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Kailash Choudhary : बच्चों को ट्रेन में भरकर CM के पास ले गए और स्वीकृत करा लाए सरकारी कॉलेज

By दुर्गसिंह राजपुरोहित
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Barmer news in Hindi, बाड़मेर। दूर-दूर तक रेत का समंदर। बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद करती जिंदगानी और चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा। ये तीनों चीज एक साथ दिखे तो समझ जाना आप राजस्थान के सीमावर्ती इलाके बाड़मेर में हैं।

Kailash Choudhary

वन इंडिया की 'जानिए अपना सांसद' सीरीज में आज बात देश के सबसे बड़े संसदीय क्षेत्रों में से बाड़मेर लोकसभा की। बाड़मेर जिले की 7 और जैसलमेर जिले की एक विधानसभा सीट को मिलाकर बनाए गए बाड़मेर संसदीय क्षेत्र से कैलाश चौधरी सांसद हैं। इनका मोदी सरकार में मंत्री बनना लगभग तय है। कैलाश चौधरी लोकसभा चुनाव 2019 में जीतकर पहली बार संसद पहुंचे हैं, मगर बाड़मेर की जनता को इन्होंने नेतृत्व क्षमता का परिचय महज 17 साल की उम्र में ही दे दिया था।

जब 11 दिन में स्वीकृत हुआ कॉलेज

जब 11 दिन में स्वीकृत हुआ कॉलेज

बात 1990 की है। बाड़मेर के बालोतरा कस्बे में विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी समस्या सरकारी कॉलेज नहीं होना था। कॉलेज के अभाव में अधिकांश विद्यार्थी स्कूल के बाद की पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थे। चुनिंदा विद्यार्थी ही कॉलेज शिक्षा के लिए पड़ोसी जिलों में जा पाते थे।

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बताते हैं कि उस समय 12 कक्षा में अध्ययनरत कैलाश चौधरी बालोतरा के 40-50 बच्चों को लेकर ट्रेन से जयपुर तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के पास पहुंच और सरकारी कॉलेज खुलवाने की मांग पर अड़ गए। भैरोंसिंह सिंह शेखावत ने उस समय इन्हें आश्वसन देकर भेज दिया। एक बारगी तो सबको लगा कि कैलाश चौधरी बच्चों को बेवजह ही जयपुर ले गया। हुआ कुछ भी नहीं, महज 11 दिन बाद ही सरकार ने बालोतरा के सरकारी कॉलेज पास कर दी, जो वर्तमान में मूलचंद भगवानदास रंगवाला गवर्नमेंट पीजी कॉलेज के नाम से जानी जाती है।

किसान परिवार में जन्मे कैलाश चौधरी

किसान परिवार में जन्मे कैलाश चौधरी

( Kailash Choudhary Barmer Profile in Hindi ) बाड़मेर सांसद कैलाश चौधरी मूलरूप से बायतू तहसील के गांव कोसरिया के रहने वाले हैं। 20 सितम्बर 1973 को कोसरिया के तगाराम व चूकी देवी के घर कैलाश चौधरी का जन्म हुआ। रूपा देवी से इनकी शादी हुई। दोनों के दो बेटे हैं। बेटा विजय चौधरी इंजीनियरिंग की है। वहीं छोटा बेटा कार्तिक स्कूल में अध्ययनरत है। खुद कैलाश चौधरी ने अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से एमए और नागपुर विश्वविद्यालय से बीपीएड की डिग्री प्राप्त कर रखी है।

जिला परिषद सदस्य से शुरू हुआ सफर

जिला परिषद सदस्य से शुरू हुआ सफर

कैलाश चौधरी का राजनीतिक कॅरियर शानदार रहा है। शुरुआत जिला परिषद के सदस्य के रूप में हुई। 1 बार बायतू विधानसभा के विधायक रहने के साथ किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष भी हैं। हालाकिं 2 बार विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।

2013 में बने विधायक

2013 में बने विधायक

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा, मगर ये हार गए। हालांकि हार के बावजूद पांच साल तक जनता के बीच रहे और अगले विधानसभा चुनाव 2013 में फिर भाजपा ने टिकट दी। इस बार कैलाश चौधरी ने कांग्रेस के कर्नल सोनाराम को हराया। राजस्थान विधानसभा 2018 में बायतु विधानसभा सीट से कैलाश चौधरी को हार का सामना करना पड़ा।

लोकसभा चुनाव 2019 में कैलाश चौधरी का प्रदर्शन

कैलाश चौधरी बाड़मेर की बायतू तहसील के गांव कोसरिया से संसद तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षभरा रहा है। कई बार हार देखी, मगर कभी हिम्मत नहीं हारी। जनता से हमेशा जुड़ाव रखा। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने दिग्गज नेता व मौजूदा सांसद सोनाराम का टिकट काटकर कैलाश चौधरी को कांग्रेस के दिग्गज नेता मानवेन्द्र सिंह के सामने मैदान में उतारा। KAILASH CHOUDHARY ने 846526 और MANVENDRA SINGH ने 522718 वोट प्राप्त किए। कैलाश चौधरी ने 3 लाख 23 हजार 808 वोटों से जीत हासिल की।

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English summary
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