मनोहर राजपुरोहित : 3 बहनों का इकलौता भाई 4 साल से रहस्यमयी ढंग से लापता, 25 लाख की फिरौती के 8 पत्र
पाली। दरवाजे पर हल्की सी भी आहट होती है तो परिजनों की आंखों की पुतलियां चौड़ी हो जाती हैं। इस उम्मीद में कि बेटा मनोहर आया होगा या फिर कोई उसकी खैर खबर लाया होगा, मगर थोड़ी देर बाद ही यहां उम्मीद टूट जाती है। सन्नाटा पसर जाता है। आंसू बह निकलते हैं और आंखें अपने 'लाल' की याद में फिर पथरा जाती हैं।

यह पीड़ा है राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर उपखंड का गांव नेतरा के प्रकाशसिंह राजपुरोहित के परिवार की। इस परिवार को अपने 16 वर्षीय बेटे मनोहर राजपुरोहित का इंतजार है। लापता हुए चार साल बीत गए, मगर मनोहर का कोई सुराग नहीं। उसके अपहरण के बाद उसके साथ किसी अनहोनी की आशंका है।

रुपए के लिए किया गया मनोहर का अपहरण
गांव नेतरा के प्रकाश सिंह राजपुरोहित के बेटे मनोहर का अपहरण किसने किया? इसका भी पता नहीं लग पा रहा, मगर आशंका है कि रुपए के लिए उसका अपहरण किया गया है, क्योंकि अपहरण के बाद से परिजनों को 8 पत्र मिल चुके हैं, जिनमें 25 लाख की फिरौती की मांग की जा रही है।

23 नवंबर 2016 को फालना गया, फिर नहीं लौटा मनोहर
मनोहर के पिता प्रकाश बताते हैं कि उनका बेटा रहस्यमयी ढंग से लापता हुआ था। वह पाली के की फालना कस्बे के एक निजी स्कूल में कक्षा बारहवीं में पढ़ता था। प्रतिदिन की तरह वह 23 नवंबर 2016 को बस से फालना गया था, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिवार की चिंता बढ़ी। स्कूल प्रबंधन से जानकारी लेने पर बताया कि वह तो स्कूल से घर के लिए निकल गया था। इसके बाद 5 से 17 दिसंबर 2016 के बीच कभी उसके घर के बाहर तो कभी स्कूल के पते पर फिरौती के पत्र पहुंचने शुरू हुए। लगभग आठ बार फिरौती के पत्र मिले।

पैसे लेकर कभी जोधपुर, कभी फालना बुलाया
महज 12 दिन में ही 25 लाख की फिरौती के आठ पत्र भेजकर कभी जोधपुर तो कभी फालना बुलाया। परिजनों ने रुपयों की व्यवस्था की और जोधपुर व फालना में बताए गए पते पर पहुंचे, मगर वहां कभी कोई नहीं मिला। विशेष बात यह है कि सभी पत्र किसी स्थानीय वाहक के माध्यम से गुप्त तरीके से चुपचाप घर के बाहर पत्थरों के बीच डालकर चला जाता। सीधे डाक से अथवा कोरियर से एक भी पत्र नहीं भेजा गया। फोन से फिरौती नहीं मांगी गई।

हर राखी पर बहनों की आंखें तरसती हैं
मनोहर के तीन बहनें प्रेमलता, रेणूका व कंचन हैं। हर साल अपने एकलौते भाई की कलाई पर राखी बांधकर मनचाहा उपहार लेने वाली बहनें अब बेबस हैं। राखी के दिन अपनी माता मंजूदेवी के पास बैठकर दिनभर मनोहर की फोटो देखकर आंसू बहाती हैं। बहनों ने बताया कि हमारा भाई जिस भी स्थिति में हैं हमें मिल जाए तो मन को सुकून मिल जाए।

पुलिस चार साल से खाली हाथ
आईपीएस राहुल कोटोकी बताते हैं कि मेरे पाली में एसपी रहते हुए लापता मनोहर की तलाश के काफी प्रयास किए गए। मनोहर 2016 में लापता हुआ था। अपहरण की बात सामने आई थी, मगर अभी तक स्पष्ट तौर पर यह पता नहीं चल पाया कि उसके साथ क्या, कैसे और क्यों हुआ। फिरौती के पत्रों की भी जांच करवाई थी। नार्को टेस्ट भी करवाया, अभी तक मनोहर का गायब होना पहेली बना हुआ है।

राजस्थान विधानसभा में भी उठा मामला
मनोहर अपहरण मामले को लेकर सुमेरपुर विधायक जोराराम कुमावत ने दो बार व आहोर विधायक छगनसिंह राजपुरोहित ने एक बार राजस्थान विधानसभा में मामला उठाया था। छत्तीस कौम के लोगों के प्रदर्शन के बाद सरकार ने मामले की जांच सीआईडीसीबी को सौंपी थी, लेकिन उसके भी हाथ खाली रहे।

सीएम से पीएम तक लगाई गुहार
अब मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग को लेकर केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, गजेन्द्रसिंह शेखावत से लेकर भाजपा-कांग्रेस के लगभग एक सौ से अधिक विधायकों, प्रधानों व राजनीतिक दलों के प्रमुखों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। अब विप्र समाज समेत छत्तीस कौम इस मामले को लेकर सीबीआई जांच करवाने के लिए आगे आ रहे हैं। माता मंजूदेवी के साथ तीनों बेटियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी मार्मिक पत्र भेजकर अपने इकलौते भाई को ढुंढवाने के लिए सीबीआई जांच करवाने की मांग की है।












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