Lokendra Singh Kalvi Profile: लोकेंद्र सिंह कालवी ने कभी नहीं किया सिद्दांतों से समझौता, पढ़ें सफरनामा

करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी का सोमवार देर रात 2 बजे दिल का दौरा पड़ने से राजस्थान के जयपुर के अस्पताल में निधन हो गया।

 Lokendra Singh Kalvi Profile:

Lokendra Singh Kalvi Profile: करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी का सोमवार देर रात हार्ट अटैक से निधन हो गया है। अपने तीखे तेवरों और सुर्ख बयानों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले कालवी का जन्म नागौर जिले के कालवी गांव में हुआ था। वो हमेशा कहा करते थे कि इंसान वो ही सफल है, जो कि अपने जमीनी मूल्यों को नहीं भूलता है। उनकी पढ़ाई अजमेर के मेयो कॉलेज से हुई थी, जहां राजघरानों के बच्चे पढ़ा करते थे। उनके पिता कल्याण सिंह कालवी चंद्रशेखर आजाद सरकार में मंत्री थे, इसलिए उन्हें बेबाकी अंदाज का गुण अपने पिता से ही मिला था।

साल 2006 में राजपूत करणी सेना की स्थापना

उनके पिता पीएम चंद्रशेखर आजाद के काफी क्लोज थे इसलिए उनके अकस्मात मृत्यु पर उन्होंने लोकेंद्र सिंह को काफी तवज्जो भी दी। हालांकि स्वतंत्र विचारों वाले कालवी ने अपने आप को कभी भी सियासत के जंजीरों में बांधा नहीं। उन्होंने जाति आधारित आरक्षण का जमकर विरोध किया, उन्होंने यंग राजपूतों को एक मंच पर लाने के लिए पुरजोर कोशिश की और इसी वजह से उन्होंने साल 2006 में राजपूत करणी सेना की स्थापना की थी। कालवी बहुत अच्छे वक्ता रहे, उनकी अंग्रेजी और हिंदी पर खासी पकड़ थी। उनके भाषण अक्सर मीडिया में सुर्खिय़ां बन जाते थे। वो खेलकूद में भी काफी रूचि रखते थे, वो अच्छे बॉस्केटबॉल खिलाड़ी भी थे।

सियासी सफल लंबा नहीं रहा

उन्होंने 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ज्वाइन की थी लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली थी, वो कुछ दिनों तक राज्य और केंद्र में मंत्री भी रहे लेकिन उन्हें सियासत में आशातीत सफलता नहीं मिली। वो बाड़मेर-जैसलमेर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे लेकिन उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई थी।

हमेशा राजपूतों के हित में काम करने की कोशिश की

अपने नैतिक मूल्यों को आपनी जान बताने वाले कालवी ने हमेशा राजपूतों के हित में काम करने की कोशिश की और इसी वजह से ही उनकी सेना ने दो बार देश में काफी हंगामा भी किया था, जिसकी वजह से वो लाइमलाइट में भी आ गई थी। पहला हंगामा साल 2008 में फिल्म मेकर आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'जोधा अकबर' के विरोध में हुआ था तो दूसरा हंगामा देश में 2018 में तब हुआ था, जब संजय लीला भंसाली अपनी फिल्म पद्यमावती लेकर आए थे। करणी सेना का कहना था कि जिस भी फिल्म और शो में राजपूतों की गरिमा को नष्ट करने की बात होगी, वो उसका डटकर विरोध करेंगे।

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