Jaisalmer Blackout Drill:सायरन गूंजते ही अंधेरे में डूब जाएगी स्वर्ण नगरी जैसलमेर,क्यों होने वाला है ब्लैकआउट?
Jaisalmer Blackout Drill: राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में शुक्रवार, 24 अप्रैल का दिन आम दिनों से बिल्कुल अलग रहेगा। स्वर्ण नगरी की गलियां, बाजार और घर-सब कुछ एक तय वक्त पर अंधेरे में डूब जाएंगे। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित यह 'मॉक ड्रिल' और 'ब्लैकआउट' अभ्यास उस वक्त हो रहा है, जब 'ऑपरेशन सिंदूर' के सफल आयोजन को पूरे 11 महीने बीत चुके हैं।
यह अभ्यास किसी वास्तविक खतरे की आहट नहीं, बल्कि आपातकालीन हालात में जिले की सुरक्षा व्यवस्था, नागरिक अनुशासन और प्रशासनिक तंत्र की ताकत को परखने की एक सुनियोजित कोशिश है। जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल की अगुवाई में यह पूरा अभ्यास बेहद व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जाएगा, जिसमें आम नागरिकों से लेकर युवा वॉलिंटियर तक सभी की भूमिका तय की गई है।

सायरन बजते ही हो जाएं तैयार
इस पूरे ब्लैकआउट अभ्यास की शुरुआत एक लंबे और तेज सायरन से होगी। जैसे ही 5 मिनट का यह सायरन जैसलमेर की हवाओं में गूंजेगा, इसे काल्पनिक हवाई हमले का संकेत माना जाएगा। यह वह पल होगा जब पूरे जिले को एक साथ, एक सुर में प्रतिक्रिया देनी होगी। बिजली बुझानी होगी, वाहन रोकने होंगे और घरों के भीतर सुरक्षित जगह पर जाना होगा। यह सायरन सिर्फ एक आवाज नहीं - यह अनुशासन की परीक्षा की घड़ी होगी।
ये भी पढ़ें: Sawai Mansingh Stadium में नहीं हो पाएंगे अब IPL 2026 के मुकाबले? NGT का बड़ा एक्शन, जारी किया नोटिस
क्यों जरूरी है ब्लैकआउट ड्रिल?
जैसलमेर महज एक रेगिस्तानी शहर नहीं, यह देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा एक संवेदनशील जिला है। ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित हालात से पहले से तैयार रहना यहाँ की जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी। यही कारण है कि यहां इस तरह के सुरक्षा अभ्यास को न सिर्फ गंभीरता से लिया जाता है, बल्कि इसे नियमित रूप से दोहराया भी जाता है। प्रशासन का मानना है कि तैयारी वही काम आती है जो पहले से की गई हो।
युवा वॉलिंटियर बनेंगे सुरक्षा की असली ताकत
इस मॉक ड्रिल की सबसे खास और उम्मीद जगाने वाली बात है - युवाओं की सीधी भागीदारी। जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने NCC, NSS और स्काउट-गाइड से जुड़े छात्र-छात्राओं के साथ-साथ कॉलेज के युवाओं से अपील की है कि वे सुरक्षा वॉलिंटियर के रूप में सामने आएं। यह पहल सिर्फ आज की ड्रिल तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक दूरगामी सोच है - आने वाली पीढ़ी को आपदा प्रबंधन में दक्ष बनाना, ताकि जब कभी देश को जरूरत पड़े, यह युवा समाज की ढाल बन सकें।
पैनिक नहीं, अनुशासन है जरूरी
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक के बाद प्रशासन ने जिलेवासियों को एक साफ और सीधा संदेश दिया है कि घबराएं नहीं। यह कोई खतरे की घड़ी नहीं, बल्कि खतरे से पहले की तैयारी है। सायरन सुनकर अफवाहें न फैलाएं, न ही दूसरों को भ्रमित करें। बस शांत रहें और जो निर्देश दिए गए हैं, उनका पालन करें। प्रशासन ने हर नागरिक से एक जिम्मेदार शहरी की भूमिका निभाने का आह्वान किया है, ताकि यह अभ्यास पूरी तरह सफल हो और स्वर्ण नगरी हर चुनौती के लिए हमेशा तैयार रहे।
ये भी पढ़ें: Rajasthan Weather: नहीं मिलेगी गर्मी से राहत, IMD ने जारी किया येलो अलर्ट, राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम?
With AI Editing












Click it and Unblock the Notifications