Republic Day 2019 : मुस्लिम बाहुल्य गांव धनूरी के घर-घर में हैं फौजी, 17 बेटों ने दी है शहादत
Dhanuri News , धनूरी। किसी को मुसलमानों की देशभक्ति का सबूत चाहिए तो राजस्थान के गांव धनूरी चले आईए। यहां के घर-घर में फौजी और कण-कण में देश के लिए मर मिटने का जब्जा दिखाई देगा। देशभक्ति के मामले में मुस्लिम बाहुल्य यह गांव धनूरी धन्य है।

आज हम धनूरी का जिक्र इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इस समय पूरा देश गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019 ) मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के उपलब्ध में शनिवार को देशभर में 70वां गणतंत्र दिवस (70th republic day) समारोह मनाया जाएगा। आईए गणतंत्र दिवस 2019 के मौके पर जानते हैं सर्वाधिक फौजी और शहीद देने वाले गांव धनूरी (Dhanuri Village) के बारे में।
राजस्थान के झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव धनूरी मलसीसर उपखण्ड में आता है। यहां सर्वाधिक परिवार कायमखानी मुस्लिमों के हैं। पूरे गांव की आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है। इस गांव को आदर्श सैनिक गांव और फौजियों की खान के नाम से भी जाना जाता है।

300 फौजी कर रहे देश की रक्षा
धनूरी सरपंच प्रतिनिधि मोहम्मद इदरीश बताते हैं कि मुझे गर्व है कि मैं ऐसे गांव से हूं जिसका नाम लेने भर से देशभक्ति का जज्बा पैदा होता है। अकेले धनूरी गांव ने देश को 600 फौजी दिए हैं। जिनमें से 300 वर्तमान में देश की रक्षा के लिए विभिन्न जगहों पर तैनात हैं और 300 रिटायर्ड हो चुके हैं। अधिकांश फौजी मुस्लिम समुदाय से हैं। सबसे खास बात यह है कि कई परिवार तो ऐसे हैं, जिसकी चार-चार पीढ़ियां सेना में भर्ती होने की परम्परा को निभा रही हैं।

धनूरी के बेटों ने हर युद्ध में दी शहादत
राजस्थान के गांव धनूरी के बेटे देश की रक्षा के लिए मर मिटने में सबसे आगे हैं। प्रथम व दूसरे विश्व युद्ध से लेकर भारत-चीन युद्ध 1962, भारत-पाक युद्ध 1965, 1971 व 1999 के करगिल युद्ध तक में यहां के 17 बेटों ने देश के लिए शहादत दी है। शहीद मेजर महमूद हसन खां के नाम पर स्कूल का नामांकरण भी किया हुआ है।

ये हो चुके हैं शहीद
धनूरी के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक हमीद खान की मानें तो यहां के मोहम्मद इलियास खां, मोहम्मद सफी खां, निजामुद्दीन खां, मेजर महमूद हसन खां, जाफर अली खां, कुतबुद्दीन खां, मोहम्मद रमजान खां, करीम बख्स खां, करीम खां, अजीमुद्दीन खां, ताज मोहम्मद खां, इमाम अली खां, मालाराम बलौदा आदि वीरगति को प्राप्त हुए हैं।












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