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Naresh Meena vs Amit Chaudhary: राजस्‍थान में SDM को थप्‍पड़ मारने पर सजा का क्‍या प्रावधान?

Naresh Meena vs SDM Deoli-Uniyara Tonk Rajasthan: राजस्‍थान एसडीएम थप्‍पड़ कांड के बीच सवाल उठता है कि क्‍या किसी उपखंड अधिकारी को थप्‍पड़ मारना कोई मामूली बात है या यह गंभीर अपराध है? थप्‍पड़ मारने वाले के खिलाफ कानून में सजा का भी कोई प्रावधान है? इस सवाल का जवाब रिटायर्ड आरएएस अधिकारी व मालपुरा टोंक में ही एसडीएम रहे रामनिवास जाट ने दिया है।

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    punishment for slapping SDM

    रामनिवास जाट कहते हैं कि अगर किसी भी लोक सेवक के साथ मामूली कहासुनी हुई है या सामने वाले ने लोक सेवक के साथ सामान्‍य हाथापाई की है तो वह दोषी है, मगर यह आईपीसी की धारा 323 में जमानती अपराध है, लेकिन हाथापाई करते हुए राजकार्य में बाधा पहुंचाई जाए या धारा 332 और लोक सेवक पर हमला किया जाता है तो वह आईपीएसी 353 का अपराध है, जो गैर जमानती है। हालांकि अभी देश में भारतीय न्‍याय संहिता लागू हो गई है। उसमें भी सजा के प्रावधानों में ज्‍यादा बदलाव नहीं हुआ है।

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    रामनिवास जाट के अनुसार टोंक जिले के देवली-उनियारा उपचुनाव 2024 में निर्दलीय प्रत्‍याशी नरेश मीणा द्वारा मालपुरा एसडीएम अमित कुमार चौधरी को थप्‍पड़ मारने के मामले में पुलिस किन धाराओं में क्‍या मामला दर्ज करती है, सजा उस पर निर्भर करती है। गैर जमानती धाराओं में तो कम से कम दो साल और अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। अगर नरेश मीणा के खिलाफ यह भी साबित होता है कि उसने एसडीएम को थप्‍पड़ मारने के साथ-साथ चुनाव कार्य में बाधा पहुंचाई है तो लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 के तहत अलग से भी कार्रवाई होगी।

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    Naresh Meena SDM Amit Chaudhary

    दरअसल, राजस्‍थान की सात सीटों दौसा, देवली उनियारा, झुंझुनूं, खींवसर, चौरासी, रामगढ़ और सलूंबर में उपचुनाव हो रहे हैं। 13 नवंबर को वोट डाले गए। टोंक जिले के देवली-उनियारा उपखंड अधिकारी के पास रिटर्निंग अधिकारी की जिम्‍मेदारी थी। ऐसे में चुनाव आयोग ने टोंक जिले के मालपुरा के एसडीएम अमित कुमार चौधरी को देवली-उनियारा उपचुनाव में एरिया मजिस्‍ट्रेट लगाया था।

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    देवली-उनियारा उपचुनाव में कांग्रेस के बागी व निर्दलीय उम्‍मीदवार नरेश मीणा के अलावा भाजपा के राजेंद्र गुर्जर व कांग्रेस के कस्‍तूर चंद मीणा के बीच मुकाबला था। 13 नवंबर को मतदान के दौरान टोंक जिले की नगर फोर्ट तहसील की कचरावता ग्राम पंचायत के गांव समरावता के मतदान केंद्र पर मतदान को लेकर एसडीएम अमित कुमार चौधरी और नरेश मीणा के बीच कहासुनी हो गई तो नरेश मीणा ने एसडीएम को थप्‍पड़ मार दिया।

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    नरेश मीणा ने एसडीएम को थप्‍पड़ क्‍यों मारा?

    देवली-उनियारा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्‍याशी नरेश मीणा द्वारा एसडीएम को थप्‍पड़ मारने की पुख्‍ता वजह का पता तो जांच में चल सकेगा, मगर कहा जा रहा है कि ग्रामीण गांव को उनियारा से देवली में जोड़ने के खिलाफ मतदान का बहिष्‍कार कर रहे थे। इस बात का पता लगने पर एसडीएम अमित कुमार चौधरी व नरेश मीणा मतदान केंद्र पर पहुंचे थे। एसडीएम पर आरोप है कि उन्‍होंने आंगनबाड़ कार्यकर्ताओं पर प्रेशर डालकर मतदान करवाया।

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    एसडीएम थप्‍पड़ कांड में नरेश मीणा गिरफ्तार

    13 नवंबर को एसडीएम के थप्‍पड़ मारने के तुरंत बाद मतदान केंद्र पर मौजूद पुलिस ने नरेश मीणा को पकड़ लिया था। बाद में खबर आई कि वह पुलिस हिरासत से भाग गया। उसे पकड़ने के लिए बुधवार रात को पुलिस गांव में दबिश दी तो पुलिस और नरेश मीणा समर्थक आमने-सामने हो गए। पुलिस पर जमकर पत्‍थर बरसाए गए। वाहनों के आग लगा दी गई और दूसरे दिन गुरुवार को भी स्थिति तनावपूर्ण रही। हालांकि दोपहर को नरेश मीणा को अरेस्‍ट कर लिया गया।

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    कौन है नरेश मीणा? (Who is Naresh Meena?)

    नरेश मीणा मूलरूप से राजस्‍थान के बारां जिले की अटरू तहसील के गांव नयागांव का रहने वाला है। इसके पिता कल्‍याण सिंह तीस साल तक सरपंच रहे हैं। वर्तमान में मां सरपंच व पनी सुनीता जिला परिषद सदस्‍य है। कांग्रेस में सचिन पायलट का करीबी नरेश मीणा साल 2023 में छबड़ा छीपाबड़ौदा से विधानसभा चुनाव हार चुका है। लोकसभा चुनाव 2024 में दौसा से टिकट मांग रहा था। देवली-उनियारा उपचुनाव में भी टिकट मांगी। टिकट नहीं मिलने पर बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसकी वजह कांग्रेस ने निलंबित कर दिया।

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    कौन हैं एसडीएम अमित कुमार चौधरी? (Who is SDM Amit Kumar Chaudhary?)

    14 मई 1992 को जन्‍मे अमित कुमार चौधरी मूलरूप से राजस्‍थान के अलवर के रहने वाले हैं। राजस्‍थान प्रशासनिक सेवा में साल 2019 बैच के आरएसस अधिकारी अमित कुमार चौधरी वर्तमान में टोंक जिले के मालपुरा में उपखंड अधिकारी पद पर हैं। इससे पहले झालावाड़ के मनोहरपुरा थाना, डूंगरपुर के चिकली, हिंडोली बूंदी, आसवार झालावाड़ और नागौर में एसडीएम रहे।

    punishment for slapping Government Officer

    कौन हैं रामनिवास जाट?

    रामनिवास जाट ने साल 1985 को राजस्‍थान प्रशासनिक सेवा ज्‍वाइन की थी। तब इनका चयन अधीनस्थ सेवाओं में हुआ था। साल 1998 में प्रमोट होकर आरएएस बने। मेड़ता, उदयपुरवाटी, श्रीडूंगरगढ़, शाहाबाद, राजगढ़ चूरू, मालपुरा टोंक में दस साल तक एसडीएम पद पर सेवाएं दीं। इसके अलावा प्रतापगढ़ डीएसओ, झुंझुनूं व हनुमानगढ़ में जिला परिषद सीईओ पद पर भी रहे।

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