लक्ष्‍मी मेघवाल : दलित समुदाय से बाड़मेर की पहली सब इंस्‍पेक्‍टर, पासिंग आउट परेड के बाद पहली बार आई घर

बाड़मेर, 10 सितम्‍बर। ये कहानी है लक्ष्‍मी मेघवाल की। लक्ष्‍मी राजस्‍थान पुलिस में उप निरीक्षक बन गई हैं। सोशल मीडिया में दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि लक्ष्‍मी अपने जिले से सब इंस्‍पेक्‍टर बनने वाली पहली दलित महिला है। एसआई बनकर लक्ष्‍मी पहली बार अपने घर पहुंची तो इसके स्‍वागत में लोगों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। लक्ष्‍मी ने भी अपनी पिक केप सम्‍मान में माता धापूदेवी व पिता रायचंदराम के सिर पर रख दी।

बेटी के सब इंस्‍पेक्‍टर बनने पर मां धापू देवी खुशी से फूले नहीं समा रही

बेटी के सब इंस्‍पेक्‍टर बनने पर मां धापू देवी खुशी से फूले नहीं समा रही

बता दें क‍ि लक्ष्‍मी मेघवाल मूलरूप से गुडामालानी इलाके के गांव पंचायत मंगले की बेरी की छोटी सी ढाणी मेघवालों की रहने वाली है। बेटी के सब इंस्‍पेक्‍टर बनने पर मां धापू देवी खुशी से फूले नहीं समा रही। मीडिया से बाचतीत में धापू देवी कहती है कि लक्ष्मी अब थानेदार बन गई है तो उन्होंने तपाक से कहा-छोरी ई थानेदार कै? धापू देवी को तो यह भी पता नहीं कि थानेदार क्‍या होता है?

जयपुर में प्रशिक्षण पूरा हुआ

जयपुर में प्रशिक्षण पूरा हुआ

बता दें कि हाल ही राजस्‍थान पुलिस अकादमी जयपुर में प्रशिक्षण पूरा हुआ है। पासिंग आउट परेड के बाद लक्ष्‍मी मेघवाल पहली बार खाकी में अपने घर पहुंची है। बीए व एमए करने के बाद ही लक्ष्‍मी ने पुलिस अफसर बनने की ठान ली थी और आज सफल भी होकर दिखा दिया।

लक्ष्‍मी मेघवाल ने अपनी सक्‍सेस स्‍टोर बयां की

लक्ष्‍मी मेघवाल ने अपनी सक्‍सेस स्‍टोर बयां की

मीडिया से बातचीत में लक्ष्‍मी मेघवाल ने अपनी सक्‍सेस स्‍टोर बयां की। उन्‍होंने बताया कि शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्‍कूल से पूरी की। फिर पांच किलोमीटर दूर स्थित राजकीय माध्‍यमिक विद्यालय छोटू में पढ़ी। कहते हैं कि लक्ष्‍मी के स्‍कूली दिनों में उनके घर रोशनी नहीं थी। वह लालटेन की रोशनी में ही पढ़ाई किया करती थी। माता पिता खेत में काम करते हैं।

10वीं कक्षा 65 प्रतिशत अंकों से पास की

10वीं कक्षा 65 प्रतिशत अंकों से पास की

लक्ष्‍मी ने बताया कि उसने 10वीं कक्षा 65 प्रतिशत अंकों से पास की। इसके बाद गांव के नजदीक कोई सीनियर सैकंडरी स्‍कूल नहीं होने के कारण उसने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। दो साल बिना पढ़ाई के गुजारे। फिर बड़े भाई मुकेश की प्रेरणा से उसने 12वीं कक्षा स्‍वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में की। बारहवीं पास करने के बाद वर्ष 2011 में लक्ष्मी कांस्टेबल बन गई थी। अब एसआई बनी है।

दो भाइयों की इकलौती बहन

दो भाइयों की इकलौती बहन


लक्ष्‍मी मेघवाल को लक्ष्‍मी गढ़वीर के नाम से भी जाना जाता है। ये कहती हैं कि दो भाइयों की इकलौती बहन हूं। भाइयों ने मेरी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। माता-पिता ने हमेशा आशीर्वाद दिया। पढ़ाई करने वाली बहनों से कहना चाहती हूं कि वह मेहनत करती रहे, सफलता जरूर मिलेगी। बस मेहनत करना कभी नहीं छोड़ें।

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