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IPS SangaRam Jangir : कभी चराते थे बकरियां, 7 km दूर से लाते थे पानी, अब इन पर बनी फिल्म 'सूर्यवंशी'

Sangaram Jangid : राजस्थान का वो IPS जो साउथ में बना रियल सिंघम, फिल्म सूर्यवंशी है इन्हीं की स्टोरी

बाड़मेर। राजस्थान में बाड़मेर जिला मुख्यालय से 34 किलोमीटर दूर कवास कस्बे के सांगाराम जांगिड़ वो आईपीएस हैं, जिन्होंने दक्षिण भारत में रियल सिंघम की भूमिका निभाई। 35 साल पहले बाड़मेर जिले से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी बनने वाले ये पहले शख्स थे। आईपीएस सांगाराम जांगिड़ अब एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है रोहित शेट्टी की मार्च 2020 में रिलीज होने वाली फिल्म 'सूर्यवंशी'।

रियल सिंघम एसआर जांगिड़ से खास बातचीत

रियल सिंघम एसआर जांगिड़ से खास बातचीत

फिल्म 'सूर्यवंशी' आईपीएस सांगाराम जांगिड़ द्वारा तमिलनाडु में पोस्टिंग के दौरान रियल सिंघम स्टाइल में अपराधियों के खात्मे की कहानी है। जुलाई 2019 में तमिलनाडु पुलिस महानिदेशक विजिलेंस पद से रिटायर हुए आईपीएस सांगाराम जांगिड़ ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बताया कि उन्होंने 'ऑपरेशन बावरिया' किस तरह से अंजाम देकर एक दशक में 24 हत्या और डकैती करने वाली उस खतरनाक गैंग का नामो-निशां मिटाया।

क्या था आईपीएस जांगिड़ का 'ऑपरेशन बावरिया'

क्या था आईपीएस जांगिड़ का 'ऑपरेशन बावरिया'

तमिलनाडु की सत्ता जब जयललिता के हाथ में थी। तब राज्य में लूट और हत्या की वारदातों को अंजाम देने वाली एक खतरनाक गैंग सक्रिय थी। सत्ताधारी पार्टी के विधायक तक की हत्या कर दी गई थी। तमिलनाडु में कानून व्यवस्था को चुनौती दे रही इस गैंग के खात्मे के लिए तत्कालीन सीएम जयललिता ने पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल टीम गठित की, जिसको ​तमिलनाडु के तत्कालीन आईजी लॉ एंड ऑर्डर आईपीएस सांगाराम जांगिड़ ने लीड किया। टीम ने वर्ष 2005-2006 में उस गैंग के खिलाफ 'ऑपरेशन बावरिया' नाम से कार्रवाई की।

 एक जोड़ी जूती ने पहुंचाया गैंग तक

एक जोड़ी जूती ने पहुंचाया गैंग तक

तमिलनाडु में सक्रिय बावरिया गैंग ने आंध्रप्रदेश बॉर्डर से कृष्णागिरी को जोड़ने वाले हाईवे पर लूट और हत्या की कई वारदातों को अंजाम दिया था। गिरोह अकेले तमिलनाडु में 13 लोगों को मौत की नींद सुला चुका था। आईपीएस सांगाराम जांगिड़ के नेतृत्व में जांच में जुटी पुलिस को एक घटनास्थल पर जूती की जोड़ी मिली। उससे यह साफ हो गया था कि वारदात को अंजाम देने वाले लोग उत्तर भारत के है न कि दक्षिण भारत के। आईपीएस सांगाराम ने उसी जूती की जोड़ी के सहारे जांच को आगे बढ़ाया।

 'ऑपरेशन बावरिया' में पकड़ा गया था ओमा बावरिया

'ऑपरेशन बावरिया' में पकड़ा गया था ओमा बावरिया

'ऑपरेशन बावरिया' की सफलता ने आईपीएस सांगाराम जांगिड़ को देशभर की सुर्खियों में ला दिया था। इनकी टीम ने राजस्थान के भरतपुर जिले के रूपवास गांव से उस ओमा बावरिया को पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी जिस पर तमिलनाडु पुलिस ने पांच लाख रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था। तमिलनाडु कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष टीएम नटराजन और यूपी के सहारनपुर के एक विधायक की हत्या ओमा बावरिया की गैंग की थी। इस गैंग ने कर्नाटक में पांच और आंध्र प्रदेश में चार वारदातों को अंजाम दिया था।

 आईपीएस सांगाराम जांगिड़ की जीवनी

आईपीएस सांगाराम जांगिड़ की जीवनी

वर्ष 2006-07 में बाढ़ की चपेट में आने वाले कस्बे कवास के डूंगरराम जांगिड़ के घर सांगाराम जांगिड़ का जन्म ​हुआ। पिता परिवार का पुस्तैनी बढ़ई का काम करते थे। उन्होंने सांगाराम को खूब पढ़ाया लिखाया। नतीजतन सांगाराम वर्ष 1985 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अफसर बन गए। उस समय बाड़मेर जिले और जांगिड़ समाज से आईपीएस बनने वाले सांगाराम पहले व्यक्ति थे। अब रिटायरमेंट के एक साल और 'ऑपरेशन बावरिया' के 14 साल बाद सांगाराम जांगिड़ फिल्म 'सूर्यवंशी' को लेकर सुर्खियों में है। 'सूर्यवंशी' में सांगाराम की भूमिका अक्षय कुमार निभा रहे हैं।

नागाणा से लाते थे पीने का पानी

नागाणा से लाते थे पीने का पानी

बकौल सांगाराम जांगिड़, हमारे गांव कवास से ठीक सात किलोमीटर दूर नागाणा गांव है। यही पर एकमात्र कुआ था, जिसका पानी पीने योग्य था। घर से रोजाना ऊँट पर सवार होकर पेयजल लाते थे। इसके अलावा खेतों में हल जोतने और बकरियां का चराने का काम भी मेरे ही जिम्मे था। सांगाराम जांगिड़ बताते हैं कि वे उनके एक भाई व चार बहने हैं। भाई ताराराम जांगिड़ की वर्ष 2007 में कवास में आई बाढ़ में रेस्क्यू के दौरान गाड़ी फंसने के कारण उनकी मौत हो गई थी। सांगाराम जांगिड़ के दो बेटे सवाई जांगिड़ और विक्रम जांगिड़ हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी

पढ़ाई के साथ-साथ टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी

सांगाराम जांगिड़ की दसवीं तक की पढ़ाई गांव कवास के सरकारी स्कूल में हुई। कक्षा 11वीं और 12वीं और फिर बीए तक की पढ़ाई बाड़मेर जिला मुख्यालय से पूरी की। फिर एमए करने जयपुर आ गए। वर्ष 1979 में राजस्थान विश्वविद्यालय में एमए की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए जयपुर टेलीफोन एक्सजेंच में बतौर ऑपरेटर पार्ट टाइम जॉब भी करते थे। शाम को छह से रात तक टेलीफोन एक्सजेंच में दो रुपए प्रति घंटा के हिसाब से काम करते और दिन में विवि की पढ़ाई। एमए में पूरे राजस्थान में सांगाराम जांगिड़ तीसरे स्थान पर रहे थे।

इन पदों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई, पदक भी खूब मिले

इन पदों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई, पदक भी खूब मिले

आईपीएस सांगाराम जांगिड़ ने तमिलनाडु पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। तमिलनाडु में नीलगिरी, कडलूर, तिरुनेलवेली और तूतूकुड़ी जिले के एसपी, मदुरै, तिरुनेलवेली, चेंगलपट्टू और तंजावुर रेंज में डीआईजी रहे। इसके अलावा उत्तरी जोन के आईजी तथा मदुरै, तिरुनेलवेली और चेन्नई उपनगरीय शहर के पुलिस कमीश्नर रहे। जांगिड़ के पदकों से भी सम्मानित किया गया। इनमें राष्ट्रपति का वीरता पदक, पीएम का जीवन रक्षक पदक, प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक, सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक, सार्वजनिक सेवाओं में उत्कृष्टता के लिए पदक, कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए पद​क आदि शामिल हैं। ये देश के सबसे अधिक पद प्राप्त करने वाले आईपीएस अधिकारियों में से एक हैं।

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