IAS Tina Dabi ने भीलवाड़ा SDM रहते PAK में रह रहे शख्स की करोड़ों की जमीन का खातेदारी हक दूसरे को दिया
IAS Tina Dabi ने पाकिस्तान में रहने वाले शख्स की करोड़ों की जमीन का खातेदारी हक दूसरे को दिया
IAS Tina Dabi SDM Bhilwara Controversy : देश की सबसे चर्चित आईएएस टीना डाबी से जुड़ा करोड़ों की जमीन का मामला सामने आया है। पूरे मामले का मजमून ये है कि भीलवाड़ा में एसडीएम रहते हुए आईएएस टीना डाबी ने पाकिस्तान में रहे व्यक्ति की करोड़ों की जमीन के खातेहारी हक किसी दूसरे व्यक्ति को दिए। वर्तमान में टीना डाबी जैसलमेर की जिला कलेक्टर हैं। भीलवाड़ा तहसीलदार ने आईएएस टीना डाबी के निर्णय पर राजस्व कोर्ट में अपील कर उस फैसले को गलत बताया है। कोर्ट ने स्टे भी लगा दिया है।

पालड़ी गांव में है कस्टोडियन भूमि
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार 25 नवंबर 2019 को भीलवाड़ा एसडीएम टीना डाबी ने जमीन से जुड़ा एक निर्णय दिया था, जिसमें लिखा था कि भीलवाड़ा शहर के नजदीक पालड़ी गांव में आराजी नंबर 1186 /1 की 3.06 बीघा जमीन अब्दुल रहमान की थी। उसके पाकिस्तान चले जाने के कारण उनकी जमीन 9 जनवरी 1991 को कस्टोडियन भूमि यानी सरकारी कब्जे वाली जमीन घोषित कर दिया गया था।

नीलामी में सुखदेव जाट को 320 रुपए में मिली जमीन
इसकी जानकारी पुर्नवास विभाग नई दिल्ली के 9 जनवरी 1991 की क्रम संख्या 101 पर भी दर्ज है। इसके अलावा संवत 2014 से 2017 की जमाबंदी की नकल में अब्दुल के पाकिस्तान जाने संबंधित नोट भी अंकित है। अब्दुल के पाकिस्तान जाने के बाद जमीन क आराजी नंबर 2011 हो गए, जिसे सार्वजनिक नीलामी में सुखदेव जाट को वर्ष 1973 में 320 रुपए में दी गई। अभी मौके पर कब्जा भी इसका ही है। इसलिए इनको खातेदार घोषित किया जाता है।

उप पंजीयक सीधे जमीन की रजिस्ट्री कर दी
खातेदारी अधिकार मिलने के बाद जमीन का नामांतरण होना चाहिए था, लेकिन नामांतरण के बजाय भीलवाड़ा के तत्कालीन उप पंजीयक अजीत सिंह ने सीधे जमीन की रजिस्ट्री कर दी। जब राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इसे गलत माना। इसके बाद भीलवाड़ा तहसीलदार ने तत्कालीन एसडीएम टीना डाबी की ओर से की डिक्री और अजीत सिंह की ओर से किए गए पंजीयन को गलत बताते हुए इसके खिलाफ भू प्रबंध अधिकारी एवं पदेन राजस्व अपील प्राधिकारी कोर्ट में अपील कर दी। अपील पर कोर्ट ने स्टे दे दिया।

अपील में डिक्री और पंजीयन करने को भारी भूल बताया
अपील में डिक्री और पंजीयन करने को भारी भूल बताया है। इसके अलावा एसडीएम डाबी की ओर से की गई डिक्री और अजीत सिंह की ओर से किए पंजीयन के मामले में जिला प्रशासन ने भी अपने स्तर पर एक जांच करवाई। इस जांच में भी डिक्री और पंजीयन पर सवाल उठाए हैं। विवादित जमीन की वर्तमान कीमत करीब 8 से 10 करोड़ रुपए है। करोड़ों की जमीन के खातेदारी हक के मामले में भीलवाड़ा की तत्कालीन एसडीएम व जैसलमेर जिला कलेक्टर टीना डाबी का कोई बयान नहीं आया।

क्या कहा तत्कालीन उप पंजीयन ने?
वहीं, इस संबंध में तत्कालीन उप पंजीयन अजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने इस जमीन का पंजीयन एसडीएम की डिक्री की आधार पर किया गया था। हालांकि तहसीलदार की ओर से अपील करने के बाद नामांतरण रोक दिया गया है और अभी जमीन पाकिस्तान में रह रहे व्यक्ति के ही नाम है।

क्या लिखा तहसीलदार की अपील में?
पूरे मामले में तहसीलदार की ओर से की गई अपील में लिखा है कि कस्टोडियन जमीन के हस्तांरण के लिए संपदा अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। नीलामी में कार्रवाई विधि संगत नहीं है। इसलिए पहले की गई पूरी कार्रवाई अवैध और शून्य हो जाती है। डिक्री के लिए जिस तथाकथित नीलामी की रसीद को आधार बनाया उस रसीद में न तो आराजी संख्या लिखी और न ही उसके संबंध में कोई ज्यादा जानकारी लिखी है। ऐसे में सिर्फ रसीद के आधार पर जमीन नीलाम करना सिद्ध नहीं होता।












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