनीतिक खिलाड़ी होते तो ऐसी चर्चाएं नहीं होती। फिर चाहे राज्यपाल कोई हो या मुख्य सचिव कोई भी हो। जब मुख्यमंत्री कमजोर हो तब सत्तारूढ़ पार्टी में इस तरह की चर्चाएं होने लगती है कि मुख्य सचिव सक्रिय है।
जानिए कौन है राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े
हरिभाऊ बागड़े मूलतः महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। भाजपा में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद 1985 में औरंगाबाद पूर्व विधानसभा सीट से हरिभाऊ किशनराव बागड़े पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2014 में जब महाराष्ट्र में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। तब उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया। 2014 के विधानसभा के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण काले को शिकायत दी थी। इससे पहले वह लगातार 20 साल तक विधायक रहे।
मनोहर जोशी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में बागड़े को मंत्री बनने का अवसर भी मिला था। वह एक बार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रहे। जबकि एक बार उनके पास बागवानी एवं रोजगार गारंटी विभाग की जिम्मेदारी रही है। हरिभाऊ बागड़े सहकारिता आंदोलन से निकलकर राजनीति में आए हैं। महाराष्ट्र में उन्हें जन नेता के तौर पर जाना जाता है।
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