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मुन्नालाल मुंडेल : AK-47 की 30 गोलियां लगने के बाद भी पाकिस्तान के 16 जवानों का सिर काटकर ले आए, देखें VIDEO

मुन्नालाल मुंडेल : AK-47 की 30 गोलियां लगने के बाद भी पाकिस्तान के 16 जवानों का सिर काटकर ले आए, देखें VIDEO

सीकर। मिलिए इनसे। ये हैं शौर्य चक्र विजेता मुन्नालाल मुंडेल। भारतीय सेना में रहे वो बहादुर जवान जो एके-47 की 30 गोलियां लगने के बावजूद अदम्य साहस का परिचय देते रहे और पाकिस्तानी फौज के 16 जवानों के सिर कलम करके भारत में ले आए थे। वीरता की यह कहानी 18 साल पुरानी है। साल 2003 में पाक ने नापाक हरकत की थी। चार भारतीय जवानों को शहीद कर दिया था। तब मुन्नालाल मुंडेल और उनके साथियों ने 4 के बदले पाकिस्तान के 16 जवान मार गिराए थे।

मुन्नालाल मुंडेल का इंटरव्यू

मुन्नालाल मुंडेल का इंटरव्यू

आज हम मुन्नालाल मुंडेल की बहादुरी का जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इनके इंटरव्यू का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल, हाल ही मुन्नालाल मुंडेल अपने बेटे का NEET पीसीपी कोचिंग में दाखिला करवाने के लिए सीकर के प्रिंस एजुकेशन हब में आए थे। तब प्रिंस एजुकेशन हब के निदेशक जोगेंद्र सुंडा ने मुन्नालाल मुंडेल का इंटरव्यू लिया और वीडियो 21 जनवरी को प्रिंस एजुकेशन हब सीकर के फेसबुक पेज पर अपलोड किया है।

क्या हुआ था 11 अगस्त 2003 को

क्या हुआ था 11 अगस्त 2003 को

निदेशक जोगेंद्र सुंडा से बातचीत में मुन्नालाल मुंडेल बताते हैं कि 11 अगस्त 2003 को जम्मू कश्मीर के नौसेरा सेक्टर में भारतीय सेना के चार जवान पेट्रोलिंग पर निकले थे। उस दौरान पहले से घात लगाकर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया और उसमें चारों जवान शहीद हो गए। साथियों के शहीद हो जाने के बाद भारतीय सेना के जवानों का खून खौल उठा था। पूरी प्लानिंग करके एक माह बाद 18 सितम्बर 2003 को पाकिस्तान पर हमला किया।

 18 सितम्बर को ऐसे लिया बदला

18 सितम्बर को ऐसे लिया बदला

भारतीय सेना ने चार जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए जाट रेजीमेंट के 12 जवानों की टीम बनाई गई, जिसकी कमान हवलदार मुन्नालाल मुंडेल के हाथ में थी। इन 12 जवानों की टीम ने पाकिस्तान की हरदेव पोस्ट पर हमला कर उसे तबाह कर दिया था। वहां तैनात 16 पाकिस्तानी रेंजर्स को मौत के घाट उतार दिया। उनके सिर कलम करके ले आए थे। इस हमले में मुन्नालाल मुंडेल के पैरों में AK-47 की 30 गोलियां लगीं। दोनों पैर छलनी हो गए थे। फिर भी मुंडेल लड़ते रहे और अकेले ने पाकिस्तान के 8 फौजियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन में मुंडेल के साथ राजस्थान के सिपाही गोपाल डूडी फलौदी, सुरेन्द्र बुरड़क सीकर, सुरेन्द्र धतरवाल झुंझनूं और सुरेन्द्र बेनिवाल सादुलपुर भी थे।

आठ माह तक नहीं देखी सूरज की किरणें

मुन्नालाल मुंडेल कहते हैं कि 30 गोलियां लगने के बाद उनके पैर बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। इन्हें जम्मू कश्मीर के उधमपुर स्थित अस्पताल में ले जाया गया, जहां एक विशेष रूम में इनका आठ माह तक इलाज चला। इन आठ माह में मुंडेल ने कभी सूरज की किरणें तक नहीं देखी। फिर घर पर एक माह आराम करने के बाद 6 माह और इलाज करवाया। फिलहाल मुंडेल पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।

 वर्षों पुरानी यादें हुईं ताजा

वर्षों पुरानी यादें हुईं ताजा

सीकर के प्रिंस एजुकेशन हब में मुन्नालाल मुंडेल की मुलाकात राजस्थान के ही फौजी कुंभाराम से हुई। इत्तेफाक से कुंभाराम वर्ष 2003 की उस वीरता की कहानी के साक्षी रहे हैं। दरअसल, कुंभाराम भी उस वक्त मुन्नालाल की पड़ोस की बटालियन में तैनात थे। कुंभाराम बताते हैं कि उस वक्त मुन्नालाल की बहादुरी के चर्चे पूरी बटालियन किया करती थी। आज वर्षों बाद इनमें मिलकर पाकिस्तान को सबक सिखाने की वो यादें ताजा हो गईं।

 मुन्नालाल मुंडेल की जीवनी

मुन्नालाल मुंडेल की जीवनी

बता दें कि मुन्नालाल मुंडेल का जन्म 7 जुलाई 1968 को राजस्थान के नागौर जिले की मारवाड़ मूंडवा तहसील में दुलाराम मुंडेल व चुका देवी के घर हुआ। इनकी शादी जनाणा गांव में कमलादेवी के साथ हुई। मुन्नालाल के दो बेटे हरदीप व रणजीत हैं। शुरुआती शिक्षा गांव संस्कृत से हुई। मुन्नालाल 1987 में भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए। राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर आदि जगहों पर तैनात रहे। 4 सैनिकों के बदले 16 सैनिकों के सिर कलम करके लाने वाले मुन्नालाल को शौर्य चक्र से नवाजा गया। 26 साल की सेवा पूर्ण करके ये 28 फरवरी 2014 को रिटायर हो गए।

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