बेटे की वापसी के लिए 65 वर्षीय मां हर साल ला रही कांवड़, जानिए बेबस मां की पीड़ा
सीकर। इन दिनों देशभर में कांवड़ यात्रा की धूम है। उत्तराखंड के हरिद्वार से लेकर शेखावाटी के लोहार्गल धाम के रास्ते कांवड़ियों से अटे पड़े हैं। पग-पग पर बाबा भोले के भक्त नजर आ रहे हैं। कोई परिवार में सुख समृद्धि तो कोई भगवान शिव के प्रति आस्था प्रकट करने के मकसद से कांवड़ ला रहा है।

राजस्थान में सीकर-झुंझुनूं की जिले की सीमा पर बसे लोहार्गल धाम में भी हजारों लोग कांवड़ यात्रा पर हैं। इनमें सीकर जिले के खंडेला के गोकुल का बास ग्राम पंचायत के गांव छारा निवासी महिला श्रवणी देवी पत्नी झाबरमल वर्मा भी शामिल है। 65 वर्षीय श्रवणी हर बार श्रावण मास में कांवड़ लाती है।
परिवार की खुशहाली के लिए श्रवणी देवी का कांवड़ लाने का सिलसिला पिछले 11 साल से सिलसिला जारी है, मगर चार साल पहले श्रावणी का बेटा गिरधारी लापता हो गया। अब कांवड़ लाने का मकसद बस बेटे की सकुशल वापसी है। श्रवणी देवी बताती हैं कि इस बार पोते-पोतियों को साथ ले जाकर लोहार्गल से कांवड़ लाकर सोमवार को भगवान भोले को चढ़ाई है।
पांच बेटे हैं, जिनमें से एक बेटे की मृत्यु हो गई तथा एक बेटा पिछले चार वर्ष पूर्व घर से काम पर जाने की कहकर निकला था, लेकिन आज तक नहीं लौटा। गुमशुदा बेटे की पत्नी सहित एक लडक़ा व एक लडक़ी है, जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी इस वृद्ध दंपति पर ही है। अब तक लोहार्गल के अलावा गणेश्वर, टपकेश्वर, नागकुंड, शोभावती आदि धार्मिक स्थानों से कांवड़ ला चुकी श्रवणी देवी ने कहा कि उसे भगवान शिव पर पूरा भरोसा है। वो एक दिन उसके बेटे की जरूर सकुशल घर वापसी करवाएंगे।












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