Khinv Singh Bhati : 3 आतंकियों का एनकाउंटर, 19 को पकड़ा जिंदा, जानिए रियल 'सिंघम' की पूरी स्टोरी

बाड़मेर। महज 25 साल के एसएचओ ने अपनी पहली ही फील्ड पोस्टिंग में कमाल कर दिखाया। आंतकवादियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देकर पुलिस महकमे में बुलंद हौसलों की ऐसी बेमिसाल कहानी लिख डाली, जो 34 साल बाद 15 अगस्त 2019 के स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में एक बार फिर से सुनाई दी।

rajasthan Police

समारोह में राजस्थान के बाड़मेर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) खींवसिंह भाटी को दूसरी बार राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। इस बार विशिष्ट सेवा मेडल मिला है। इससे पहले वर्ष 2005 में राष्ट्रपति से इन्हें सराहनीय सेवा के लिए पदक प्राप्त हुआ था। राजस्थान पुलिस में ऐसी चुनिंदा ही पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें दो बार राष्ट्रपति से यह सम्मान मिला हो। वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में एएसपी खींवसिंह भाटी ने बयां किया एसएचओ के रूप में पहली पोस्टिंग में बतौर एसएचओ 3 आतंकवादियों को मारने और 19 को जिंदा पकड़ने से लेकर बाड़मेर के एएसपी के रूप में कमान संभालने तक का सफर।

शुरुआत बॉर्डर एरिया में पोस्टिंग से

शुरुआत बॉर्डर एरिया में पोस्टिंग से

एएसपी खींवसिंह भाटी बताते हैं कि राजस्थान पुलिस महकमे में प्रशिक्षण के बाद मेरी फील्ड पोस्टिंग श्रीगंगानगर जिले में घड़साना, रावला व अनूपगढ़ में बतौर थानाधिकारी रही। श्रीगंगानगर जिला पंजाब व पाकिस्तान की सीमा से लगता है। बात वर्ष 1985 से 1994 की है जब कि पंजाब में खालिस्तान की मांग ने जोर पकड़ रखा था और पूरे राज्य की सीमाएं सील थी। ऐसे में श्रीगंगानगर से लगती पाक सीमा पार से आतंकियों को प्रशिक्षण देने व उन्हें हथियार मुहैया करवाकर श्रीगंगानगर होते हुए पंजाब में भेजा जा रहा था।

धमकी भरे पत्र भी मिले

धमकी भरे पत्र भी मिले

पुलिस की नौकरी के शुरुआती नौ साल बॉर्डर एरिया में तैनात रहा। उस दौरान आतंकवाद को रोकने की दिशा में खूब ​काम किया। धमकी भरे पत्र और पुलिस की स्पेशल सुरक्षा भी मिली। तब खालिस्तान कमांडो फोर्स के एरिया कमांडर रेशम सिंह ममरोली को पकड़ा और उसकी निशानदेही पर यूपी के तराई एरिया से एके47 समेत हथियारों का जखीरा बरामद किया।

जब आंखों के सामने उड़ गई थी साथी की अंगुली

जब आंखों के सामने उड़ गई थी साथी की अंगुली

बॉर्डर एरिया में तैनाती के दौरान कई बार मौत से आमना-सामना हुआ। एक बार तो जब हम आतंकियों से लोहा ले रहे थे। तीन साथी मारे भी गए। तब एक गोली साथी पुलिसकर्मी के हाथ पर आकर लगी, जिससे उसकी अंगुली कटकर दूर जा गिरी थी। 3 आतंकवादियों का एनकाउंट करने के साथ ही 19 आतंकवादियों को जिंदा पकड़ने के अलावा 7 इंटरनेशनल तस्कर और 5 पाक जासूस भी दबोचे। 26 राइफल, 9 पिस्टल व 14 हजार राउंड, 30 किलो सोना, 103 किलो हेरोइन भी पकड़ी थी।

एएसपी खींवसिंह भाटी का जीवन परिचय

एएसपी खींवसिंह भाटी का जीवन परिचय

एएसपी खींव सिंह भाटी राजस्थान पुलिस में 37 साल की सर्विस पूरी कर चुके हैं। अगस्त 2020 में रिटायर होने वाले हैं। भाटी मूलरूप से बीकानेर जिले की कोलायत तहसील के गांव गिराजसर के रहने वाले हैं। भाटी 7 साल के थे तब इनके पिता किसान कालूसिंह भाटी और वर्ष 2006 में मां राम कुंवर का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद इन्होंने अपनी बुआ के घर पढ़ाई की। फूफा शिवदान सिंह राठौड़ पुलिस में थे। उन्हीं से भाटी को पुलिस सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। बीकानेर के डूंगर के कॉलेज से पढ़ाई की। लॉ की पढ़ाई के दौरान महज 22 साल की उम्र में भाटी का पहले ही प्रयास में वर्ष 1982 में राजस्थान पुलिस सेवा में चयन हो गया। भाटी के बड़े भाई भीम सिंह भाटी हैं। इनकी एक बहन भी है।

बेटी दुबई व अमेरिका में रह रहीं

बेटी दुबई व अमेरिका में रह रहीं

बड़ी बेटी भाग्यश्री भाटी व दामाद एप्पल में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में बतौर इंजीनियर कार्यरत हैं। दूसरी बेटी रागिनी व दामाद दुबई में कार्यरत हैं। बेटे फतेहराज सिंह भाटी ने बंगलौर से बीटेक कर रखा है। फिलहाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रपति पुलिस पदक के अलावा भाटी को राजस्थान सरकार व पुलिस मुखिया की ओर से 250 से अधिक बार प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। पुलिस सेवा में बेहतर कार्य, कौशल, कर्तव्य निष्ठा पर उत्तम, अति उत्तम व सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भी मिले हैं।

जानिए कैसे मिलता है राष्ट्रपति पुलिस पदक

जानिए कैसे मिलता है राष्ट्रपति पुलिस पदक


किसी पुलिसकर्मी को राष्ट्रपति से दो बाद पदक मिल सकता है। पहली बार सराहनीय सेवा और दूसरी व अंतिम बार विशिष्ट सेवाओं के लिए। भाटी ने दोनों पदक प्राप्त किए हैं। बाड़मेर एएसपी भाटी के अनुसार पुलिस मुख्यालय में तीन एडीजी, एक डीजी व एक सचिव स्तर के पांच अधिकारियों की कमेटी राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए पूरी प्रदेश के पुलिसकर्मियों में से चयन करती है। फिर उसे राजस्थान सरकार के जरिए केन्द्र सरकार को भेजा जाता है। ​जहां से गृह मंत्रालय के आदेश पर पुलिस अधिकारियों का बोर्ड आवेदक की उपलब्धियां, बेदाग छवि आदि के आधार पर नाम फाइनल करता है। फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद प्रमाण पत्र राज्य सरकार के पास आता है, जिसे आगामी राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री व राज्यपाल के हाथों संबंधित पुलिसकर्मी को प्रदान किया जाता है।

बाड़मेर पहुंचने पर हुआ भाटी का स्वागत

बाड़मेर पहुंचने पर हुआ भाटी का स्वागत

स्वतंत्रता दिवस 2019 के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हाथों राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित होकर बाड़मेर लौटे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह भाटी पुलिसकर्मियों व बाड़मेर की जनता ने स्वागत किया। इस मौके पर बाड़मेर जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता, एसपी शिवराज मीणा, डीएसपी विजयसिंह, एससी-एसटी सेल डिप्टी मानाराम गर्ग, सदर थानाधिकारी किशनलाल, ग्रामीण पुलिस थानाधिकारी दीपसिंह आदि भी मौजूद रहे।

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