Pm Dimand News: मिशन हम ब्रह्माणी संगठन ने देश में प्रधानमंत्री को लेकर उठाई यह बड़ी मांग

Rajasthan News: अब पिंक सिटी जयपुर से देश में महिला को प्रधानमंत्री बनाने की आवाज गूंज रही है। आज मिशन हम ब्रह्माणी संगठन की महिलाओं ने यह आवाज उठाई।

वैसे से देश की सियासत का केंद्र अक्सर उत्तर प्रदेश ही रहा है। आज भी जब भी चुनाव होते है तो सबसे पहले उत्तर प्रदेश की सियासत और नेताओं का ही जिक्र होता है।

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राजस्थान में तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बड़े राजनैतिक दल सिर्फ राज्यसभा चुनावों में ज्यादा सक्रिय रहते है। हालांकि लोकसभा चुनावों में अब देश के बड़े नेता मोदी से लेकर राहूल तक हर किसी का चहेता प्रदेश राजस्थान ही बना हुआ है।

एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से राजस्थान के ताबड़तोड़ दौरे और रोड शो किए है तो दूसरी ओर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से लेकर न्याय यात्रा और अब लोकसभा से पहले राज्यसभा में सोनिया गांधी की एंट्री ने राजस्थान को सियासत का पॉवर सेंटर बना दिया।

"मिशन हम ब्रह्माणी (गृहणी)" संगठन ने आज दोनों बड़ी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस से मांग करते हुए कहा कि भारत देश के परिवार, संस्कार, सनातन धर्म को बचाने के लिए 40 साल बाद भारत को फिर से महिला प्रधानमंत्री दिया जाए और यह घोषणा लोकसभा चुनावों से पन्द्रह दिनों पहले की जाए।

नहीं तो हम ब्रह्माणी पूरे देश में कठोर कदम उठाने की घोषणा करके इसका प्रचार-प्रसार करेंगी। जिन्होंने शुक्रवार को राजधानी स्थित यूथ हॉस्टल में प्रेसवार्ता कर पत्रकारों के समक्ष अपनी पीड़ा उजागर की।

संगठन की महिलाओं ने कहा कि लोकतंत्र में पार्टियाँ ही पब्लिक की प्रतिनिधी होती हैं और हम सभी गृहणियां उस पार्टी को ही वोट देती हैं लेकिन जैसे ही चुनाव हो जाने के बाद सरकारें बनती हैं, वैसे ही पार्टियाँ अपने वोटर को सरकार का चारा बनाकर हट जाती हैं।

गृहणी महिलाओं ने कहा कि हम कहीं की भी सरकार के ना तो समर्थन में है और ना ही विरोध में है। हम तो अपनी मन की पीड़ा दोनों बड़ी पार्टियों तक पहुँचाना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियाँ याद करें कि लोकतंत्र में सरकार एक सजीव संस्था हुआ करती थी, जो दुखी के मन की पीड़ा बिना कहे सुनती और समझती थी।

आज की सरकारें यांत्रिक हो गई हैं, जो साथ दिखाई तो देती हैं लेकिन साथ नहीं चलती। हम ब्रह्माणी न राजनीति, न समाज नीति केवल परिवार नीति का संकल्प लेते हुए दोनों पार्टियों तक अपनी पीड़ाएँ पहुंचाकर अपनी मांग "क्रोध नहीं विरोध नहीं" आदर्श पर रखती हैं।

दोनों बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों से महिलाओं ने मांग की है कि लोकसभा चुनावों में किसी भी गेरूआ वस्त्रधारी को कहीं से भी टिकट नहीं दिया जाए। वर्ष 1950 से आज तक जाति आरक्षण वालों की प्रत्येक बात मानी गई है लेकिन विगत लगभग 32 वर्षों की मांग के बाद जो 33 प्रतिशत महिला आरक्षण दिया गया है, उसे भी दस साल तक रोक दिया गया है।

सभी पार्टियों द्वारा संसद में यह करके देश की 50 करोड़ ब्रह्माणी का अपमान किया गया है। जबकि जनता पार्टियों को वोट देती हैं फिर पार्टियाँ सरकार बनाती हैं और सरकारे सिस्टम को सेठों की दहलीज पर गिरवी रख रही हैं। इस तरह लोक कल्याणकारी सरकारें, लोक कष्टकारी बनती जा रही हैं।

धर्म अब व्यवसाय होता जा रहा है और धार्मिक स्थल पर्यटन केन्द्र बन रहे हैं। जनता को व्यवस्था देने की बजाय अदालतों में धकेला जा रहा है।

इनके अलावा भी बहुत कुछ है, जो हम ब्रह्माणी को आहत और दुखी करता है। प्रेसवार्ता के दौरान मधु शर्मा, नीलम शर्मा, मंजू शर्मा, सुषमा शर्मा, पूर्वी साईवाल व नमिता अग्रवाल सहित अन्य माहिलाएं उपस्थित रहीं।

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