Rajasthan : घर में पहला कदम रखने के लिए Helicopter में सवार होकर आई डेढ़ माह की बेटी Riya, देखें VIDEO

नागौर, 21 अप्रैल। राजस्थान के नागौर जिले के गांव निम्बड़ी चांदावता में लाडो का अनूठे अंदाज में लाड प्यार किया गया है। पैदा के 50 दिन बाद यह मासूम बच्ची अपने घर में पहला कदम रखने के लिए हेलीकॉप्टर में सवार होकर आई। राजस्थान में संभवतया यह पहला मामला है जब किसी नवजात बेटी की इस तरह से घर में एंट्री हुई है। मासूम बच्ची का नाम रिया है। रिया के अपने माता-पिता के साथ हेलीकॉप्टर में सवार होकर दादा के घर पहुंचने की पूरी कहानी बेहद दिलचस्प है।

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    Rajasthan : घर में पहला कदम रखने के लिए Helicopter में सवार होकर आई डेढ़ माह की बेटी Riya
    घर में 35 साल बाद पैदा हुई बेटी

    घर में 35 साल बाद पैदा हुई बेटी

    वन इंडिया हिंदी से बातचीत में रिया के पिता हनुमान राम प्रजापत ने बताया कि उनके परिवार में 35 साल बाद बेटी जन्मी है। रिया से पहले 35 साल पूर्व बहन तीजा का जन्म हुआ था। अब रिया पैदा हुई तो हनुमान राम के पिता मदनलाल प्रजापत और मां मुन्नीदेवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दादा-दादी ने अपनी पोती का ग्रांड वेलकम करने की ठानी।

    मदनलाल प्रजापत निम्बड़ी चांदावता नागौर

    मदनलाल प्रजापत निम्बड़ी चांदावता नागौर

    दरअसल, 3 मार्च 2021 को रिया के जन्म के वक्त उसकी मां चुकादेवी अपने पीहर नागौर जिले के ही गांव हरसोलव में थी। ऐसे में तय किया गया कि रिया और उसकी मां चुकादेवी को हेलीकॉप्टर से उनके घर गांव निम्बड़ी चांदावता लाया जाएगा। यह प्रजापत परिवार 80 बीघा में खेती करता है। आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है, मगर अच्छी सोच के चलते सब कुछ संभव हो पाया।

     फसल बेचकर जुटाए रुपए

    फसल बेचकर जुटाए रुपए

    पोती रिया का घर में पहला कदम रखने के लिए उसे हेलीकॉप्टर लाने की ठानी तो पता चला कि कम से कम सात लाख रुपए खर्च आएगा। लाखों के खर्चे की सोचकर भी मदनलाल प्रजापत का परिवार पीछे नहीं हटा। तुरंत मैथी, सरसों और जीरे की फसल बेची। फसल बेचने से चार लाख रुपए जुटाए। शेष जमा पूंजी में से खर्च किए।

    सात लाख रुपए किए खर्च

    सात लाख रुपए किए खर्च

    मदनलाल प्रजापत का यह अनूठे फैसला उस वक्त सुर्खियों में जब इस परिवार ने नागौर जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी के यहां हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति चाहने के लिए आवेदन किया। मंजूरी मिली तो गांव निम्बड़ी और हरसोलाव के खेतों में अस्थायी हेलीपेड का निर्माण किया। पुलिस, दमकल का भी इंतजाम करवाया। इसमें करीब डेढ़ लाख खर्च हुआ। शेष साढ़े पांच लाख रुपए हेलीकॉप्टर बुक करने व प्रीतिभोज में लगाए।

    ये लोग भी थे हेलीकॉप्टर में सवार

    हनुमान प्रजापत ने बताया कि रिया को अपने ननिहाल से पहली बार दादा के घर लाने के लिए 21 अप्रैल को समय चुना गया, क्योंकि इस दिन दुर्गा नवमी भी है। 21 अप्रैल को सुबह करीब नौ बजे जयपुर से हेलीकॉप्टर गांव निम्बड़ी चांदावता पहुंचा। यहां से हेलीकॉप्टर में खुद हनुमान, उनके जीजा अर्जुन प्रजापत, चचेरे भाई प्रेम व राजूराम ने उड़ान भरी।

    रास्ते को फूलों से सजाया

    रास्ते को फूलों से सजाया

    गांव निम्बड़ी चांदावता से करीब 35 किलोमीटर दूर गांव हरसोलाव में पहुंचने के बाद हनुमान राम प्रजापत की पत्नी चुका देवी नवजात बेटी रिया को गोद में लेकर हेलीकॉप्टर में सवार हुई। इन्हें साथ लेकर ये लोग दोपहर दो बजे वापस गांव निम्बड़ी चांदावता पहुंचे। यहां पर हेलीपेड से लेकर घर तक सजे रास्ते से होते रिया को बैंड बाजे के साथ लाया गया।

     जिला कलेक्टर ने की सराहना

    जिला कलेक्टर ने की सराहना

    नागौर जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी ने प्रजापत परिवार के इस फैसले पर प्रशंसा की और बुटाटी के डॉक्टर को इनके घर भेजकर प्रशंसा पत्र दिलवाया। खुद जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की दिशा में अच्छा काम कर रहे हैं। नागौर में विवादित रास्तों को खुलवाकर उनका नाम बोर्ड परीक्षाओं में अव्वल रहने वाली बेटियों के नाम पर रखने की पहल भी कर चुके हैं।

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