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IAS vs RAS: पोकरण SDM प्रभजोत सिंह गिल का सनसनीखेज खुलासा, जैसलमेर DM प्रताप सिंह के बारे में क्‍या लिखा?

IAS vs RAS Rajasthan: राजस्‍थान की नौकरीशाही में कामकाज को लेकर दो अफसरों के लड़ाई सामने आई है। एक तरफ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर प्रताप सिंह व दूसरी ओर राजस्‍थान प्रशासनिक सेवा के अफसर प्रभजोत सिंह गिल हैं। गिल के समर्थन में राजस्‍थान आरएएस एसोसिएशन उतर आई है।

पूरा मामला यह है कि आईएएस प्रताप सिंह जैसलमेर के जिला कलेक्‍टर (Jaisalmer Collector Pratap Singh) हैं जबकि आरएएस प्रभजोत सिंह गिल (SDM Prabhjot Singh Gill) जैसलमेर जिले के पोकरण में उपखण्‍ड अधिकारी रहे हैं। एसडीएम गिल ने 7 मई 2025 को प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिखकर डीएम प्रताप सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

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पोकरण SDM प्रभजोत सिंह गिल ने जिला कलेक्टर प्रताप सिंह पर ये गंभीर आरोप

पोकरण के उपखंड अधिकारी (SDM) प्रभजोत सिंह गिल ने जैसलमेर के जिला कलेक्टर प्रताप सिंह के खिलाफ राज्य सरकार को एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजते हुए उन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में प्रभजोत सिंह ने लिखा है कि जिला कलेक्टर का व्यवहार न केवल उनके साथ अपमानजनक और दबावपूर्ण रहा है, बल्कि उन्होंने प्रशासनिक और न्यायिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की भी कोशिश की है।

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"देवेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई से रोका गया"

शिकायत के अनुसार, 27 अप्रैल 2025 को अतिरिक्त जिला कलेक्टर जैसलमेर द्वारा पोकरण के SDM और तहसीलदार को फोन पर जैसलमेर बुलाया गया, जहां जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने अपने चैंबर में प्रभजोत सिंह पर दो मामलों में "निर्दिष्ट" कार्रवाई करने का दबाव डाला।

पहला मामला एन.एस. फाइनेंस नामक कंपनी के खिलाफ था, जिसके मालिक देवेंद्र सिंह पर अवैध रूप से मनी लेंडिंग, अत्यधिक ब्याज वसूली और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप हैं। शिकायतकर्ता संजय और पूरणमल द्वारा प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर तहसीलदार ने प्रारंभिक जांच भी की थी।

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SDM का आरोप है कि कलेक्टर ने उन्हें मामले की कार्रवाई रोकने और शिकायतकर्ताओं को पुलिस के पास भेजने के निर्देश दिए, और यह भी कहा कि "क्या हर टूथपेस्ट 50 रुपये में बेचने वाले की शिकायत पर आप कार्रवाई करोगे?"

प्रभजोत सिंह का कहना है कि यह संवेदनहीन टिप्पणी एक ऐसे व्यक्ति के लिए की गई, जो आत्महत्या जैसे कदम की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक SDM होने के नाते शिकायतों की जांच करना उनका दायित्व है और प्रशासन को पुलिस से अलग अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

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"सोलर प्रोजेक्ट्स में पक्षपात का दबाव"

दूसरा मामला सोलर प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें अप्रावा कंपनी द्वारा सांकड़ा क्षेत्र में टावर लगाए जा रहे हैं। प्रभजोत सिंह ने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने सनावड़ा गांव जैसे ही तरीके से रिपोर्ट बनाई, तो उनकी मजिस्ट्रेट पावर छीन ली जाएगी।

सनावड़ा में ग्रामीणों ने सोलर कंपनी पर आरोप लगाए थे कि प्रभावशाली लोगों को अधिक मुआवज़ा दिया जाता है, जबकि गरीबों को जबरन पुलिस से दबाव डालकर टावर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है। SDM ने वहां निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी, जिसकी रिवीजन याचिका जुलाई 2024 से ही कलेक्टर के पास लंबित है।

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"मेरे न्यायिक फैसलों पर की गई अमर्यादित टिप्पणी"

प्रभजोत सिंह ने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर बार-बार उनके न्यायिक फैसलों पर टिप्पणी करते हैं और कहते हैं कि "ट्रांसफर एप्लीकेशन लग रही हैं, इसका मतलब तुम जज बनने के लायक नहीं हो।" जबकि ट्रांसफर याचिकाएं किसी भी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और यह तय करना जिला कलेक्टर का अधिकार नहीं कि अधिकारी योग्य है या नहीं।

"स्थायीकरण आदेश को रोका गया"

SDM ने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2024 में कार्मिक विभाग द्वारा जारी स्थायीकरण आदेश को जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने अब तक लागू नहीं किया है और वे इसे गैर-कानूनी तरीके से समीक्षा कर रहे हैं, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

"धमकाने और दबाव डालने की प्रवृत्ति"

प्रभजोत सिंह ने पत्र में लिखा है कि जिला कलेक्टर द्वारा लगातार धमकियां दी जाती हैं - जैसे नौकरी खराब कर देना, फील्ड पोस्टिंग रोक देना, मजिस्ट्रेट पावर छीन लेना आदि। उन्होंने IPC की धारा 189 और 503 का हवाला देते हुए कहा कि यह आचरण आपराधिक धमकी और दबाव डालने की श्रेणी में आता है।

अंत में, प्रभजोत सिंह ने सरकार से मांग की है कि श्री प्रताप सिंह के खिलाफ तत्काल प्रभाव से जांच कर कार्रवाई की जाए और उन्हें निर्देशित किया जाए कि वे किसी भी प्रकार की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने से विरत रहें।

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