Rajasthan News: लाल डायरी वाले नेता राजेंद्र गुढ़ा फिर आ गए सुर्खियों में, सियासी गलियारों में फिर चर्चाएं
Rajasthan News: राजस्थान की सियासत में लाल डायरी से सियासी हलचल मचाने वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा एक बार फिर सुर्खियों में है। विधानसभा उपचुनावों में राजेंद्र गुढ़ा ने चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।
दरअसल झुंझुनूं विधानसभा उपचुनाव की तैयारी कर रहे राजेंद्र सिंह गुढ़ा फिर से पाला बदलने जा रहे हैं। गुढ़ा ने साफ कर दिया है कि वो शिवसेना के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे।

गुढ़ा ने यह भी कहा है कि साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुस्लिमीन AIMIM के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी को अपना दोस्त बताया है। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा है कि वो AIMIM के टिकट पर झुंझुनूं विधानसभा में उपचुनाव लड़ सकते है।
गहलोत सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा इन दिनों झुंझुनूं विधानसभा से उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे है। झुंझुनूं में मीडिया से चर्चा के दौरान राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि वो शिवसेना से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी मेरे मित्र है। हम आपस में मिलते है। मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं।
सियासी गलियारों में क्या हो रही चर्चा ?
राजेंद्र गुढ़ा के बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा है कि वो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुस्लिमीन ज्वॉइन कर सकते है। साथ ही वो झुंझुनूं से AIMIM के टिकट पर उपचुनाव लड़ सकते है। खास बात यu है कि लोजपा, बसपा और कांग्रेस के बाद राजेंद्र गुढ़ा शिवसेना से नाता तोड़ने जा रहे हैं।
बता दें कि राजेंद्र गुढ़ा ने पिछले साल विधानसभा में लाल डायरी दिखाकर गहलोत सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। जिस पर उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त किया गया था।
इसके बाद राजेंद्र गुढ़ा ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना का दामन थाम लिया था। लेकिन अब उनके बयान से ऐसा लग रहा है कि नेताजी का मात्र सात महीने में ही शिवसेना से मोहभंग हो गया है।
अब तक ऐसा रहा राजेंद्र गुढ़ा का सियासी सफर?
झुंझुनूं जिले में 19 जुलाई 1968 को जन्मे राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने साल 2008 में अपना सियासी सफर शुरू किया था। उन्होंने पहली बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
लेकिन चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के साथ चले गए थे। साल 2013 में गुढ़ा ने कांग्रेस के टिकट पर उदयपुरवाटी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन वो हार गए थे।
इस कारण उन्हें साल 2018 में कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया और वो वापस बसपा में शामिल हो गए थे। हालांकि, चुनाव जीतते ही वापस कांग्रेस का हाथ थाम लिया था।
राजेंद्र गुढ़ा गहलोत राज में दो बार मंत्री भी रह चुके है। पिछले साल लाल डायरी पर मचे सियासी घमासान के बाद उन्हें कांग्रेस छोड़नी पड़ी थी और शिवसेना का दाम थाम लिया था।
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। गुढ़ा अब झुंझुनूं विधानसभा उपचुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
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